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Aryan Kumar

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Personal Story

उस दहलीज की बेटी

वो जो चौखट पर ठिठकी हुई एक बेनाम दस्तक है,शायद मेरे मुक़द्दर की वही तस्वीर है।माँ के होठों की लाली, जब ज़ख़्मों को छुपाती है,तवायफ़ की वह बेटी, हर रात मर जाती है।मैं खिलौनों से नहीं, घुँघरुओं की खनक से जागी हूँ,मैं अपनी ही परछाईं के साये से भागी ह...

Aryan Kumar
2m read220
Personal Story

नज़रों का अँधेरा

वो शहर आज भी ज़िंदा है,जहाँ रातें सिर्फ़ अँधेरा नहीं ओढ़तीं,बल्कि चीखों को दफ़्न करके सोती हैं।जहाँ हर गली के मोड़ परएक खामोशी लटकी मिलती है,और दीवारों पर सूखे हुए धब्बेकिसी मासूम की आख़िरी कहानी कहते हैं।वो फूल,जिसे खिलना था किसी बगिया में,आज किस...

Aryan Kumar
1m read140
Personal Story

सपनों की नीलामी

वो जो चौराहे पर खड़ा, एक नन्हा सा कंधा है,उसकी आँखों में बचपन नहीं, बस पेट का धंधा है।हाथों की लकीरें उसकी, कालिख से भर गई हैं,शायद ख़्वाहिशें उसकी, भूख के डर से मर गई हैं।तुम जिसे 'सस्ता मज़दूर' कह कर बुलाते हो,दो रुपए बचाकर, खुद को बड़ा बताते हो।उसक...

Aryan Kumar
2m read170
Aryan Kumar — Lekhak | Vyaktigat Vikas | Vyaktigat Vikas