Back to feed

एक ऐसी स्त्री बनना तुम

एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो दुःख में दीप जलाए,

अपने साहस की उजली आभा से तम को दूर भगाए।

एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो पथ अपना चुन पाए,

दृढ़ निश्चय की अटल शक्ति से हर बाधा झुकाए।

एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो सत्य सदा अपनाए,

झूठे जग के कोलाहल में भी स्वाभिमान बचाए।

एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो आँसू भी पी जाए,

मुस्कान की निर्मल गंगा से जीवन पथ सरसाए।

एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो सपनों को थामे,

मेहनत की तपती धूपों में भी आशा का दीपक थामे।

एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो अन्याय से टकराए,

निर्भय होकर अपने हृदय की ज्वाला जग में दिखलाए।

एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो प्रेम सुधा बरसाए,

कटुता के हर शुष्क वन में मधुरस सुमन खिलाए।

एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो ज्ञान ज्योति जलाए,

अज्ञानों के घने कुहासे को प्रकाश पथ दिखलाए।

एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो खुद पर विश्वास करे,

अपने श्रम की पावन शक्ति से जीवन इतिहास रचे।

एक ऐसी स्त्री बनना तुम, जो अपनी पहचान गढ़े,

साहस, श्रम और स्वाभिमान से नव युग की रचना करे।

🤌🌺✨✨

- दिव्या सिंह

Baatcheet