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Author Dr. Neeru Mohanसिर्फ़ राख होने के लिए” सिर्फ़ राख होने के लिए आदमी एक-दूसरे से कितना जलता है,

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Personal Story

“सिर्फ़ राख होने के लिए” कविता

आदमी एक-दूसरे से कितना जलता है,कितनी ईर्ष्याओं की चिंगारियाँअपने ही आँगन में पलता है।वह भूल जाता है —कि आग पहले हाथों को जलाती है,फिर घरों को,और अंत में रिश्तों की छाँव को भीधीरे-धीरे राख बनाती है।आज का समय भीअजीब दर्पण लेकर खड़ा है —जहाँ मुस्कानो...

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Life Lessons

शीर्षक: “झूठ के मुखौटे”

जिसने माँ की थकी हथेली कोअपने माथे से रोज़ लगाया,जिसने पिता की झुकती कमर कोअपना सहारा बनकर संभाला।जिसने सास–ससुर में भीमाँ–बाप का ही रूप देखा,जिस बहू ने हर ताने सहकर भीघर का हर दीपक स्नेह से रेखा।वही बेटा… वही बहूआज समाज की आँखों में कटघरे में हैं...

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