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Twinflam and soulmate's epi 18

जब आफिस के दोनों लोगों ने देखा कि सफाई वाले कि ठेकेदार महिला मुझे डरा धमका रहीं हैं तों मेडम मेरे सपोर्ट में बोल रहीं हैं तों दोनों समझ गये कि अब हम दीपक के खिलाफ ना तो खुद कुछ कर सकते हैं। और ना ही किसी और से कुछ करवा सकते हैं। क्योंकि दीपक के सपोर्ट में पुरे आफिस वाले खड़े हो गए हैं। तों अब हमें दीपक को छोड़कर आफिस वालों को परेशान करना चाहिए। तों अब दोनों ने एक और चाल चली लेकिन यह चाल मुझे परेशान करने के लिए नहीं चलीं थीं यह चाल मेडम को परेशान करने के लिए चलीं और चाल यह थी कि मेडम के सामने एडल्ट हरकतें करके मेडम को परेशान करना और मेडम के सामने एडल्ट हरकतें करने के लिए एजेड व्यक्ति ने मेडम कि हम उम्र के लड़के से करने के लिए कहा कि तुम मेडम के सामने एडल्ट हरकतें करना। जिससे मेडम परेशान हो जायेगी। और आफिस छोड़कर भाग जायेंगी। क्योंकि दीपक को ये मेडम ही सपोर्ट करतीं हैं। और इस मेडम ने ही हमारी सारी पोल पट्टी हमारी असलियत सर को बताई है। जब दीपक आफिस में नहीं आया था तो हमारे आगे पीछे नाचतीं थीं। लेकिन अब दीपक आ गया है तो। हम दोनों से कोई बात तक नहीं करतीं हैं। हमारी कोई वेल्यू ही नहीं करतीं हैं। आज मेडम आफिस में जो कुछ भी हें वह हम दोनों कि वजह से है। लेकिन ऊपर जानें के बाद घमंड में आ गई है। अपनी औकात भुल गई है। तों इसे इसकी औकात हमें दिखानी पड़ेगी। कल के आएं हुए लड़के के पीछे इतना अकड़ और घमंड दिखा रहीं हैं। जैसे यह लड़का अब आफिस में टीका ही रहेगा। एजेड व्यक्ति ने मेडम कि हम उम्र के लड़के को भड़काते हुए ऐसा बोला तो लड़का भड़क गया। उसने भी यह नहीं सोचा कि ऐजेड व्यक्ति उसकी नोकरी बचानें के चक्कर में उसे बली का बकरा बना रहा है। और लड़के ने भी तैस में आकर मेडम के सामने एडल्ट हरकतें करने कि हामी भर दी। और दुसरे दिन जब हम चारों आफिस में आएं तो मेडम ने हम तीनों को अपनी अपनी कंप्लेन बता दि। तों मेने अपना टुलकिट लिया और आफिस से बाहर निकल गया। अब आफिस में मेडम और ये दोनों रह गये फिर ऐजेड व्यक्ति ने भी अपने टुलकिट लिएं और वै भी निकल गये। फिर आफिस में मेडम और वह लड़का रह गए। तब लड़के ने मेडम को आफिस में अकेला पाकर वह मेडम के सामने अपने अंडराम्स को बार बार खुजाने लगा। तो मेडम ने देखकर नजर अंदाज कर दिया कि साधारणतः ऐसी समस्याएं हो जाती है। लेकिन वह लड़का कंप्लेन देखने जानें के बजाय आफिस में ही टालमटोल करता रहा और मेडम के सामने ऐसी हरकतें करता रहा। उस लड़के को लगा कि मेडम उसे ऐसी हरकतें करते हुए देखतीं रहेंगी और कुछ नहीं बोलेंगी। और मेडम सच में ही उस लड़के को कुछ नहीं बोलीं। और उसकी हरकतों को अनदेखा करके अपने काम करतीं रहीं। क्योंकि मेडम आफिस में अकेली भी थीं। इसलिए मेडम ने उस लड़के कि हरकतों को नजरंदाज करतीं रहीं। कि आफिस में जब कोई आएगा तब इस लड़के को उसके सामने बोलुगी। फिर जब लड़के ने देखा कि मेडम कुछ नहीं बोल रही है। और उसकी हरकतों को नजरंदाज कर रही है तो वह लड़का फिर कंप्लेन करने के लिए आफिस से बाहर निकल गया। फिर में आफिस में वापस आ गया। उस दिन सर बाहर कंप्लेन करने के लिए गये थें। आफिस आने वाले नहीं थे। तों मेडम ने सोचा कि अगर दीपक को में कंप्लेन देखने के लिए बाहर भेज दुगीं तों यह लड़का आफिस में फिर से वही हरकतें करता रहेगा। लेकिन अगर दीपक आफिस में रहेगा तो यह दीपक को देखकर मेरे सामने एडल्ट हरकतें नहीं करेगा। और दीपक से डरेगा। तो मेडम ने फिर मुझे आफिस में ही रहने के लिए बोला कि दीपक आज तुम आफिस में ही रहना और आफिस में जो फोन आएं हैं। उनको रिपेयर कर देना। तों मेने हां कह दिया और आफिस में बेठकर फोन रिपेयर करने लगा। लेकिन वह लड़का आफिस में मेरे होते हुए भी मेडम के सामने वेसी ही एडल्ट हरकतें कर रहा था। ऐसी हरकतें करते हुए मेने भी उस लड़के को देख लिया था। लेकिन मेडम कि तरह मेंने भी पहली बार देखकर उसकी इन हरकतों को नजरंदाज कर दिया कि खुजली आ रही होगी। इसलिए तों मेने उसकी इस हरकत को नजरंदाज कर दिया। और अपना काम करता रहा। और फिर थोड़ी देर बाद मेडम ने उस लड़के को दुसरी दो तीन कंप्लेन बता दि तो वह थोड़ी देर बाद आफिस से बाहर चला गया और में फिर शाम तक आफिस में ही रहा। और शाम को अपने घर के लिए निकल गया। उस लड़के ने ऐसी हरकतें मेडम के सामने पहले कभी कि नहीं थीं। लेकिन मेडम का मेरे सपोर्ट में बोलना कि वजह दोनों मेडम के साथ इस तरह कि हरकतें करने पर उतारू हो गए दोनों इतने निचे तक गिर गये कि दोनों को कोई अंदाजा ही नहीं था कि वै दोनों जलन के मारे और मुझे आफिस से भगाने के चक्कर में किस हद तक गिर गये थें। और मेडम के साथ कितनी गिरी हुई हरकतें करने पर उतारू हो गए थे। खैर उस शाम को में और मेडम आफिस से अपने अपने कमरे पर चलें गये। लेकिन फिर दुसरे दिन जब आफिस में हम चारों आएं तो मेडम ने दोनों को से अपनी अपनी कंप्लेन बता दि ऐजेड व्यक्ति तो अपनी कंप्लेन देखने के लिए चलें गये। लेकिन वह लड़का आफिस में टालमटोल करते हुए मेडम के सामने फिर से वहीं हरकतें करने लगा। तों मेडम इस बार चुप नहीं रहीं और उस लड़के का नाम लेकर बोल ही दिया कि अगर तुम्हारे अंडराम्स में खुजली हो रही है तो उसका इलाज़ करवाओ तों लड़का सफाई देने लगा कि मेडम आप मुझे ग़लत समझ रहीं हैं। तों मेडम ने कहा कि में तुम्हारी नियत और नज़र और हरकतों को बहुत अच्छे से समझ रहीं हुं। और अगर तुम्हें ऐसा ही लग रहा है कि में तुम्हें ग़लत समझ रहीं हुं तो फिर तुम तुम्हें जब तुम मेरे सामने खड़े होकर नहीं खुजाते उधर बाथरूम में जाकर ऐसा करते या फिर बाहर जाकर खुजाते नहीं तो अपना इलाज करवातें। यहां मेरे सामने खड़े होकर नहीं खुजाते बेवकूफ समझ रखा है मुझे। इस गलतफहमी में मत रहना कि में तुम्हारी हरकतों को सहन करतीं रहुंगी। अभी भी कह रहीं हुं कि मेरे सामने ढंग से ही रहा करों। नहीं तो नोकरी जाएं भाड़ में पहले में तुम्हारा ही खेल तमाम कर देती हुं। फिर में भी बोल पड़ा कि अगर अंडराम्स में खुजली हो रही है तो डॉक्टर को दिखा आओ यहां मेडम के सामने इस तरह कि हरकतें क्युं कर रहे हो। तों मुझे बोलता है कि मेडम मुझे ग़लत समझ रहीं हैं। तों मेडम को गुस्सा आया और मेडम ने कहा कि चुपचाप अब आफिस से बाहर निकल जा नहीं तो अब तेरा वो हश्र करुंगी कि कहीं किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेगा।तब वह लड़का आफिस से बाहर निकल गया। तों मेडम गुस्से में थीं। और गुस्से में बोलें जा रही थी। तो मेने मेडम से कहा कि मेडम आप थोड़ा शांत हो जाइए। ज्यादा हाइपर मत होइए नहीं तो आपके काम बिगड़ जायेंगे। वह आपको गुस्सा दिला रहा था। ताकि आपके आफिस के काम बिगड़ें और फिर सर आपको आफिस से बाहर निकाल दें। वह आपको यहां से भगाना चाहता है। इसलिए ऐसी हरकतें करके आपको गुस्सा दिला रहा था। ताकि आप गुस्से में आ जाओ और फिर गुस्से में काम करोगे तो आपके काम बिगड़ेंगे। और जब जब काम बिगड़ेंगे तों सर कि नज़र में आपकी इज्जत खराब हो। और आपको आफिस से बाहर निकाल दिया जाएं। इसलिए थोड़ा शांत हो जाइए। और शांत होकर काम करों। लेकिन मेडम शांत होने का नाम नहीं ले रही थी। तों मेने मेडम से कहा कि अच्छा आप ये बताएं कि अगर आप किसी को उसकी हरकतों के बारे में बताओगे तो आपकी बातों पर कोई भी यकिन करेगा। क्योंकि उसकी हरकतों को सिर्फ आप ने ही देखा है। तो वह आप पर भी इल्ज़ाम लगा देगा। कि मेडम मेरे ऊपर झुटा इल्ज़ाम लगा रहीं हैं। फिर आप इस बात को साबित कैसे करोगी कि उसने आपके सामने ग़लत हरकतें कि है। इसलिए जो हुआं उसे भुला दिजिए और शांति से अपना काम किजिए। ताकि आपका काम खराब ना हो। फिर उस लड़के के आफिस से बाहर निकलने के बाद सर आफिस में आएं। और आफिस में बेठकर सिस्टम पर काम करतें रहें। फिर थोड़ी देर बाद ये दोनों भी आफिस में वापस आ गए थे। और मेरे पास आकर बैठ गए। और मुझसे बातचीत करने लगे कि तेरे साहब आज आफिस में ही हैं। आज कहीं बाहर नहीं गये तो मेने कहा कि मुझे नहीं पता तों ऐजेड व्यक्ति ने कहा कि क्युं तुझे बताते नहीं है। हमें तो अपने घर के बारे में आफिस के बारे में सबकुछ बताते थें कि आज आफिस में क्युं बेठे है। घर पर क्या हो रहा है। और हमें तों सर अपने घर भी लेकर जातें थें। कभी कभी सर और सर कि फेमिली अपने गांव जातें थें तो मुझे अपने घर कि चाबी दे जातें थें। घर सम्भालने के लिए। और में भी सर के घर पर बहुत मज़े से रहता था। तुझे सर अपने घर अभी तक नहीं लेकर गये है ना तो एजेड व्यक्ति बोलता है कि अरे एक बार गया तो था साइकिल लेने के लिए। तों लड़का बोलता है। हां यार दीपक गया था सर के घर पर। फिर ऐजेड व्यक्ति बोलता है कि पर वो तों ये सिर्फ साईकिल लेने के लिए गया था। तों घर के बाहर से इसे साईकिल देकर रवाना कर दिया। आफिस में बेठी मेडम इन दोनों कि बातचीत सुन रहीं थीं। दोनों को यह बात पुरी तरह से कन्फर्म करना था कि सर तक हम दोनों कि बातें पहुंचाता कोन है। तों दोनों मुझे मेडम के पीछे बेठकर बोल रहे थे। सारी बातें बोलने के बाद दोनों आफिस से बाहर कंप्लेन देखने के लिए चलें गये। उसी शाम को सर ने मुझे फोन करके बोला कि दीपक तुम कल सुबह आफिस मत जाना और हमारे घर पर आ जाना। तों मेने हां कह दिया। क्योंकि सर कि सिस्टर को एक कंपनी कि पुरी प्रोसेसिंग प्रक्रिया कि फाइल बनानीं थीं। सर कि सिस्टर ने कोनसा कोर्स किया हुआ था। मुझे ठिक से याद नहीं है। लेकिन वै नई ओपनिंग होने वाली फुड कंपनी कि प्रोसेसिंग प्रक्रिया कि फाइल बनातीं थीं। जिसके लिए उन्हें एक कंपनी में कंपनी वालों के साथ जाना था। गाड़ी में कंपनी वालों के साथ अकेली रहती इसलिए सर ने उनकी सिस्टर के साथ मुझे भेजने के लिए अपने पिताजी से बोला। क्योंकि सर और सर के पिताजी मेरी ईमानदारी से प्रभावित थें। इसलिए उन्होंने मुझे अपनी सिस्टर के साथ जाने के लिए बोला। फिर अगली सुबह में आफिस ना जाकर सर के घर चला गया। जब सर के घर गया तो सर कि मम्मी ने मुझे सोफे पर बेठने के लिए बोला तो में डरते डरते सोफे पर बेठ गया। फिर थोड़ी देर बाद सर कि सिस्टर बाहर आई और मुझे डरा-सहमा देखकर बोली कि आराम से बेठो इतना डरे हुए क्युं हों। आराम से बेठो फिर दीदी उठकर अंदर चली गई और मेरे लिए चाय और पराठे लें आई। और कहा कि लो का लो क्योंकि हमें बहुत दुर जाना है। तो भुख लग आयेगी। इसलिए अभी खा लो। तों मेने शर्माते हुए चाय और नाश्ता कर लिया। फिर दीदी के पापा आए और मुझसे कहा कि दीपक तुम और दीदी जब लोकेशन पर पहुंच जाओ तो दीदी को अपना काम करने देना और तुम आस-पास कि कम्पनियों में पता करना कि उन्हें फोटोकॉपी मशीन कि जरुरत पड़ती है क्या। ये अपने आफिस के कार्ड अपने साथ रख लो। कंपनी वालों को दें आना तों दीदी ने अपने पापा से कहा कि वह मुझे छोड़कर कहीं नहीं जाएगा। ओ मेरे साथ ही रहेगा। नहीं तो आप भी मेरे साथ चलिए दीपक मेरे साथ रहेगा और आप कंपनियों में फोटोकॉपी मशीन का प्रचार करते रहना। इतना कहकर दीदी अंदर तैयार होने के लिए चलीं गईं। फिर थोड़ी देर बाद सर के घर एक कार आई। फिर दीदी तैयार होकर बाहर आई और मुझे साथ चलने के लिए बोला तो में दीदी के साथ कार में बेठ गया। और कार फिर घर से रवाना हो गई। फिर दो तीन घंटे के बाद हम कंपनी लोकेशन पर पहुंच गए थे। और लोकेशन पर पहुंचने के बाद कंपनी मालिक दीदी को कंपनी के अंदर कोनसी मशीन कहां लगेगी। कहां पर क्या रखा जायेगा। सारी प्रक्रिया बताते जा रहें थे। और दीदी अपनी डायरी में नोट करते जा रहीं थीं। फिर एक ढेड़ घंटे बाद जब कंपनी वालों ने दीदी को फ्रि कर दिया तो मेने दीदी से कहा कि दीदी आपके पापा ने कहा था कि मैं आपको यहां छोड़कर दुसरी कंपनियों में पुछने जाऊं कि उन्हें फोटोकॉपी मशीन कि जरुरत पड़ती है क्या। मेने दीदी को कहा कि दुसरी कंपनियां इस कंपनी से बहुत दूर दूर है। अगर में पेदल चलकर जाऊंगा तो बहुत समय लग जायेगा। तो आप ही बताइए कि क्या मुझे जाना चाहिए या फिर नहीं। तों दीदी ने मुझे हक से डांटते हुए कहा कि तुम यहीं रहो मेरे पापा पागल है। तुम मेरे साथ ही रहो और तुम्हें कहीं भी जाने कि जरुरत नहीं है। और अब हम घर वापस जा रहें हैं। तों चलों हम चलतें है। में अपने पापा से बात कर लुंगी। चलों वापस घर चलों फिर दीदी और मैं कार में वापस बेठ गये और कार वाले ने हमें सात आठ बजे सर के घर जाकर उतार दिया। फिर घर जाकर दीदी ने अपनी मम्मी से पहले ही बोल दिया था कि दीपक के लिए खाना बना लेना। तो हम दोनों जैसे ही घर पहुंचे सर कि मम्मी ने मुझे खाना खाने बेठा दिया और खाना खिला दिया। फिर खाना खिलाने के बाद मुझे सर ने कहा कि ठिक है दीपक अब तुम घर चलें जाओ। आफिस में जो लड़का था। शुरुआत में सर उसे भी किसी काम से घर पर बुलाया था। और उसे भी खाना खिलाया था। लेकिन घर सम्हालने वाली बात झुटी थीं। लेकिन जब सर ने मुझे अपने घर बुलाया तों मेरे हाथ में अपने घर कि इज्जत को सम्हालने कि जिम्मेदारी दी। मतलब उनकी बेटी का ध्यान रखने कि और उसे सुरक्षित घर वापस लाने कि जिम्मेदारी दी थीं। जिसे मेने बखुबी निभाया। जिससे मेने सर सर के पिताजी माताजी और बहन कि नजरों में अच्छी छवि बना लिया। सर कि फेमिली मुझ पर भरोसा करने लग गए। खैर में अपने कमरे पर लोट आया था। में जहां रहता था। वहां एक लड़की रहती थी। उस लड़की से मुझे प्यार हो गया था। लेकिन वह लड़की मेरे मकान मालिक के बड़े भाई कि लड़की थीं। जो कि मेरे कमरे के सामने रहतीं थीं। तो हम एक-दूसरे से मिल लिया करते थे। लेकिन मेने एक दिन वह कमरा ख़ाली करके ऊपर का कमरा ले लिया था। जिसकी वजह से हम दोनों एक-दूसरे से मिल नहीं पा रहे थे। तों में आफिस के काम से तों खुश था। लेकिन कमरे पर आकर दुःखी उदास रहता था। क्योंकि हम दोनों मिल नहीं पा रहे थे। तो एक रविवार के दिन उस लड़की ने पागल हरकत कर दी। वह लड़की मुझसे मिलने के लिए मेरे मकान मालिक कि छोटी लड़की से मिलने घर आई और उसे हम दोनों के बारे में सबकुछ बता दिया। और मुझसे मिलने कि चाहत में उसे बताकर ऊपर आ गई। और मिलकर वापस चलीं गईं। लेकिन उसने हम दोनों के बारे में अपने अंकल कि लड़की को बता दिया था। तो अंकल कि लड़की ने अपने भाई को बता दिया। जब मकान मालिक के लड़के ने यह बात सुनी तो पहले तो उसे बहुत गुस्सा आया। कि वह मुझे मारे लेकिन फिर उसने सोचा कि अगर ऐसा कुछ करेंगे तो उनके परिवार कि भी बदनामी होगी। इससे अच्छा है कि वै मुझे प्यार से समझा बुझाकर लड़की से दुर रहने कि हिदायत दे दें। क्योंकि वह लड़की राजपूत मालवीय समाज कि थीं। और में दुसरी समाज का था। साथ ही उस लड़की कि सगाई भी कर दीं थीं। उसके बाद भी वह मेरे साथ रिश्ते में आ गई थीं। मुझे उस लड़की कि सगाई के बारे में कुछ भी पता नहीं था। इधर में जब सर के घर से वापस अपने कमरे पर आया तो उस दिन मकान मालिक के घर पर कोई भी नहीं था। उस दिन मकान मालिक का लड़का और दामाद शराब कि बोतल लेकर छत पर आएं। मेरा कमरा छत पर ही था। जब दोनों साला और जीजा छत पर बोतल लेकर आएं तो दोनों ने मुझे भी शराब पीने के लिए कहा तो मैंने मना कर दिया लेकिन फिर भी दोनों ने मुझे अपने पास बिठाया और यहां वहां कि बातें करते करते अपने बड़े पापा कि लड़की कि बातें निकाल दीं। कि उनके बड़े पापा कि लड़की ऐसी हे वैसी है। पहले यहां एक लड़का रहने के लिए आया था तो उनके बड़े पापा कि लड़की ने उस लड़के को फसा लिया था। लेकिन हमे इन दोनों के बारे में पता चला तो हमने उस लड़के को समझाया कि लड़की के पहले से ही बहुत सारे आशिक है। तु क्युं परेशान हो रहा है। छोड़ दे उसे नहीं तो पुरा बर्बाद करके छोड़ेगी। तब जाकर उस लड़के को समझ पड़ीं और फिर वह लड़का यहां से कहीं दुसरी जगह रहने चला गया। फिर शराब का दुसरा पेग मारते हुए कहने लगा कि हमने तो तुम्हारे बारे में भी सुना है कि तुम भी उसके जाल में फंसे हुए हों। और जैसे ही मेने मेरी बात उसके मुंह से सुनी तो मेरे भीतर हवा ही भर गई। फिर मकान मालिक के लड़के ने कहा कि देखो भाई हम तो तुम्हारे भले के लिए बोल रहे हैं कि लड़की सही नहीं है। तुम्हारी जिंदगी खराब कर देंगी। इससे अच्छा है कि तुम उससे दुर रहो। तुम्हारे लिए अच्छा है। में मकान मालिक के लड़के कि बात सुनकर सन्न रह गया साथ ही डर भी गया। क्योंकि वह लड़की मकान मालिक के बड़े भाई कि लड़की थीं। और सबसे बड़ी बात उसके अंकल के लड़के को यह बात पता चल गयी थी। और सबसे बड़ी बात यह थी कि उसकी सगाई हो चुकी थी। और छः महीने बाद उसकी शादी होने वाली थीं। तों में इस बात से नहीं डरा कि उसके अंकल के लड़के को यह बात पता चल गई है तो अब वह मुझे मार सकता है। मार से नहीं डरा लेकिन में दुसरे लड़के कि जिंदगी खराब करना नहीं चाहता था। अगर में कोशिश करता तो मेरी शादी उस लड़की से हो जाती। लेकिन उस लड़की कि पहले से ही सगाई हो चुकी थी। और सगाई के बावजूद वह मुझसे प्यार कर बेठी। क्योंकि जिससे उसकी सगाई हुई थी। उसको वह लड़की शुरुआत में पसंद करतीं थीं। तो उसने सगाई कर ली। लेकिन उसका भाई जो कि शादीशुदा था। वह एक लड़की से प्यार करता था। जो कि वह लड़की भी किसी से साथ सगाई में थी। तों अपने भाई कि करतुतो को देखकर बहन भी वैसा ही करने लगीं। लेकिन लड़का कुछ करें तो उस पर कोई सवाल नही उठाता है। लेकिन अगर लड़की ग़लत करतीं हैं। तो लाठियां निकल आतीं हैं। खैर अब जब मुझे मकान मालिक के लड़के ने लड़की के बारे में झुटी बातें बताई तो मेने उसकी बातों पर यकीन कर लिया। और उसे कहा कि मुझे पता नहीं था कि लड़की तुम्हारे अंकल कि लड़की है। और वैसे हम दोनों के बीच कुछ भी नहीं हुआ है। अगर तुम कुछ ग़लत सोच रहे हों तो मत सोचना क्योंकि हमारे बीच ऐसा कुछ भी नहीं हुआं है। लेकिन फिर मकान मालिक के लड़के ने कहा कि कुछ नहीं हुआं है तो तुम्हारे लिए भी अच्छा ही हेना अच्छा हुआं ना कि कुछ होने से पहले तुम्हें लड़की कि सच्चाई पता चल गई। नहीं तो गड़बड़ हो जाती। इसके बाद दोनों साला जीजा निचे चले गए। फिर मेने अपने कमरे में बेठकर इस बात को सोचा। कि अब मेरा इस जगह पर रहना खतरे से ख़ाली नहीं है। साथ ही आफिस में सर मुझे सेलरी भी कम दें रहें थे। तों मेने सोचा कि में अब कोई दुसरी नोकरी ढुंढ लु। और यहां से कमरा भी ख़ाली कर दु। यह बात सोचकर में आफिस में गया। तो सर ने सबको दीदी कि शादी कि पत्रिका हाथ में थमा दी। कि सबको शादी में आना है। सर कि सिस्टर कि शादी इंदौर के संयाजी होटल के टाॅप फ्लोर पर थीं। तो आफिस के सभी लोगों को शादी में बुलाया था। लेकिन अभी शादी होने में समय था। एक हफ्ते का समय था। लेकिन फिर एक हफ्ता भी आ गया और शादी वाले दिन में फिर शादी में शामिल होने के लिए संयाजी होटल के टाॅप फ्लोर पर गया। वहां मेडम और उनके पति बच्चे भी आएं हुए थें। और ये दोनों भी थें। तो हम सभी एक साथ खड़े होकर देख रहे थे। फिर सर हमारे पास आएं और कहा कि आ गये हों। तो हमने हां कहा। फिर सर ने कहा कि खाना खाकर जाना तों हम सबने एक साथ हां बोला। फिर सर के पिताजी भी आएं और कहा कि दीपक नहीं आया तो में पीछे खड़ा था। सर के पिताजी ने मुझे देख तो लिया था लेकिन इन दोनों के सामने जानबूझकर कहा कि दीपक नहीं आया। तो ऐजेड व्यक्ति ने कहा कि भाई आगे आना तु सर को दिखाई नहीं दे रहा है। फिर सर ने सबको कहां कि खाना खाकर जाना और मुझे आखिर में बोला कि दीपक खाना खाकर जाना हेना तो मेने हां मैं सर हिला दिया। में शादी में साईकिल से गया था। तो मेने खाना खाया और शादी से निकल आया क्योंकि मुझे साइकिल चलाकर कमरे पर जाना था। और यह सब लोग बाईक से आएं थें। इसलिए फिर मेने खाना खाया और शादी से निकल आया। और कमरे पर आकर सो गया।

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