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kavi sharda prasad tiwari

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Personal Story

मकान मौजूद है वहीं पर पर घर ना रहा

अब वो दौर वो रुतबा वो असर ना रहा.जो था कभी शहर मैं वो कहर ना रहा..जहाँ पैदा हुये पले और बड़े हुये हैं हम.आज क्यों लग रहा मेरा वो शहर ना रहा..आ जाता हूँ देखने मैं मल्कियत बाप की.मकान मौजूद है वहीं पर वो घर ना रहा..कायम है वो जमीं दिवारें और छप्पर भी...

kavi sharda prasad tiwari
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Personal Story

जंगलों से ज्यादा लगी,शहरों में नफरती आग है

जानवरों से बुरा,मनुजों का आज भाग(भाग्य) है.जंगलों से ज्यादा लगी,शहरों में नफरती आग है..आग से बचने को घर,छोड़ें तो फिर जायें कहाँ.माली की नजरों के आगे,जलता रहा यह बाग है..सियारों की एका के आगे,सिंह भी बेबस हुये हैं.हर मोड़ पर डसने मुझे,बैठा कोई काला ...

kavi sharda prasad tiwari
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