"मौन की धरा पर शोर कई धरे हैं,काबू में हैं कुछ...कई काबू से परे हैं।धरे हैं सामने पड़े कुछकुछ शालीन मन में धरे है,मन चिंतन करे कई का...कई चिंतन-मनन से परे हैं।करें क्षण-क्षण तंग कुछकर-कर तंग कई मूर्छित धरे हैं,माने मन कुछ की कभी...कई मन से अभी भी ...

SituationKaisi paristhiti thi — Baar baar try karne pr bhi ho chahate ho (success) na mileEhsaasहाथ पैर मारकर भी जब कुछ न हो...बहुत थक गया हूं।तमस भरी गलियों के वो भयंकर सन्नाटेभीतर का शोर और हालातों के मौन चांटे,टूटी उम्मीदें, झूठे दिलासे ओर कंपि...
