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Twinflam and soulmate's epi 17

जब दोनों ने देखा कि वै मुझे सर कि नजरों में गिराने में झुटा साबित करने में नाकामयाब हो रहें हैं। जब भी मुझे गिराने कि चाल चलतें आखिर में सर कि नजरों में वै दोनों ही झुटे मक्कार बेईमान साबित होते थें। और में हर बार हर चाल पर ईमानदार साबित होता था। जिसकी वजह से दोनों को मुझ पर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था। दोनों को मेरा आफिस में बेठकर काम करना अखरता था। तो दोनों मेरे सामने काम करने का चेलेंज रखते थें। यह सोचकर कि जब वै दोनों मेरे सामने काम का चेलेंज रखेंगे तो मैं काम करने से डर जाऊंगा क्योंकि मुझे काम आता नहीं है।और में फिर उनसे काम सीखने के लिए कहुंगा। और जब में उनसे काम सिखता हुं तो वै मुझे जल्दी काम सीखाएंगे नहीं तब सर दीपक को डांट फटकार लगाएंगे। और फिर दीपक सर कि डांट फटकार सुनकर आफिस छोड़कर भाग जाएगा। लेकिन मेने सर को बता दिया था कि ये दोनों मुझे काम सीखाते नहीं है। तो सर ने मुझे काम सीखाने के लिए अपने साथ रखना शुरू कर दिया। और ट्रेनिंग देने लगें। जिससे आफिस में सर के सामने असलियत उजागर हो गई थी। कि ये दोनों आफिस में आने वाले हर नये लड़के के साथ ऐसा ही व्यवहार करके उसे भगा दिया करतें थे। इसलिए सर फिर मुझे इन दोनों से दुर रखते थें। लेकिन एक ही आफिस में काम करतें हैं तो कभी ना कभी हम आफिस में एक हो ही जातें थें। तो दोनों को मौका मिल जाता था। मुझसे बातचीत करने का सर के खिलाफ मेरे कान भरने का मौका मिल जाता था। ये दोनों मुझसे बातें करतें थे कि तुझे पता है तुझसे पहले यहां पर एक लड़का था। वह आफिस का पुरा काम सीख गया था। और काम भी पुरी मेहनत और ईमानदारी से करता था। तो मेने पुछा कि फिर अब वह लड़का कहां गया। तो दोनों बोलते हैं कि उसने यहां से काम छोड़ दिया। तो मेने पुछा कि क्युं काम छोड़ दिया। तो दोनों ने कहा कि तेरे साहब ने उसकी तनख्वाह नहीं बड़ाई जबकि वह काम सभी लोगों से ज्यादा करता था। आफिस का भी और बाहर का भी। तो उसने सर को बोला कि सर मेरी सेलरी बढ़ाइए तो तेरे साहब ने उसकी सेलरी नहीं बड़ाई तब वह जब भी कंप्लेन देखने जाता था। तो उधर दुसरे सर्विस सेंटर पर काम ढुंढा करता था। और जब उसे दुसरे सर्विस सेंटर पर यहां से अच्छी सैलरी देने के लिए बोला तो उसने यहां से काम छोड़कर दूसरे सर्विस सेंटर पर नोकरी कर ली। उसे वहां बीस हजार रुपए महिना मिलता है। और आने जाने के लिए पेट्रोल भी मिलता है। वैसे तेरी कितनी सेलरी है दीपक तो मेने अपनी सेलरी थोड़ा बढ़ाकर बताई तो दोनों ने कहा कि बस इतनी ही सेलरी मिलती है तुझे फिर एक ने कहा कि काम तो दीपक भी करता है। आफिस का और बाहर का फिर दुसरे ने कहा कि फिर तो सर को दीपक कि सेलरी बढ़ाना चाहिए। फिर दुसरे ने कहा कि तुझे सर से बोलना चाहिए कि तेरी सेलरी बढ़ाएं। इसको बोलना चाहिए। लेकिन मेने सर को सेलरी बड़ाने के बारे में कुछ नहीं कहा। क्योंकि अगर मैं सर को सेलरी बड़ाने के लिए बोलता तो सर मेरी सेलरी बढ़ाते तो इनकी सेलरी भी सर को बढ़ानी पड़ती। और ये दोनों आफिस के कामों में बेईमानी ज्यादा करते थे। जिसके बाद सर ने शहर कि सर्विस पर इन दोनों को भेजना बंद कर दिया था। जिससे दोनों का नुक़सान हो रहा था। तो अब दोनों समझ गये थें कि दीपक अगर सर को सेलरी बड़ाने के लिए बोलेगा तो दीपक के पीछे पीछे हमारी सेलरी भी बड़ जायेगी। लेकिन मेने सर को सेलरी बड़ाने के बारे में कुछ नहीं कहा यह सोचकर कि हो सकता है शायद सर ने ही इन दोनों को मुझसे यह सब बातें बोलने के लिए कहा हों। कि भला दीपक से ये बातें बोलकर देखना तो वह क्या बोलता है। अगर दीपक तुम्हारी बातें सुनकर मुझसे सेलरी बड़ाने के बारे में बोलता है तो में समझ जाऊंगा कि दीपक भी पुराने लड़को कि तरह कम सेलरी मिलने पर भाग जाएगा। यह सोचकर मेने सर को सेलरी बड़ाने के लिए कुछ भी नहीं कहा और चुपचाप अपना काम करता रहा। लेकिन सेलरी सच में मेरी कम थीं तो मेरे दिमाग में इन दोनों कि बातें घुमती रहती थी। कि मुझे दुसरी नोकरी देखना चाहिए जिसमें मुझे अच्छी सेलरी मिलती हों। लेकिन सिर्फ सोचता ही था। दुसरी नोकरी देखता नहीं था। फिर जब दोनों ने देखा कि मेने सर से सेलरी बड़ाने के बारे में कोई भी बातचीत नहीं कि तों दोनों को फिर मेरे ऊपर गुस्सा आने लगा। क्योंकि जब से सर ने दोनों कि चोरी पकड़ी थीं। तब से सर ने दोनों को शहर से बाहर वालीं कंप्लेन पर भेजना ही बंद कर दिया था। जिससे दोनों का बहुत नुक्सान हो रहा था। क्योंकि महिने में चार पांच कंप्लेन शहर से बाहर कि मिल जाया करतीं थीं। जिससे दोनों को चार पांच हजार रुपए कि बचत हो जाया करती थी। लेकिन जब से दोनों कि असलियत सर को पता चलीं तों सर ने दोनों को बाहर कि कंप्लेन देखने भेजना बंद ही करवा दिया या तो सर कंप्लेन देखने जाते थे। या फिर मुझे कंप्लेन देखने भेजते थे। तो अब ये दोनों समझ गये थें कि सर के सामने इनका भांडा फुट गया है। और सर के सामने अब इनकी कोई इज्जत कदर मान सम्मान बचा नहीं है। सर दोनों को पसंद करते नहीं है। कोई भी बात सुनते नहीं है। और मेने भी उनकी बातें सुनकर सर को कुछ कहां नहीं तो फिर दोनों को आफिस में सर और मैडम को अपनी उपस्थिति महसूस कराने के लिए दोनों में से एक थोड़ा एजेड था। उसने सर से कहा कि जब हम बाहर कंप्लेन देखने जाते हैं तो उनके आफिस बाॅय हमें बोलते हैं कि हमारे आफिस को देखो कितना साफ सुथरा और क्लीन है। और एक तुम्हारे आफिस में जाओ तो ना तो आफिस में बेठने कि जगह है। और ना ही कोई साफ सुथरा रहता है। और अजीब सी स्मेल आती है। ऐसा लगता है कि बस जल्दी यहां से बाहर निकलो। आफिस में एक साफ सफाई करने वाला आदमी आता था। जो बहरा था। वह अपने मन मुताबिक आफिस में झाढुं पोंछा करके आफिस से बाहर चला जाता था। अगर मेडम उसे सफाई करने के लिए बोलतीं भी थीं तों उसे कुछ सुनाई नहीं देता था। और वह बीना मेडम कि बातें सुने आफिस से बाहर निकल जाता था। जब एजेड आदमी ने सर से यह बातें बोलीं तो सर ने मेडम से कहा कि मेडम सफाई वाले को बोलों कि वह सफाई ठिक से करें। जब सर ने एजेड आदमी कि बात सुनकर मेडम से सफाई करवाने के लिए बोला तो एजेड आदमी को थोड़ी राहत मिली कि सर उसकी बातों को नजरंदाज नहीं कर रहे हैं। और उसकी बात सुनी जा रही है। और अगले दिन जब सफाई करने वाला आफिस में सफाई करने आया तों मेडम ने उसे कहा कि सफाई अच्छे से करों। उधर सर ने एक फर्निचर बनाने वाले को भी आफिस में बुलाया ताकि आफिस में मेडम कि टेबल सर कि टेबल और गेस्ट के बेठने के लिए चैयर कि व्यवस्था करने के लिए फर्नीचर बनानें के लिए बोला तो फर्नीचर बनानें वाले ने सर को शीट लाने के लिए बोल दिया और यह सारा सेटअप करने के पैसे बता दिए। फिर सर बाहर जाकर शीट लें आएं और फर्नीचर बनानें वाले को लाकर दे दिया। तों फर्नीचर बनानें वाले ने फर्नीचर बनानें का काम शुरू कर दिया। हम तीनों अपनी-अपनी कंप्लेन देखने के लिए गये थें। और जब हम तीनों अपनी-अपनी कंप्लेन करके वापस आफिस में आएं तो हमने आफिस में सबकुछ बिखरा हुआ पाया। क्योंकि आफिस में फर्नीचर बनानें का काम चल रहा था। तो आफिस में सबकुछ बिखरा हुआ था। फिर हम तीनों ने खाना खाया और मेडम ने दोबारा से हम तीनों को अपनी अपनी कंप्लेन बता दिया। तो हम तीनों फिर से अपनी अपनी कंप्लेन देखने के लिए आफिस से बाहर निकल गये। तब तक आफिस में बढ़या ने गेस्ट के बेठने के लिए एक बड़ी सी लम्बी चैयर बना दिया था। साथ ही मेडम के बेठने वाली टेबल भी आधी बना दिया था। तब हम तीनों अपनी-अपनी कंप्लेन करके शाम तक वापस आफिस में आएं। और जो कुछ बना था उसे देखकर स्तब्ध रह गए। क्योंकि फर्नीचर बनानें वाले ने मेडम कि टेबल को एक अलग ही डिजाइन में बनाया था। जो बहुत अच्छा लग रहा था। तो दोनों लोग मेडम को टेबल के बारे में बोलकर फ्लर्ट कर रहें थे और हस्ते हस्ते आफिस से घर के लिए रवाना हो गए। लेकिन फर्नीचर बनानें वाला आफिस में ही काम कर रहा था। वह अब सर कि टेबल बना रहा था। मतलब एक दिन और रात में उसने सर मेडम और गेस्ट के बेठने के लिए फर्नीचर बना दिया था। और अपने घर चला गया। फिर सुबह हम तीनों आफिस आएं तो आफिस का नजारा देख कर बहुत अच्छा लग रहा था। क्योंकि नये फर्नीचर से पुरे आफिस का लुक ही चेंज हो चुका था। ऐजेड व्यक्ति ने सर से जो बात बोली थीं कि हम बाहर कंप्लेन देखने जाते हैं तो दुसरे आफिस बाॅय अपने आफिस कि खराब हालत के लिए हमें हस्ते है। हमारा मज़ाक़ उड़ाते हैं। यह बात झुटी थीं। उन्हें किसी भी आफिस बाॅय ने कभी भी नहीं कहा था कि तुम्हारा आफिस साफ़ सुथरा नहीं रहता है। यह बात तों एजेड व्यक्ति ने इसलिए बोली थीं। ताकि सर का ध्यान अपनी तरफ खींच सकें। और यह कन्फर्म कर सकें कि क्या अभी भी सर हमारी बातों को सुनते हैं कि नहीं और जब सर ने एजेड व्यक्ति कि बातें सुन लि तों एजेड व्यक्ति बड़ा खुश हो गया कि अभी भी सर उसकी बातों से सहमत हैं। और उसकी बातों को एहमियत दि जा रही है। जब आफिस में फर्नीचर का सेटअप हों गया। तब दोनों ने आफिस के इस चेंज के लिए सर कि खुब तारीफ कि लेकिन सेलरी अभी भी दोनों कि बढ़ाई नहीं गयी थी। और लगातार दोनों का नुक़सान होता जा रहा था। तों दोनों मुझे सेलरी के लिए भड़काते रहते। कि अगर दीपक सर को अपनी सेलरी बड़ाने के लिए बोलेगा। तो दीपक के पीछे पीछे हमारी भी सेलरी बड़ जायेगी। और अगर सर सेलरी नहीं बढ़ाएंगे। तो दीपक आफिस छोड़कर भाग जाएगा। जिससे फिर हम दोनों ही आफिस में रह जायेंगे फिर सर को बाहर कि कंप्लेन देखने के लिए हमारे ही पैर पकड़ने पड़ेंगे। लेकिन ना तो में सर को सेलरी बड़ाने के लिए बोल रहा था। और ना ही आफिस छोड़कर भाग रहा था। तो अब दोनों ने मुझे परेशान करने के लिए एक और नई चाल चली आफिस में जो साफ सफाई करने वाला आता था। उसके बारे में सर को बोलने लगें। कि सर ये सफाई करने वाला आफिस में सफाई अच्छे से नहीं करता है। मतलब सर अगर दोनों कि सेलरी नहीं बड़ा रहें थे तों वै दोनों आफिस में साफ सफाई कि कमी बताकर सर का ही नुकसान करवानें में लग गए। पहले फर्निचर चेंज करवाने में दस पंद्रह हजार रुपए लगवा दिए। फिर बोलते हैं कि सर ये सफाई करने वाले को भी चेंज कर दों। क्योंकि दोनों ने सफाई करने वाले को आफिस अच्छे से साफ ना करने के लिए उसे पैसे दिए थें। दोनों का प्लान यह था कि जब वै दोनों सर को सफाई वाले को भगाने के लिए बोलेंगे तो सर बोलेंगे कि अगर सफाई वाले को भगा देंगे तो फिर आफिस में सफाई कोन करेगा। तब हम दीपक का नाम बताएंगे। और हुआं भी ऐसा ही जब सर को दोनों ने सफाई वाले को आफिस से भगाने के लिए बोला तो सर ने मेडम से कहा कि मेडम आप सफाई वाले से बोल दिया करों कि वह सफाई अच्छे से किया करें। तो मेडम ने सर से कहा कि सर वो आदमी एक तों बहरा है। उसे बोलने जाओ तो उसे कुछ सुनाई देता है ना कई उसके सामने चिल्लाते रहो। पर उसको कुछ सुनाई नहीं देता है। और अपने मन मुताबिक सफाई करके चला जाता है। तों दोनों ने बीच में बोलते हुए कहा कि अगर सफाई अच्छे से नहीं करता है तो फिर उसे पैसे देकर क्या मतलब है भगाओ उसे आफिस से। तों सर ने कहा कि अगर उसको भगा देंगे तो फिर आफिस में साफ सफाई कोन करेगा। तब एजेड व्यक्ति ने मेरा नाम लेते हुए सर को कहा कि ये है ना दीपक दीपक आफिस में सफाई कर दिया करेगा। क्युं दीपक आफिस में सफाई कर देगा ना तो मेडम ने कहा कि वो क्युं सफाई करेगा। तों एजेड व्यक्ति ने कहा कि क्युं नहीं कर सकता है। अपने घर पर भी तो सफाई करता होगा ना। तो आफिस में भी सफाई कर लेगा। आफिस भी तो घर जैसा ही है। क्युं दीपक तों मेने एजेड व्यक्ति को हां कह दिया कि कोई बात नहीं में सफाई कर दुंगा। में तो आफिस को अपने घर जैसा ही समझता हूं। बस मुझे सफाई करने का सामान दिलवा देना में आफिस कि सफाई कर दुंगा। पहले एजेड व्यक्ति को लगा कि वह मुझे ऐसा बोलेगा तो में सफाई करने के लिए मना कर दुंगा तो मैं सर के सामने ऐसा जवाब दुंगा तो सर मेरे बारे में ग़लत सोचेंगे। लेकिन सर और मैडम ने कहा कि ठिक है दीपक तुम आफिस में सफाई कर दिया करना जो पैसे हम सफाई वाले को देते हैं। वै पैसे हम तुम्हें दें दिया करेंगे। और जब सर और मैडम ने दोनों के सामने ऐसा बोला तो दोनों के चेहरे उतर गए। क्योंकि इन दोनों ने अपनी चालाकियों से सफाई करने वाले कि नोकरी छुड़ाई थी। तो अब उसका फल भी दोनों को मिलना था। खैर जब मेने सफाई के लिए हां बोल दिया तो मेडम ने अगले दिन सफाई वाले को आफिस में आने के लिए मना कर दिया। तो सफाई वाले ने अपने ठेकेदार को जाकर बोल दिया कि हमारे आफिस में सफाई करने के लिए उसे मना कर दिया है। तो ठेकेदार को बहुत गुस्सा आया तो ठेकेदार ने मना करने का कारण पुछा तो सफाई वाले ने कोई कारण नहीं बताया। इसके बाद सफाई वाले का ठेकेदार दुसरे दिन आफिस में आई ठेकेदार महिला थीं। वह हमारे आफिस में आई और आफिस में आकर मेडम से उसने पूछा कि उसके आदमी को सफाई करने से मना क्युं कर दिया है। तो मेडम ने उसे बताया कि उसका आदमी अच्छे से सफाई नहीं करता है। और बोलने जाओ तो उसे कुछ सुनाई देता नहीं है। इसलिए हमने उसे सफाई करने से मना कर दिया है। तो ठेकेदार महिला ने कहा कि में उसको बोलतीं हुं वह अब अच्छे से सफाई करेगा। तो मेडम ने उस महिला ठेकेदार को मना कर दिया। कि नहीं अब आप अपने आदमी को आफिस मत भेजना। हम कोई और आदमी देख लेंगे। तों वह महिला ठेकेदार गुस्से में मेडम को बोलने लगी कि में भी देखतीं हुं कि तुम्हारे आफिस में सफाई करने के लिए कोन आता है। और ऐसी धमकियां देकर महिला बाहर चलीं गईं। लेकिन रास्ते में उसे आफिस के ये दोनों मिल गये। तो इन दोनों ने उसके गुस्से कारण पुछा तो उसने बताया कि मेरे आदमी को सफाई करने से मना कर दिया है और बोलतीं है कि दुसरा आदमी रख लेगी तो में भी देखतीं हुं कि तुम्हारे आफिस में सफाई करने वाला कोन आता है। तों दोनों ने महिला ठेकेदार को कहा कि आयेगा नहीं आफिस में काम करने वाला एक लड़के ने ही सफाई करने के लिए मेडम और सर को बोल दिया है। तों महिला ठेकेदार ने कहा कि कोन लड़का है। तो दोनों ने कहा कि आफिस में जो लड़का बेठा था उसी ने तुम्हारे आदमी को सफाई करने से मना करवा दिया है। और अब खुद सफाई करेगा। तों वह महिला गुस्से से आग-बबूला हो गई। और वापस आफिस में आई और मुझे धमकियां देकर गई। कि इंदौर में अब तु रह ही लेगा। आफिस से बाहर निकल तु तेरे हाथ पैर नहीं तुड़वा दुं तो मेरा नाम बदल देना। उस महिला ठेकेदार कि बातों से में तो बहुत डर गया था। लेकिन मेडम ने उस महिला से कहा कि हां हां ठिक है तोड़ देना उसके हाथ पैर तेरी जैसी महिलाएं धमकियां देने रोज आतीं हैं आफिस में, जा तेरे से जो हो वह कर लेना लेकिन में तो उस महिला कि धमकियों से बहुत डरा हुआ था तो मेडम ने मुझसे कहा कि तु डरे मत बहुत देखी है मेने ऐसी महिलाओं को धमकियां देते हुए। में भी देखतीं हुं उसे कि वह तेरा क्या करतीं हैं। और जब मेडम को ऐसे बोलते हुए इन दोनों ने सुना तो दोनों समझ गये कि दीपक को आफिस कि तरफ से सर और मैडम दोनों का सपोर्ट है। और मेडम दीपक के बारे में किसी से कुछ भी नहीं सुनना चाहतीं हैं। क्योंकि मेडम मुझे अपने भाई जैसा मानतीं थीं। और में भी मेडम के बारे में कभी ग़लत नियत नज़र नहीं रखता था। वैसे भी महिलाओं कि नजरें बहुत तेज़ होती है। वै आपकी नियत को एक सेकंड में पहचान लेती हैं कि आप कहां देख रहे हो और किस नियत से देख रहे हो। जब में आफिस में नया नया आया था। और जब ये दोनों मुझे काम नहीं सीखा रहें थे तों मेने मेडम से ही बोला था। तो मेडम समझ गये थें कि दीपक बहुत सीधा-साधा भोला-भाला मासुम है। और ये दोनों उसे आफिस से भगाने के लिए उसे काम ना सिखाकर उसे परेशान कर रहे हैं। तब मेडम ने ही इन दोनों के बारे में सर को बताया था। कि ये दोनों दीपक को काम नहीं सीखा रहें हैं। और जब भी कंप्लेन देखने जाता था तो मेडम से ही मदद मांगता था। मेरा बोल चाल मेरा रहन सहन मेडम को समझ आ गया था। में जब भी मेडम से बातचीत करता था। तों उनके परिवार वालों के बारे में बातचीत करता था। कभी उनसे फ्लर्ट करते हुए बात नहीं कि लेकिन ये दोनों मेडम से फ्लर्ट करते हुए बातचित करते थें। मेडम को आफिस में काम करना था। अपना घर चलाना था। तों वै इन दोनों कि हरकतों को बर्दाश्त करती रहती थी। और फिर अब जैसा जमाना है। वैसे ही बनने में फायदा हें। आप लोगों कि बातों का बुरा भला मानते रहोगे लोगों कि बातों को दिल से लगाते रहोगे तो आप कभी काम ही नहीं कर पाओगे। इसलिए मेडम दोनों को कुछ नहीं बोलतीं थीं। जब तक आफिस में में नहीं आया था। तब तक मेडम इनकी हरकतों को सहन किया करतीं थीं। हालांकि दोनों साधारण फ्लर्ट ही करतें थे। कोई भी एडल्ट बातें या हरकतें नहीं करते थे। लेकिन अभी जो दोनों ने मुझे परेशान करने के लिए और आफिस से भगाने के लिए जो चाल चली थीं कि सफाई वाले को पैसे देकर आफिस में सफाई अच्छे से ना करने के लिए बोला तो उसने दोनों से पैसे लेकर वहीं किया फिर दोनों ने सर के सामने मेरा नाम लिया तों मेने हामी भर दी कि हां मैं आफिस कि सफाई कर दिया करुंगा। लेकिन इन दोनों ने ऐसा नहीं सोचा था कि मैं सफाई करने के लिए हां बोल दुंगा। और अब मेने हां बोल दिया था तों मेरी वजह से सफाई करने वाले को आफिस से भगा दिया। क्योंकि उसने भी पैसे लेकर ग़लत का साथ दिया था। तों वह भी अपने काम से हाथ धो बेठा। और अब इन दोनों कि वजह से सफाई वाले कि नोकरी भी छुट गई थी। तो दोनों को मेरे ऊपर और भी ज्यादा गुस्सा आ रहा था। तो दोनों ने मुझसे बदला लेने के लिए सफाई वाले कि ठेकेदार को मेरा नाम बता दिया। क्योंकि ये दोनों समझ गये थें कि हम अब दीपक को नुक़सान नहीं पहुंचा पायेंगे। तो हम ठेकेदार को दीपक के खिलाफ भड़का देते हैं। वह महिला ठेकेदार दीपक को डरा धमकाकर आफिस से भगा देगी। क्योंकि दीपक डरपोक है। लेकिन जब दोनों ने देखा कि महिला ठेकेदार जब मुझे धमकियां दे रही थी तों मेडम ने भी उस महिला ठेकेदार को बोल दिया कि हां जा तेरे से जो हो वह कर लेना। तों दोनों मेडम के इस बिहेवियर से सन्न रह गए। कि दीपक को कोई कुछ बोलेगा तो मेडम को तकलीफ होगी। और तो और हमारे साहब भी दीपक के ही सपोर्ट में है। तो अब दोनों ने एक और चाल चली लेकिन यह चाल मुझे परेशान करने के लिए नहीं चलीं यह चाल मेडम को परेशान करने के लिए चलीं गईं। और वह चाल थीं। मेडम के सामने एडल्ट हरकतें करने वाली और मेडम के सामने ऐसी हरकतें करने के लिए ऐसी हरकतें करने के लिए एजेड व्यक्ति ने मेडम के हम उम्र के लड़के को करने के लिए बोला।

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