“मेरी पहली नौकरी — एक अनमोल कहानी”बिहार के एक छोटे से गाँव की गलियों में पली-बढ़ी मैं, अक्सर आसमान को निहारते हुए बड़े सपने देखा करती थी। मन में एक ही विश्वास था कि जीवन में कुछ ऐसा करना है जिससे अपने अस्तित्व को एक नई पहचान दे सकूँ। समय के साथ पढ...
जब भी जीवन में झाँकती हूँ,हर बार स्वयं कोबेबस और लाचार ही पाती हूँ।लोगों ने कहा —“गलती तुम्हारी ही होगी”,और मैं हर बारअपने ही अस्तित्व पर प्रश्न उठाती रही।सपने तो बहुत बड़े देखे थे मैंने,पर सही समय परसमझाने वाला कोई नहीं मिला।बस एक चाह थी —कोई ऐसा...
