Personal Story
चोर, मवाली और गुंडे
चोर, मवाली, गुंडे यारो, चला रहे हैं देश, बदल-बदल कर भेषकभी दाढ़ी कटवाते हैं, कभी बढ़ा लेते हैं केश कभी धर्म पे दंगे करवाते हैं, कभी धर्म के उनके लगती ठेसचोर, मवाली, गुंडे यारो, चला रहे हैं देश, बदल-बदल कर भेष।।कभी चंदा चोरी करते हैं, कभी धंधा चोरी...