रफीक बन के मिले चोट लगाने वालेशुक्रिया नींद से मुझको जगाने वालेजल जलके कतरे मेरे सब राख हुएआये बड़े देर से है आग बुझाने वालेमुफ़्लसी देखके अब लोग बहुत हस्ते हैबड़े बेदर्द है ये आज जमाने वालेहमने तो मांगा हाथों का सहारा उनकालो आ गए मुझको कांधो पे उ...

जिंदगी की ठोकरों ने चैन से जीने ना दियाआग लगी ठंडी हवा जब भी तुझे याद कियायकी करना मेरा मुमकिन नही किसी पे कहींयकीन जीत कर ही उसने फ़िर बर्बाद कियागम नही खोने का ये सोच के हैरान हूँ मैंजिसपे सब छोड़ दिया उसने मुझे छोड़ दियागैर मतलब से तो कोई नहीं ...