जब मैं रेत बनजाऊँ,तुम मौन पवन बन जाना,मेरे बिखरे कण-कण में,अपना स्पर्श जगा जाना…जब मैं जल बनूँ,तुम लहरें बन जाना,मेरे बहाव में खोकर,मुझे ही किनारा बना जाना…जब मैं दीप बनकर जलूँ,तुम अँधेरा ही बने रहना,ताकि मेरी लौ को भी,अपना वजूद मिल सके...जब मैं र...

मुझे तुम्हारा यूँ जलते रहनाबेहद सुकून देता है।तुम्हारा यूँ जलनामेरे लिए एक ऊर्जा है।जब तुम अपनी अल्प-सी रोशनी से हीमेरे इस कक्ष को आलोकित कर देते हो,तब मेरी यह कलम भीशब्दों में प्रवाह खोज लेती है।यह कलम भीलिखना शुरू कर देती है।मेरी कविताओं कोतुम्ह...