जब मुझे सर्वीस सेंटर पर काम करने के लिए बोल दिया तब में बहुत खुश हो गया। कि चलो अब मुझे नोकरी मिल गई है। और में खुशी खुशी अपने कमरे पर लोट आया। लेकिन जिस कमरे पर में रहता था। उस कमरे के सामने एक लड़की रहती थी। तों कभी कभी मेरी उस लड़की पर नजर पड़ जाती थी। जिसको उस लड़की के माता-पिता और बहन जीजाजी ने ग़लत समझ लिया। और मुझे हमेशा गुस्से भरी नजरों से देखते रहते थे। इस वजह से मेने फिर उस जगह से अपना कमरा ख़ाली कर लिया और उसी कालोनी में दूसरा कमरा रहने के लिए देख लिया। और उसमे अपना सामान शिफ्ट कर दिया। फिर अगले दिन में सुबह से तैयार होकर सर्वीस सेंटर पर पहुंच गया। जब में सर्वीस सेंटर पर पहुंचा तो मुझे सर्वीस सेंटर पर ओवनर और एक मेडम मिली जिन्होंने मुझे बेठने के लिए बोला तो में चैयर पर बेठ गया। फिर सर को एक फोन आया तों सर कंप्लेन देखने के लिए बाहर चले गए। फिर में और मेडम आफिस में रह गये। फिर मेडम मुझसे बातचीत करते रहे। और मेरे बारे में पुछताछ करते रहे। जैसे कि मेरी पर्सनल जानकारी लेते रहे। फिर थोड़ी देर बाद सर के पिताजी आफिस में आयें तो सर के पिताजी ने मेडम से मेरे बारे में पुछा कि में कोन हुं। तो मेडम ने कहा कि सर ने नये लड़के को भर्ती किया है। और आज से नई ज्वाइनिंग है। तों सर के पिताजी ने फिर मुझसे बातचीत कि और पुछा कि पहले कभी काम किया है। तो मेने हां कह दिया। तब सर ने कहा कि तुम्हारे पास बाइक है। तो मेने मना कर दिया। तो सर के पिताजी ने मेडम से कहा कि इसके पास बाईक नहीं है तो यह यहां काम कैसे कर पायेगा। फिर सर के पिताजी ने मुझसे पूछा कि साइकिल है। तो मेने मना कर दिया। तो फिर सर के पिताजी ने कहा कि यहां बीना बाइक के तुम क्या काम करोगे। फिर थोड़ी देर में सर आफिस में आ गए। तो सर के पिताजी ने सर से कहा कि इस लड़के के पास ना तो बाइक है ना साइकिल है। तुमने इसे आफिस में किस काम के लिए रखा है। यहां आफिस में यह क्या काम करेगा। तों सर ने कहा कि आफिस में एक लड़के कि जरुरत पड़ेगी। फिर थोड़ी देर बाद सर को एक और कंप्लेन का फोन आया। यह आफिस फ़ोटो काॅपी मशीन फैक्स मशीन कार्डलेश फोन रिपेयरिंग सर्विस सेंटर था। जिसमें सर फोटो काॅपी मशीन फैक्स मशीन सेलिंग का भी काम करते थे। जब कोई कस्टमर मशीन ओर्डर करता था। तो सर मशीन इंस्टॉल करने के लिए जातें थें। तो उन्होंने मुझे उनके साथ रहने के लिए रखा था। जो कि फिर सर के पिताजी को बात समझ आ गई। कि अच्छा इसलिए इस लड़के को रखा हुआ है। फिर सर के पिताजी ने सर को कुछ नहीं कहा और फिर थोड़ी देर बाद एक कस्टमर ने एक मशीन का ओर्डर दिया तों सर ने मुझे अपने साथ रखा और हम दोनों गाड़ी में बेठकर कस्टमर के आफिस में पहुंच गए। फिर कस्टमर के आफिस में सर ने मशीन इंस्टॉल करने कि प्रक्रिया शुरू कि और मुझे कहा कि तुम मुझे देखते जाओ कि मैं मशीन कैसे इंस्टाल करता हूं। ताकि फिर जब तुम मशीन इंस्टॉल करना सीख जाओगे तब तुम भी ऐसे मशीन इंस्टॉल करने के लिए जाना। तो मेने सर को हां कहकर प्रक्रिया को देखने लगा। फिर जब सर ने मशीन को इंस्टॉल कर दिया तब मुझसे पुछा कि कुछ समझ आया। तो मेने कहा कि हां सर पुरी प्रक्रिया तो नहीं लेकिन कुछ कुछ समझ आ गया तो सर ने कहा कि ठिक है। कुछ तो समझ आया। अभी हम और भी बहुत जगह जायेंगे। तो तुम्हें और अच्छे से समझ आ जायेगा। फिर वापस आफिस आने के बाद आफिस में रखीं मशीनों का डेमो देकर सीखाते थें। आफिस में दो लोग और भी थें। जो काम करते थे। उन दोनों के पास बाइक थीं। इसलिए वै दोनों बाइक से कंप्लेन देखने के लिए जाया करते थे। लेकिन जब उन दोनों लोगों ने मुझे देखा कि मेरे पास बाइक नहीं है तो उन्होंने भी मुझे यहीं कहा कि बीना बाइक के तुम यहां नोकरी नहीं कर पाओगे। भगवान ने मुझे इस आफिस में इसलिए भेजा था। क्योंकि मैं बहुत भाग्यशाली था। में जहां भी जाता था उस जगह पर लक्ष्मी जी का आगमन हो जाता था। साथ ही जिस व्यक्ति के जीवन में रहता था। उसके जीवन से जुड़े नकारात्मक लोगों कि असलियत उजागर करता था। खैर अभी मुझे जिन दो लोगों ने मुझे आफिस में देखा था। यहीं दो लोग थें। जो सर के ही आफिस में काम करतें थे। और सर के पीठ पीछे लोगों में बुराई करतें थे। साथ ही सर का नुक़सान भी करतें थे। खैर अभी मेरे पास ना तो बाइक थीं। और ना साइकिल थीं। तो सर मुझे अपने साथ गाड़ी में हेल्पर के तोर पर साथ लेकर जाते थे। साथ ही सीखाते भी थें। तो मुझे अच्छा लगता था। और खुश भी था कि थोड़ी सी मेहनत और सर के साथ गाड़ी में घुमना फिरना भी हो जाता था। लेकिन में सर के साथ जब वापस आफिस में आता था तो में सिर्फ अपना काम करते रहता था। में उन दोनों लोगों से ज्यादा कोई बातचीत नहीं करता था। और ना ही उन दोनों लोगों से कोई पुछताछ करता था। क्योंकि मैं सर के साथ रहता था। तो मुझे कुछ भी पुछना पड़छना रहता था तो में सिर्फ सर से ही पुछता था। उन दोनों लोगों से कोई भी बातचीत नहीं करता था। और जब में उन दोनों से कोई बातचीत नहीं करता था। तो उन दोनों लोगों को यह देखकर गलतफहमी हो गई कि मैं बहुत घमंडी हुं। साथ ही सर मेरे और उनके बीच भेदभाव कर रहें हैं। मुझे उनसे छुपाकर दुसरा ज्ञान देकर उनसे कुछ अच्छा सीखा रहा है। ताकि फिर जब दीपक सीख जायेगा तब हम दोनों मे से किसी एक को सेंटर से निकाल देंगे। यहीं बातें सोचकर वै दोनों लोग मुझे अपने साथ काम करने के लिए चालाकि चलने का फैसला करते हैं। जिसकी वजह से मेरी यह खुशी ज्यादा दिन तक नहीं टीकी क्योंकि में सर के साथ जाता था। और वापस आने के बाद फिर पुरे दिन आफिस में बेठा कुछ ना कुछ करतें रहता था। लेकिन मेरा आफिस में बेठना उन दोनों लोगों को अखरने लगा। कि यह कल का आया हुआं लड़का आज सर के साथ गाड़ी में घुमता फिरता है। और हम आज तक गाड़ी में कभी बेठे भी नहीं है। और अगर हम गाड़ी में नहीं बेठे है तो फिर इसको भी नहीं बेठने देंगे। तो दोनों में से एक ने सर को कहा कि दीपक के पास बाइक नहीं है। तो यह सारा दिन आफिस में ही बेठा रहता है। और अगर यह आफिस में ही बेठा रहेगा तो फिर काम कैसे सीखेगा। तों एक काम करो सर आपके पास आपकी पुरानी साइकिल है। वह दीपक को दे दिजिए तो यह साइकिल से आस पास के काम तो करेगा। आस पास कि कंप्लेन तो देखेगा। तों अब सर कोई बहाना भी नहीं दें सकते थे। कि मेरी साइकिल खराब हो गई है। क्योंकि साइकिल को अच्छी कंडिशन में उन दोनों लोगों ने देख रखा था। तो फिर सर को दोनों लोगों कि बात माननी पड़ी। और शाम के समय सर मुझे अपने साथ अपने घर पर लेकर गये और अपनी पुरानी साइकिल मुझे दें दी। अब साइकिल लेकर में अपने कमरे पर चला गया। और खाना खाकर सो गया। फिर अगले दिन में सुबह से तैयार होकर साइकिल से आफिस गया। साइकिल चलाएं हुए मुझे काफी समय हो गया था। इसलिए साइकिल मुझसे चलें ही नहीं। तो जैसे तेसे करके आफिस पहुंचा। फिर आफिस में पहुंचने के बाद सर अपने काम से बाहर निकल गये। फिर मेडम ने उन दोनों लोगों को भी उनकी कंप्लेन बता दि तो वै दोनों लोग भी अपनी अपनी कंप्लेन देखने के लिए चलें गये। फिर मेडम ने पांच छः चैक थें। वह चैक देकर मुझे बेंक जाने के लिए बोला। तों में चैक लेकर बेंक चला गया। बेंक में चैक जमा करने के बाद में वापस आफिस में लोट आया। फिर मेडम ने मुझे दो आफिस के एड्रेस दिए जहां से मुझे चैक लेकर आना था। तों मेने अपनी साइकिल उठाई और मेडम के बताए हुए एड्रेस पर निकल पड़ा। मुझे साइकिल चलाएं हुए बहुत समय हों गया था। इसलिए साइकिल चलाने में मेरे पैर दर्द कर रहें थे। लेकिन मेडम के बताएं एड्रेस पर भी जाना जरूरी था। क्योंकि उस एड्रेस से मुझे चैक लेकर आना था। इसलिए फिर बीच बीच में सुस्ताने के लिए साइकिल रोक कर बेठ जाया करता था। फिर जब दर्द कम होता तों फिर से साइकिल चलाने लगता था। फिर में फाइनली में मेडम के बताएं हुए एड्रेस पर पहुंच गया। और उस आफिस में जाकर बताया कि में उस आफिस से चैक लेने के लिए आया हुं । तों आफिस वालों ने मुझे आफिस में बिठाया और थोड़ी देर रुकने के लिए बोला तब में भी आफिस में थोड़ी देर के लिए बेठ गया। और चैक मिलने के बाद वापस आफिस के लिए रवाना हो गया। लेकिन मेरे पैर बहुत दर्द कर रहें थे। और यह दर्द मुझे आफिस के उन दो नकारात्मक लोगों कि वजह से मिला था। जो मेरे बारे में ग़लत धारणा रखते थें। साथ ही मुझे दर्द देकर अपने सामने झुकना चाहते थे। क्योंकि जब मुझे दर्द होगा। तो में अपने दर्द के बारे में उन दोनों लोगों को बताऊंगा ही सही। लेकिन मुझे साइकिल दिलाने के लिए दोनों लोगों ने ही सर को बोला था। लेकिन मेने अपना दर्द छुपा लिया और किसी से कुछ नहीं कहा। और फिर साइकिल से ही काम करने लगा। शुरुआत में मुझे फ़ोटो काॅपी मशीन को रिपेयर करना नहीं आता था। इसलिए फिर सर ने दोनों लोगों को मुझे सीखाने के लिए बोला। तो दोनों मुझे सही से सीखाते नहीं थे। यह सोचकर कि अगर यह सीख गया तो बोस हम दोनों में से किसी एक को भगा देंगे। या फिर आफिस में हम दोनों कि वेल्यू कम हो जायेगी। या फिर जो चालाकियां हम करते आ रहे थे। उन चालाकियों के बारे में इसे पता चल जायेगा। और अगर हमारी चालाकियों के बारे में इसे पता चल गया तो फिर हमारी वेल्यू दीपक के सामने भी ज़ीरो हो जायेगी। इसलिए वै दोनों मुझे काम पुरी ईमानदारी से नहीं सीखाते थें। और सीखाएंगे भी तो ऐसे बोलेंगे कि उनकी बोली हुई भाषा उनको ही समझ आएं। जब दोनों मुझे सही से काम सीखाए नहीं तो फिर मेने मेडम से यह बात बोल दिया। तो मेडम ने मेरा सपोर्ट करते हुए सर को यह बात बता दी कि सर ये दोनों लोग दीपक को काम सही से नहीं सीखाते है। तो सर ने फिर मुझे कुछ दिनों तक आफिस में रखा और खुद ही मशीन रिपेयर करना सीखा दिया। जब सर ने मुझे मशीन रिपेयर करना सीखा दिया तब सर ने मुझे एक कंप्लेन देखने के लिए भेजा। तों में अपनी साइकिल से रिपेयर करने वाले टुल लेकर निकल पड़ा। फिर मेने उस एड्रेस पर पहुंचकर मशीन रिपेयर कर दिया और वापस आफिस में लोट आया। फिर मेडम को मशीन में क्या क्या रिपेयर किया उसकी जानकारी दी। तों मेडम ने एक रजिस्टर में दर्ज कर लिया। फिर मेडम ने मुझे कुछ चैक दिए और कहा कि इन्हें बेंक में जमा कर आओ फिर खाना खाने चले जाना। मेने अच्छा कहकर चैक लिए और बेंक चला गया। फिर बेंक से वापस आकर खाना खाने चला गया। फिर जब सर आयें तो सर ने मेडम से मेरे बारे में पुछा कि दीपक कंप्लेन क्लीयर कर आया तों मेडम ने हां कह दिया। तो सर ने कहा कि अभी कहां गया है दीपक तों मेडम ने कहा कि अभी वह खाना खाने गया है। तो सर ने कहा कि ठिक है। अब वह कंप्लेन देख लिया करेगा। तों मेडम ने कहा कि हां सर। फिर में जब खाना खाकर वापस आफिस में आया तो सर ने कहा कि दीपक मशीन रिपेयर करने में कोई परेशानी तो नहीं हुई तो मेने कहा कि नहीं सर तो सर ने कहा कि अब तो मशीन रिपेयर कर लोगे ना तो मेने कहा कि जी हां सर तों सर ने कहा कि ठिक है। फिर थोड़ी देर आफिस में फेंकने के बाद मेडम के पास एक और कस्टमर ने फोन किया कि उनकी मशीन काम नहीं कर रहीं हैं। तो आप किसी चेकर को आफिस में भेज दिजिए। तों मेडम ने मुझे कहा कि दीपक तुम वहां चलें जाओगे तो मेने हां कह दिया। और मेडम ने एक खाली स्लीप देकर मुझे रवाना कर दिया। फिर में उस आफिस में पहुंचा और फोटो कापी मशीन को देखने लगा। जब खराब पार्ट के बारे में पता चल गया तब मेने खराब पार्ट मशीन से हटाकर नया पार्ट लगा दिया। और मेडम को जानकारी दें दीं। कि मेने मशीन में क्या चेंज किया। साथ ही मेने खाली स्लीप में मशीन में जो भी चेंज किया था। वह भरकर आफिस वालों को दें दिया। और वापस आफिस के लिए रवाना हो गया। और अब लगभग में फोटोकॉपी मशीन रिपेयरिंग का सारा काम करने लगा था। तों अब मुझे आफिस के उन दोनों लोगों से कुछ भी सीखने कि कोई जरुरत नहीं थी। अब जब भी कोई कंप्लेन आतीं थीं। तो मेडम मुझे बता दिया करतीं थीं। और में टुलकिट लेकर चला जाता था। और अगर फिर भी मुझे कोई परेशानी आती थी। तो मेडम और सर ने मुझे बोल रखा था कि तुम आफिस में मेडम से या मुझसे पुछ लिया करों। तो हम दोनों ही तुम्हें बता दिया करेंगे। तों में पुरी तरह से बेफिकर होकर कंप्लेन देखने निकल जाया करता था। वैसे तो कोई खास परेशानी मुझे होती नहीं थीं। पर जब कभी