मुझे तुम्हारा यूँ जलते रहना
बेहद सुकून देता है।
तुम्हारा यूँ जलना
मेरे लिए एक ऊर्जा है।
जब तुम अपनी अल्प-सी रोशनी से ही
मेरे इस कक्ष को आलोकित कर देते हो,
तब मेरी यह कलम भी
शब्दों में प्रवाह खोज लेती है।
यह कलम भी
लिखना शुरू कर देती है।
मेरी कविताओं को
तुम्हारे प्रकाश का साथ चाहिए होता है।
इस अंधेरे में कविताएं लिखना
मेरे लिए कठिन हो जाता है।
मगर तुम्हारा यूँ
धीरे-धीरे जलते रहना
मेरी कलम को
ठहरने से बचाए रखता है।
तुम यूँ ही जलते रहना,
मेरे दीप…
~ कोमल भारद्वाज ❝ चित्रलेखा ❞