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Gazal

जिंदगी की ठोकरों ने चैन से जीने ना दिया

आग लगी ठंडी हवा जब भी तुझे याद किया

यकी करना मेरा मुमकिन नही किसी पे कहीं

यकीन जीत कर ही उसने फ़िर बर्बाद किया

गम नही खोने का ये सोच के हैरान हूँ मैं

जिसपे सब छोड़ दिया उसने मुझे छोड़ दिया

गैर मतलब से तो कोई नहीं बनता अपना

बस इतना समझने था के जिस्म ने दम तोड़ दिया

नरेंद्र रघुवंशी

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