में सीधा-साधा भोला-भाला मासुम ईमानदार था। में ईमानदारी से कर्म करता था। में जहां भी जाता वहां अपना 100% देता था। मेरी सोच अच्छी थीं ईमानदारी कि थी तो मुझे लोग भी ईमानदार ही मिलते थें। चाहें वो मेरा करियर हो या लव लाइफ हों। मुझे करीयर नोकरी में भी ईमानदार और सक्षम लोग ही मिलते थें। लव लाइफ में भी ईमानदार पार्टनर ही मिलता था। जो जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम रहता था। हर लिहाज से सक्षम था। जो मुझे लाइफ में आगे बढ़ाने में मेरे सपने पुरे करने में मेरी सहायता करते थे। लेकिन मेरे करीयर और लव लाइफ के बीच कुछ नकारात्मक लोग आ जाते थे। जो मुझे झुटा धोखेबाज और बेईमान साबित करने के लिए मेरे और बोस और मेरी प्रेमिका के बीच गलतफहमी उत्पन्न करते थे। जिससे मुझे अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए बहुत संघर्ष और मेहनत करनी पड़ती थी। जैसे कि में अभी आफिस में बोस के सामने अपनी ईमानदारी साबित करता था। और ये दोनों मुझे बोस और बोस कि फेमिली कि नज़र में झुटा धोखेबाज और बेईमान साबित करने में लगे हुए थे। लेकिन सर और सर कि फेमिली मेरी ईमानदारी पर भरोसा करने लगे थें। और इन दोनों कि बातों को नजरंदाज करने लगे थें। क्योंकि इन दोनों का भांडा फुट चुका था और इन दोनों कि असलियत सर और सर कि फेमिली के सामने उजागर हो चुकी थी। जिससे दोनों कि सर और सर कि फेमिली के सामने कोई इज्जत कदर मान सम्मान नहीं रहा था। अब सर केवल इन दोनों को झेल रहे थे। क्योंकि मुंह से बोलकर आफिस से भगा नहीं सकते थे। क्योंकि दोनों का कोई भरोसा नहीं था कि कब क्या कर दें। इसलिए सर और सर कि फेमिली इन दोनों को नजरंदाज करने लगे थें। यह सोचकर कि जब हम दोनों को इग्नोर करेंगे नजरअंदाज करेंगे तो दोनों खुद ही आफिस छोड़कर चले जायेंगे। लेकिन वै दोनों इस आफिस से जानें वाले नहीं थे। क्योंकि ऐजेड व्यक्ति सर के गांव का ही था। और उनका होम लोन चल रहा था। और अब उसकी उम्र भी हो चुकी थी। तों वह इस उम्र में दुसरी नोकरी ढुंढने कहा जाता। इसलिए उसने मेडम कि हम उम्र के लड़के को बली का बकरा बनाया था मेडम को परेशान करने के लिए। कि तुम मेडम के सामने एडल्ट हरकतें करना। क्योंकि एडल्ट हरकतें ही हें। जिसकी वजह से उसे आफिस से निकाला जा सकता था। और दुसरा यह कि एक एडल्ट हरकतें ही है जिससे किसी महिला को परेशान कर सकतें थें डरा धमका सकते थे। इसलिए दोनों ने इस हरक़त को अंज़ाम दिया। ताकि मेडम गुस्से में आएं और गुस्से में रहते हुए आफिस का काम करें। और आफिस का काम बिगड़ें। जिससे फिर सर मेडम को आफिस से बाहर निकाल दें। जो कि इन दोनों को लग रहा था कि दीपक को सपोर्ट करने वाली मेडम को सर आफिस से निकाल देंगे। इन दोनों को लगता था कि मेडम इन दोनों कि चुगली सर से करतीं हैं कि ये दोनों दीपक को ऐसी ऐसी बातें बोलने रहते हैं। लेकिन वह मेडम सर को नहीं बोलतीं थीं। वह भगवान थें। जो मेरे लिए ऐसा माहोल तैयार करवा देते थे कि इन दोनों को मुंह कि खानी पड़े। जैसे कि ये दोनों मुझे आफिस से भगाने के लिए चाल चलतें थें और ये लोग मुझे झुटी बातें बोलते थे कि सर तो हमें अपने घर भी लेकर जाते थे। और अपना घर सम्हालने के लिए मुझे छोड़ जाते थे। तो तुझे अपने घर नहीं लेकर जाते हैं। सर तु सर का इतना काम करता है। सर का ध्यान रखता है। ऐसा बोलकर मेरे दिमाग में सर के प्रति नफ़रत उत्पन्न करवा रहें थे। जिससे कि में सोचु कि सर इन दोनों को अपने घर लेकर जातें हैं। खाना खिलाते हैं। और अच्छे से रखतें हैं। तो मुझे लेकर अपने घर क्युं लेकर नहीं जातें हैं। और में उन्हें कुछ भी बोल नहीं पाता था। लेकिन में दिमाग में सोचता था कि सर अगर मुझे भी अपने साथ घर लेकर जायेंगे तो फिर ये दोनों मुझे नहीं बोल पायेंगे। जब में ऐसा सोचता था। तो भगवान मेरे लिए ऐसा माहोल तैयार करवा देते थे कि सर को मुझे अपने घर बुलाना पड़ जाएं। जिससे इन दोनों कपटी लोगों कि बोलतीं बंद हो जाएं। लेकिन वै दोनों ऐसी बातें आफिस में मेडम के पीछे बेठकर बोलते थे। जिससे दोनों को लगता था कि मेडम ही दीपक का सपोर्ट करने के लिए और हमें दीपक के सामने निचा दिखाने के लिए सर को हमारी बातें बोलतीं है। लेकिन वह मेडम नहीं थीं। वह भगवान थें जो सर के मन को परिवर्तित करते थे। और ऐसा माहोल तैयार करवा देते थे। जिससे कि सर को मुझे अपने घर पर बुलाना पड़ जाएं और इन दोनों कि गलतफहमी मेरे ऊपर हावी ना हो। और सर और मेरे बीच का विश्वास टुटे नहीं। खैर अभी हम सब सर कि सिस्टर कि शादी में गये हुए थें। में अपने कमरें से छः सात किलोमीटर दूर शादी में साईकिल से गया था। और मेडम और ये दोनों अपनी अपनी बाईक से गये थें। तों मेने खाना खाया और खाना खाकर वापस अपने कमरे के लिए निकल पड़ा था। क्योंकि मुझे साइकिल चलाकर आना था। इसलिए में शादी से निकल आया। और थोड़ी देर बाद मेडम और उनके पति भी घर लोट गये। आखिर में ये दोनों बचें थें। जो कि आखिर में सर और सर के पिताजी से मिलकर आएं थें। फिर अगले दिन में और मेडम जल्दी आफिस में आ गए थे। और आफिस आकर सर कि सिस्टर कि शादी कि बातचित कर रहे थे। फिर ये दोनों भी थोड़ी देर बाद आफिस में आ गए।और आफिस में आकर ऐजेड व्यक्ति ने मुझे बोलते हुए कहा कि क्या दीपक तेरे साहब ने शादी में कैसा खाना बनवाया। तों मेडम ने कहा कि उसका साहब और आपका साहब नहीं है। तों ऐजेड व्यक्ति को मेडम का मेरे सपोर्ट में बोलना अखर गया कि मेडम कैसे बीच में बोल देती है। खैर उसने मेडम कि बातों को नजरंदाज करते हुए बोला कि हां दीपक के साहब ही तों क्योंकि दीपक सर के साथ रहता है सर के साथ घुमता फिरता है। सर के घर आता जाता है। दीपक उनकी सिस्टर के साथ जाता है। तो फिर सर दीपक के ही साहब हुए ना। क्या यार दीपक अपने साहब को बोलना था ना कि शादी में खाना तों अच्छा बनवाते इतना बकवास खाना बनावाया था कि खाना खाने का मुड़ ही खराब हो गया। हम दोनों तो बीना खाना खाएं वापस आएं और घर आकर खाना खाया। तों मेडम ने कहा कि क्युं इतना अच्छा खाना तों बनाया था। हम तों खाकर आएं और मेने कहा कि हां अच्छा तों था। में भी खाकर आया था। लेकिन दोनों मुझसे और मेडम से खाने कि बुराई करवाने पर तुले हुए थें कि दीपक और मेडम के मुंह से खाने कि बुराई करवाएंगे और फिर सर और सर के पिताजी को दीपक और मेडम के खिलाफ भड़का देंगे कि मेडम और दीपक तो शादी में बनें खानें कि बुराई कर रहे थे। जिससे मेडम और दीपक कि छवी सर और सर के पिताजी के सामने खराब हो जायेगी। लेकिन ऐजेड व्यक्ति हम दोनों को शादी के खाने के बारे में ग़लत बातें बोलते तो हम दोनों ही खाने को अच्छा बताते थें। लड़का कुछ बोल नहीं रहा था। क्योंकि वह मेडम के सामने एडल्ट हरकतें कर बेठा था। इसलिए मेडम उससे बातचीत नहीं करतीं थीं। और ना ही वह मेडम कि बातों मे हां ना बोल रहा था। वह बस हम तीनों कि सिर्फ बातें सुन रहा था। और अगर ऐजेड व्यक्ति बोलें तो उसकी बातों में हां में हां मिलाते जा रहा था। खैर फिर थोड़ी देर बाद मेडम ने हम तीनों को अपनी अपनी कंप्लेन बता दि। तों हम तीनों अपने अपने टुलकिट लेकर आफिस से बाहर चले गए। सर अभी अपनी सिस्टर कि शादी के कार्यों में उलझे हुए थें। इसलिए आफिस आएं नहीं। हम चार लोग ही आफिस को सम्भाल रहे थे। फिर दो तीन दिन बाद सर आफिस में आएं और बाहर कि कंप्लेन थीं तो उसे देखने चले गए। इधर मेरे दिमाग में ये दोनों बातें डालने लगें कि यार इतनी कम सेलरी में घर का मेंटेनेंस बिगड़ रहा है। अब तो कहीं और काम देखना पड़ेगा। ऐजेड व्यक्ति उस लड़के को बोलते हुए मुझे सुना रहे थे। अब उन दोनों कि बातें सुनकर मेरे दिमाग में भी यह बातें चलने लगी कि बातें तों ये दोनों सही बोल रहे हैं कि इतनी कम सेलरी में क्या ही होता है। पुरा महिना भी नहीं भरता है कि तनख्वाह खतम हो जाती है। तो अब मुझे भी कोई दुसरी नोकरी ढुंढना पड़ेगी। क्योंकि ये दोनों भी तों अपने लिए दुसरी नोकरी ढुंढने के लिए बोल रहे हैं। लेकिन वै दोनों दुसरी नोकरी ढुंढने के लिए इसलिए बोल रहे थे। ताकि में यह सोचु कि हां यार साहब मेरी तनख्वाह तो बड़ा नहीं रहें हैं। तो में भी दुसरी नोकरी ढुंढ लु। क्योंकि ये दोनों भी आफिस छोड़कर जाना चाहते हैं। और अब इन दोनों कि बातें सुनकर में अपने दिमाग में इस बात को लेकर घूम रहा था। और ऐसे ही में एक मोबाइल टाॅवर कंपनी के आफिस में पुछने के लिए चला गया। तो सिक्योरिटी गार्ड ने मुझे दुसरे दिन अपने दस्तावेज लेकर आफिस में आने के लिए बोल दिया। फिर में वापस अपने कमरे पर लोट आया। और दुसरे दिन मेने मेडम से पेट दर्द का बहाना बनाकर आफिस से छुट्टी ले ली और टाॅवर कंपनी के आफिस में अपने दस्तावेज लेकर पहुंच गया। और वह आफिस भी मेरे आफिस के एक दो बिल्डिंग छोड़कर ही था। तो मुझे थोड़ा सा डर भी लग रहा था कि मुझे सर या ये दोनों जलनखोर यहां बेठा हुआं देख ना ले। नहीं तो मैं सर के सामने झुटा साबित हो जाऊंगा और ये दोनों सही साबित हो जाएंगे। क्योंकि जिस दिन मेने आफिस से छुट्टी ली थी दुसरी नोकरी के लिए तब इन दोनों ने सर को कहा कि अरे उसका कोई पेट दर्द कर रहा है ना कुछ हो रहा है उसे वह तों कोई दुसरी नोकरी ढुंढ रहा होगा। और आपको बोल दिया हे कि मेरा पेट दर्द कर रहा है। अब सर ने इन दोनों कि बातें सुनीं तों सर को इन दोनों कि बातों पर यकीन नहीं आया और सर ने मुझे फोन लगाकर पुछा कि दीपक कहा हों तो मेने सर को बताया कि सर मेरे पेट में दर्द हो रहा है तो में डाक्टर को दिखाने अस्पताल आया था। तो सर ने कहा कि फिर डाक्टर ने चेकअप कर लिया है। तो मेने कहा कि हां चेकअप कर लिया है। तो सर ने कहा कि फिर क्या बोला डॉक्टर ने तो अब मेने तो दुसरी नोकरी के लिए बहाना बनाया था। और झुट बोला था। तो अब एक झुट को छुपाने के लिए मुझे दुसरा झुट भी बोलना पड़ा और सर से कहा कि डॉक्टर ने कहा कि हमें तुम्हारे पेट में अपेंडिक्स लगता है। तो तुम्हारा आपरेशन होगा। तों सर ने कहा कि अच्छा। तो मेने कहा कि हां तो फिर सर ने कहा कि फिर वापस कब आओगे। तो मेने कहा कि पता नहीं सर फिर सर ने कहा कि अच्छा ठिक है ध्यान रखना अपना। लेकिन फिर ये दोनों सर को बोल पड़े कि सर वो आपसे झुट बोल रहा है। वह कहीं नोकरी ढुंढ रहा होगा। और आपसे झुट बोल दिया कि मैं अस्पताल में आया हुं। तों अब सर कंफ्युज हों गये कि अब किसकी बातों पर यकीन किया जाए दीपक कि बातों पर या फिर इन दोनों कि बातों पर। खैर सर ने अभी किसी कि भी बातों पर भरोसा नहीं किया और अपना काम करते रहे। इधर में जिस आफिस में अपने दस्तावेज लेकर गया था। वहां मुझे नोकरी मिल गई थी। लेकिन वहां भी दो लड़के पहले से ही नोकरी कर रहे थे। उस आफिस में दो लड़के थें जो 12 घंटे कि ड्यूटी कर रहे थे। जिसमें से अगर एक भी छुट्टी पर उतर जाएं तो दुसरे को 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती थी। और अगर पहला आदमी गांव चला जाता था। तों तब तों दुसरे आदमी कि हालत खराब हो जाती थी। इसलिए फिर टाॅवर कंपनी ने एक और लड़का रखने का फेसला लिया और उसी दिन में भी नोकरी कि तलाश में उस आफिस में पहुंच गया था। तों उन्होंने मुझे नोकरी पर रख लिया। लेकिन अब जब उन दोनों लड़कों को पता चला कि आफिस वालें मुझे इसी आफिस में रखेंगे तो। दोनों को अपना नुकसान नजर आने लगा था। क्योंकि 12 घंटे कि ड्यूटी करके दोनों को अच्छी खासी तनख्वाह मिल जाया करतीं थीं। साथ ही टाॅवर पर कभी कभार समस्या आती थी। तों दोनों को आफिस में ज्यादा कोई काम करना नहीं पड़ता था। दोनों को आराम था। इसलिए दोनों ही नोकरी छोड़ना नहीं चाहते थे। और ना ही किसी तीसरें व्यक्ति को आफिस में काम करने देते थे। दोनों ही नये लड़के को काम का समय का डर बताकर लड़के को डरा धमका देते थे। जिससे लड़का डर जाता और काम छोड़कर भाग जाता था। लेकिन अभी इस आफिस में में आया था। और आफिस में सभी दरवाजों पर आटोमेटिक लाॅक लगें हुए थें जो एक कार्ड के स्वाइप करने पर खुलते थें। खैर मुझे सिक्योरिटी गार्ड ने उन दोनों लड़कों के साथ मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में बिठा दिया। कि अभी यहां डिपार्टमेंट में बेठो फिर तुम्हें हम बताते हैं। टाॅवर आफिस में मेरा पहला दिन था। इसलिए आज सिर्फ उन्होंने मुझे देखने के लिए कि में कितना उत्सुक हुं इस आफिस में काम करने के लिए। साथ ही में कितनी देर तक बेठ सकता हूं। और जब में मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में दो से तीन घंटों तक बेठा रहा तब आफिस वालों ने दोनों लड़कों में से एक लड़के को मेरे पास भेजा और कहा कि चलों मेरे साथ तों में उस लड़के के साथ उस जगह पर गया जहां पर फाल्टी एरिया था। आफिस कि लाइन में कहीं पर फाल्ट हुआं था। तों वह लड़का मुझे भी अपने साथ लेकर गया दिखाने के लिए जब ऊपर जाकर मेने तारों का जाल देखा तो में जाल देखकर सन्न रह गया। कि इतने तारों में उस तार के बारे में केसे पता चलता होगा कि कि इसमें फाल्ट हैं। तों उस लड़के ने मुझे बेवकूफ बनाते हुए डराते हुए कहा कि इस आफिस में यहीं काम तो तुम्हें करना है। तों मेने उस लड़के से कहा कि हां ठिक है। धीरे-धीरे सीख जाऊंगा। आप लोगों को भी तों सिखाया होगा पहले तो लड़के ने कहा कि ठिक है कर लोगे तो बहुत अच्छी बात है। फिर जब उस लड़के ने फाल्ट को ठिक कर दिया तब वह लड़का मुझे वापस मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में वापस बिठाकर बाहर चला गया। फिर थोड़ी देर बाद वह लड़का फिर से आफिस में में आया। और मेरे पास बेठ गया। और मुझसे मेरी जानकारी पुछने लगा। जैसे कि मेने कहा तक पढ़ाई लिखाई कि है। मेने पहले कहीं काम किया है या नहीं अगर किया है तो वहां मुझे कितनी तनख्वाह मिलती थी। और वहां से मेने काम क्युं छोड़ दिया और यहां मुझे कितनी तनख्वाह दें रहें हैं। में किस जिले के किस गांव का रहने वाला हूं। मेरे परिवार में कोन -कोन है। घर में कितने लोग कमाने वाले हैं। तो मेने उस लड़के को सबकुछ सच सच बता दिया। लेकिन अपनी पढ़ाई लिखाई 12 वीं कक्षा ही बताई। मेने सोचा कि अगर मेंने इसे स्नातक के बारे में बता दिया तों यह मुझे कभी भी काम के बारे में कुछ भी नहीं बतायेगा सिखाएगा। क्योंकि इसको डर रहेगा कि उसने अगर मुझे जल्दी काम सीखा दिया तो आफिस वाले मेरी स्नातक देखकर मुझे दोनों लड़कों का सुपरवाइजर ना बना दें। और लोग अपने सीखाएं हुए छात्र को बड़ा आदमी बनते हुए देखना नहीं चाहते हैं। इसलिए मेने उसे केवल 12 वीं कक्षा ही बताई। फिर वह लड़का बोला कि यहां 12 घंटे कि ड्यूटी है। और कभी कभी तो साथ वाला काम से बाहर चला जाता है तो उसकी ड्यूटी भी हमें ही करनी पड़ती है। तो मेने कहा कि ठिक है कर लुंगा। आप भी तो करतें हैं ना। तो उस लड़के ने मुझे कहा कि मुझे ड्यूटी करते -करते आदत हो गई है। मुझे अब ज्यादा फरक नहीं पड़ता है। तों मेने उस लड़के से कहा कि मुझे भी धीरे-धीरे आदत लग जायेगी। तों उस लड़के ने देखा कि में उसके बताए हुई झुटी बातों से डर नहीं रहा हुं। और उसकी हा में हा मिलाएं जा रहा हूं तो वह लड़का फिर समझ गया कि मुझे उसकी झुटी बातों से कोई फरक नहीं पड़ रहा है। तो उस लड़के ने हार मान ली और मुझे आफिस में बेठने का बोलकर आफिस से बाहर निकल गया। साथ ही आफिस से बाहर निकलने से पहले मुझे बोला कि इस दरवाजे के पुश बटन को मत खिंचना नहीं तो अलार्म बजेगा। क्योंकि ये दरवाजे कार्ड से खुलते हैं। तों मेने उस लड़के को हां बोल दिया और फिर से कुर्सी पर बैठ गया। लेकिन अब बेठे -बेठे में बोर हो गया। तो आफिस में कम्प्यूटर रखा था। तों में कम्प्यूटर पर फेसबुक ओपन करने लगा। लेकिन मुझे ध्यान आया कि आफिस में केमरा लगा हुआ है। तो मेने झट्ट से कम्प्यूटर बंद कर दिया। और चुपचाप बेठ गया। और फिर बेठा रहा। आफिस के सर लोग मुझे केमरे से मेरी हरकतों को देख रहें थे। कि मैं कितनी देर तक बीना मोबाइल फोन और कम्प्यूटर के रह सकता हूं। जब मुझे ध्यान आया कि आफिस में केमरा लगा हुआ है। तो फिर में शांत होकर बेठ गया और आफिस में रखीं नोट बुक उठाकर देखनें लगा। अंदर से मेरी हर हरकत पर नजर रखी जा रही थी। फिर मेने नोट बुक रख दिया और आफिस में रखीं काम कि चीजों को देखने लगा। ताकि अंदर आफिस में बेठे अधिकारी को मेरा काम के प्रति जुनून दिखाई दे। फिर में केमरे से बचते हुए एक बार दरवाजे के पास चला गया। और पुश बटन को दबा दिया। और जैसे ही पुश बटन को दबाया तो कमरे में अलार्म बज उठा। तों में डर के मारे वापस चैयर पर बेठ गया। अब जैसे ही अलार्म बजा तो आफिस में जितने भी लोग थें। वै सभी लोग हरकत में आ गए। सबको लगा कि आफिस में कहीं पर फाल्ट हुआं है। और आग लग गई है। तो सभी लोग फाल्ट को ढुंढने लगें कि फाल्ट हुआं कहा है। जब सब जगह देख लिया और कहीं पर भी नहीं मिला तो किसी को ध्यान आया कि आफिस में आज नया लड़का आया है। हो सकता है कि उसने दरवाजे को खींच दिया हों। तो सब लोग में जिस कमरे में बेठा था। उस तरफ आएं। और कमरे के बाहर एक डिस्प्ले लगा हुआ था। साथ ही अलार्म साइरन भी लगा हुआ था। जब सब लोगों ने उसे देखा तो सब समझ गये कि नये लड़के ने ही कुछ किया है। तब एक लड़के ने कार्ड स्वाइप करके दरवाजे को खोला तो अलार्म बजना बंद हो गया। फिर उस लड़के ने मुझे कमरे से बाहर आने के लिए बोला और कहा कि दरवाजा खींचा था। तों मेने झुट बोल दिया कि मेने दरवाजा नहीं खींचा। तों सिक्योरिटी गार्ड ने मुझसे कहा कि तुने खींचा होगा। तुझे पता है अभी तेरे चक्कर में एक हजार लीटर का सिलेंडर ख़ाली हो जाता। जिसकी किमत दो लाख रुपए है। देख भाई मेने तुझे अपना छोटा भाई समझ कर तेरी स्थिति देखकर तुझे काम पर लगाया था। कि तेरा फायदा हो जायेगा। लेकिन तु ऐसी हरकतें करेगा। तो आफिस वाले मुझे भी नोकरी से निकाल देंगे। तेरी वजह से मेरी भी नोकरी चलीं जायेगी। अगर तुझे यहां काम करना है तो सही से काम कर लें भाई नहीं तो तेरी वजह से मुझे भी नोकरी से निकाल देंगे। तों मेने सिक्योरिटी गार्ड को उस समय हां बोल दिया। कि मैं अच्छे से ही काम करुंगा। और कभी भी शिकायत का मौका नहीं दुंगा। फिर सब लोग मेरे पास से वापस आफिस में चलें गये। लेकिन इस बार मुझे आफिस के बाहर बिठाया। कि अब यहां बेठ जाओ। तो में आफिस के बाहर बेठ गया। फिर जब सब लोग अंदर चलें गये तो अंदर जाकर सबने बोला कि अलार्म नये लड़के कि वजह से बजा था। तो अधिकारी ने उन्हें बताया कि उसके लिए अब हमें एक कार्ड बनाना पड़ेगा। नहीं तो यह कंपनी में हर जगह अलार्म ही बजाते रहेगा। सिक्योरिटी गार्ड से अधिकारी ने कहा कि उस लड़के के मोबाइल नंबर दों मुझे। फिर सिक्योरिटी गार्ड ने अधिकारी को मेरे मोबाइल नंबर दिए। और हेड आफिस में बातचित कि और एच आर डिपार्टमेंट को मेरे नंबर दे दिए और अधिकारी ने एच आर डिपार्टमेंट में अलार्म वाली बात बता दी। इसके थोड़ी देर बाद मुझे हेड आफिस से एक फोन आया और मुझसे कहा कि दीपक तुम कल हेड आफिस आ जाना तों में तुम्हारा कार्ड बना दुंगा। तो मैंने अधिकारी को हां कह दिया। फिर शाम को जब मेरी छुट्टी हुई और मैं अपने कमरे पर चला गया तब कमरे पर जाकर में सोचने लगा। कि आफिस में आज जो मेरे हाथों हुआं अगर फिर कभी मेरे हाथों ऐसा काम हो जायेगा। तों मेरी इस ग़लती कि वजह से बेचारे सिक्योरिटी गार्ड कि नोकरी चलीं जायेगी। इससे अच्छा है कि में वहां काम पर ही नहीं जाता हुं। और वापस अपनी पहली ही नोकरी मे लोट जाता हुं। रातभर सोचने के बाद अगली सुबह में अपने पुराने आफिस में ही चला गया। तो मेडम ने सर को फोन करके बताया कि सर दीपक वापस आ गया है। तों मेडम तो खुश थीं ही सर भी खुश हो गए। कि मैं वापस लोट आया। लेकिन ये दोनों दुखी हो गये थें। क्योंकि जब में आफिस नहीं आ रहा था तो दोनों ने सर से कहा कि में कहीं नोकरी ढुंढने गया हुं। पेट दर्द का तो उसका बहाना है। तों सर ने एक पल को दोनों कि बातों पर भरोसा कर लिया था। लेकिन आज जब में आफिस में वापस आ गया था। तों सर को खुद पर गिल्ट हुआं कि उन्होंने इन दोनों कि बातों पर यकीन कर लिया था। लेकिन मेने आफिस में वापस जाकर अपनी सच्चाई और ईमानदारी फिर से साबित कर दिया। और ये दोनों फिर से बेईमान साबित हो गये। लेकिन फिर भी अब मेरा इंदौर में मन नहीं लग रहा था। और इंदौर से बाहर निकलने का मन कर रहा था। क्योंकि इंदौर में में अकेला था। तो मेने मन में सोचा कि में सुरत अपनी दीदी-जीजा के पास चला जाऊं। जिससे कि अपनो के बीच रहकर मेरा मन लगा रहेगा। क्योंकि इंदौर में जहां रहता था। वहां पर आस-पास के लोग मुझे आते जाते घुरते रहते थे। आफिस में सफाई वालीं ठेकेदार भी मुझे आफिस के बाहर आते जाते समय घुरती रहतीं थीं। आफिस में ये दोनों भी मुझे और मेडम को परेशान करने के लिए आफिस से बाहर निकालने के लिए नई-नई चालाकियां सोचते रहते थे। और फिर मेरी ही वजह से ये दोनों मेडम और सर के प्रति नफ़रत करने लगें थें। तों इसलिए फिर मेने सोचा कि सबको मुझसे ही समस्या। और मेरी वजह से बहुतों को और भी समस्या हो जायेगी। और में नहीं चाहता कि मेरी वजह से किसी और को कोई तकलीफ़ हो। इसलिए में यहां से कहीं और चला जाता हुं। यहीं बातें सोचकर फिर मेने बेग में अपने कपड़े डालें और इंदौर से सुरत निकल गया। कभी ना वापस आने के लिए। क्योंकि इंदौर शहर ने मुझे बहुत तकलीफ़ दी थीं। इसलिए में फिर इंदौर शहर से बाहर निकल गया। और कसम खाई कि दोबारा कभी इंदौर नहीं आऊंगा। ऐसे आऊंगा लेकिन काम करने के लिए रहने के लिए कभी नहीं आऊंगा। इधर आफिस वालों के नंबर मेने ब्मेंलेकलिस्ट में डाल दिए ताकि मुझे कोई भी फोन नहीं करें। इंदौर में मेरी सबसे ज्यादा फिकर करने वाले सर और मैडम ही थें। उसके अलावा और कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो मेरे बारे में सोचता कि में कहां हुं। कैसा हुं। क्या कर रहा हूं। आफिस क्युं नहीं आया। और इंदौर छोड़ने के बाद सर ने मुझे फोन किया भी होगा लेकिन मेने उनके नंबर ब्लेक लिस्ट में डाल दिए थें। मेरी एक खासियत थीं। कि में जहां कहीं भी काम करने जाता था। तों अपनी एक अलग ही पहचान छोड़ देता था। जिससे कि वै लोग मुझे कभी भी नहीं भुलते थें। क्योंकि मैं काम ही ऐसा करता था। कि लोग मुझे भुला ही नहीं पाते थें।