
आहिस्ता चल ज़िन्दगी, अभी कुछ ख़्वाब सजाना बाकी हैं,
दिल की बिखरी गलियों में, फिर दीपक जलाना बाकी हैं…
थोड़ा वक़्त खुद को देना है, थोड़ा अपनों को मनाना बाकी है,
कुछ रिश्तों की टूटी डोरों को फिर से जोड़ जाना बाकी है।
कुछ सपने जो पलकों पे ठहरे, उनको सच बनाना बाकी है,
इन थकी हुई आँखों में फिर से एक नया सवेरा लाना बाकी है।
गिरकर फिर से उठना है मुझको, हौसला आज़माना बाकी है,
इस भीड़ भरी दुनिया में खुद को पहचानना बाकी है।
कुछ आँसू चुपके बहने हैं, कुछ ज़ख्म छुपाना बाकी है,
मुस्कान ओढ़ के होठों पर, सबको हँसाना बाकी है।
आहिस्ता चल ज़िन्दगी…
अभी तो मैंने जीना सीखा है,
अभी पूरा आसमाँ पाना बाकी है… ✨