एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो दुःख में दीप जलाए,अपने साहस की उजली आभा से तम को दूर भगाए।एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो पथ अपना चुन पाए,दृढ़ निश्चय की अटल शक्ति से हर बाधा झुकाए।एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो सत्य सदा अपनाए,झूठे जग के कोलाहल में भी स्वाभिमान ...

आहिस्ता चल ज़िन्दगी, अभी कुछ ख़्वाब सजाना बाकी हैं,दिल की बिखरी गलियों में, फिर दीपक जलाना बाकी हैं…थोड़ा वक़्त खुद को देना है, थोड़ा अपनों को मनाना बाकी है,कुछ रिश्तों की टूटी डोरों को फिर से जोड़ जाना बाकी है।कुछ सपने जो पलकों पे ठहरे, उनको सच ब...
