जब सर ने मेरी ट्रेन कि टिकट बुक कर दिया और मेडम से मुझे खर्च करने के पैसे देने के लिए बोल दिया कि मेडम दीपक को खर्च के पैसे दे देना। तो मेडम ने हां कह दिया। फिर इतनी बात मेडम को बोलकर सर अपने घर चलें गये। फिर मेडम ने मुझे एक छोटी फोटोकॉपी मशीन निकाल कर दिया और साथ ही एक हजार रुपए भी दिए और कहा कि सुबह सात बजे रेलवे स्टेशन पहुंच जाना ठिक है। और कोई परेशानी हो तो फोन लगा लेना । तों मेने मेडम से कहा कि जी मेडम। और फिर में भी छोटी फोटोकॉपी मशीन लेकर अपने कमरे पर आ गया। और खाना खाकर सो गया। फिर अगले दिन सुबह सात बजे रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया। में अपनी अभी तक कि जिंदगी में पहली बार ट्रेन से सफर करने वाला था। मेने इससे पहले कभी भी ट्रेन से सफर नहीं किया था। खैर थोड़ी देर बाद ट्रेन आयी तो में उसमें बेठ गया फिर थोड़ी देर बाद ट्रेन चल पड़ी। रातभर सफर करने के बाद ट्रेन ने मुझे सुबह छींदवाड़ा स्टेशन पर उतार दिया। फिर में रेलवे स्टेशन से बाहर निकल कर एक नास्ते कि होटल पर गया और नास्ता और चाय पीकर मेडम ने जिस आफिस का एड्रेस दिया था। उस एड्रेस के बारे में एक आदमी से पूछा। तो उस आदमी ने मुझे रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर कि दुरी पर है। तो मेने सोचा कि एक किलोमीटर दूर ही तों है। एक किलोमीटर के लिए क्या रिक्शा लु। में पैदल ही चला जाता हूं। और मशीन भी इतनी भारी नहीं थी। जिसका मुझे वजन लगता। इसलिए फिर मे पेदल ही मेडम के बताएं हुए एड्रेस को ढुंढते हुए निकल पड़ा। फिर जब मैं एक किलोमीटर कि दुरी पर पहुंच गया तब मेने एक ओर आदमी से एड्रेस के बारे में पुछा तो उसने बताया कि यह एड्रेस यहां से एक किलोमीटर दूर है। यह सुनकर फिर मेने फिर सोचा कि इससे अच्छा था कि मैं रिक्शा कर लेता। लेकिन फिर में और पेदल चलने लगा और थोड़ी देर चलने के बाद में उस एड्रेस पर पहुंच गया था। जहां मुझे जाना था। फिर मेने रिसेप्शन पर एक सर को बताया कि में इंदौर से इस कंपनी से आया हुं। और एक फोटोकॉपी मशीन लेकर आया हूं। तों रिसेप्शन पर बेठे सर ने मुझे थोड़ी देर इंतजार करने के लिए बोला और अंदर जाकर एच आर डिपार्टमेंट में पता किया कि कोई फोटोकॉपी मशीन ओर्डर कि गयी थी। तो एच आर आफिसर ने हां कह दिया और मुझे अंदर बुलाने के लिए बोला। तब वापस आकर रिसेप्शनिस्ट ने मुझे अंदर आने के लिए बोला। और आफिस में बेठने के लिए बोला तो में आफिस में बेठ गया। फिर एच आर डिपार्टमेंट से एक आदमी आया और मुझसे फोटोकॉपी मशीन का बिल मांगा तो मेने बिल उन आफिसर को दे दिया और जिस कमरे में मशीन लगाना था उस कमरे में ले जाने के लिए मेने बोला तो उन आफिसर ने मुझे उस कमरे में ले जाकर छोड़ दिया साथ ही एक आदमी को भी मेरी मदद के लिए मेरे पास छोड़ दिया ताकि मशीन इंस्टॉल करते समय मुझे किसी भी चीज कि जरुरत पड़े तो वह आदमी मुझे लाकर दे दें। फिर उस कमरे में जाकर मेने मशीन को कार्टून से बाहर निकाला और उसको असेम्बल करने लगा। जब मशीन असेम्बल हो गयी तब मेने आदमी को फोटोकॉपी मशीन के फंक्शन सीखा दिए। और रिसिविंग लेकर आफिस से बाहर निकल आया। फिर बाहर आने के बाद मेने मेडम को फोन करके बता दिया कि मेने मशीन इंस्टॉल कर दिया है। तो मेडम ने कहा कि कोई परेशानी तो नहीं आई तो मेने कहा कि नहीं मेडम फिर मेडम ने कहा कि अब क्या करोगे ट्रेन तो तुम्हारी शाम को है। तो अभी छींदवाड़ा शहर में थोड़ा घुम फिर लो फिर शाम तक रेलवे स्टेशन पर पहुंच जाना। तो मेने हां कह दिया और छींदवाड़ा शहर में घुमने लगा। लेकिन छींदवाड़ा शहर आदिवासी बहुल क्षेत्र था तो मेने शहर में ज्यादा समय तक घुमना पसंद नहीं किया। और एक रेस्टोरेंट में जाकर खाना खाने लगा। और खाना खाने के बाद रेस्टोरेंट से बाहर निकल कर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया। फिर शहर का खाना खाने के बाद में फिर से ट्रेन में बेठ गया। रातभर सफर करने के बाद में सुबह इंदौर रेलवे स्टेशन पर उतर गया। फिर रेलवे स्टेशन से अपनी साइकिल उठाई और अपने घर के लिए निकल पड़ा। कमरे पर जाने के बाद नहा धोकर खाना खाने के बाद सो गया। क्योंकि मेडम ने मुझे रेस्ट करने के लिए बोल दिया था कि आज आफिस मत आना और घर पर ही रेस्ट कर लेना तो मेने हां कह दिया था। और फिर में कमरें पर रेस्ट कर रहा था। फिर थोड़ी देर बाद मुझे आफिस में काम करने वाले उन दोनों में से एक ने फोन किया और पुछा कि तु आफिस नहीं आया तो मैंने कहा कि नहीं में कमरें पर रेस्ट कर रहा हूं। तो उसने कहा कि ठिक है। फिर उसने मुझसे कहा कि मशीन इंस्टॉल कर आया तो मेने हां कह दिया फिर उसने कहा कि मशीन इंस्टॉल करने में कोई दिक्कत परेशानी तो नहीं हुई तो मैंने कहा कि नहीं। तब उसने मुझसे कहा कि छींदवाड़ा जाने के लिए मेडम ने पैसे कितने दिए थें। तो मेने उसे बताया कि मेडम ने मुझे एक हजार रुपए दिए थे। फिर उसने मुझसे पूछा कि खाना घर से लेकर गया था कि मेने एक हजार रुपए से ही खाना खाया तों में थोड़ा सा सतर्क हो गया कि शायद सर ने मेरी ईमानदारी पता करने के लिए इसे मुझसे पुछताछ करने के लिए बोला हों। इसलिए फिर थोड़ा रुककर फिर उसे जवाब दिया कि एक हजार रुपए में से ही खाना खाया। फिर उसने मुझसे एक हजार रुपए का सारा हिसाब पुछा तो मेने ईमानदारी से उसे बता दिया। जब में रेलवे स्टेशन पर उतरा तो वहां होटल पर चाय नाश्ता किया और फिर पेदल चलकर आफिस पहुंचा। फिर वापस आने पर भी में पैदल ही आया और रेस्टोरेंट में खाना खाया। तो उसने पुछा कि खाना कितने का खाया तो मेने 60 रुपए थाली का बताया। फिर उसने पुछा कि और कुछ खर्च किए कि बस इतना ही तो मेने कहा कि हां बस इतना ही। तो उसने मुझसे कहा कि आफिस कब आयेगा। तो मेने कहा कि में कल आफिस में आऊंगा। तो उसने कहा कि आफिस में जानें से पहले मुझसे मिलकर जाना। तो मेने कहा कि ठिक है। फिर एक दिन रेस्ट करने के बाद में अगले दिन आफिस जाने के लिए घर से निकला तों आधे रास्ते पहुंचने के बाद मुझे उसी लड़के ने दोबारा से फोन करके पुछा कि में कहा हुं। तो मेने उसे बताया कि में आधे रास्ते में आ गया हुं। तो उसने मुझे एक जगह का नाम बताया और कहा कि यहां आ जाओ तो में फिर उस जगह पर चला गया। फिर उसने मुझे एक लिस्ट दिया जिसमें एक हजार रुपए के खर्चे का ब्योरा लिखा हुआ था। मतलब यह लोग अभी तक क्या करते आ रहे थे। कि जब भी इन दोनों लोगों को शहर से बाहर पैसे देकर भेजा जाता था। तो ये दोनों आफिस से मिले हुए पैसों को अपने पास रख लिया करते थे। और अपने मन से खर्चों कि एक लिस्ट तैयार करके मेडम को दें दिया करते थे। और पुरे महिने में दो तीन बार इनको आफिस के काम से बाहर जाना ही रहता था। तो ये दोनों आफिस से मिले हुए पुरे पैसे अपने पास रख लिया करते थे। और मेडम और सर को झुटी लिस्ट बनाकर थमा दिया करते थे। और सर और मैडम दोनों इनकी बातों पर भरोसा कर भी लिया करते थे। अब अगर में मेडम को एक हजार रुपए में से आठ सो रुपए वापस कर दु। तो इन दोनों कि सारी पोल पट्टी खुल जायेगी। क्योंकि मुझसे पहले छींदवाड़ा ये दोनों कई बार जा चुके हैं। और इन्हें भी हजार रुपए देकर भेजते थे। जिसमें से ये दोनों मेडम को एक लिस्ट तैयार करके देते थे। जिसमें दिखाते थे कि सारे पैसे खर्च हो गए हैं। इसलिए दोनों ने यह सोचा कि अगर दीपक ने कम खर्च दिखाएं तो हमारी पुरी पोल पट्टी खुल जायेगी। और दीपक सर और सर के पिताजी कि नजरों में हीरो बन जायेगा। तों दोनों ने मुझे भी अपने जैसा बनाने के लिए मुझे भी एक हजार रुपए कि खर्चों कि लिस्ट बनाकर दें दिया और मेडम को देने के लिए बोल दिया। लेकिन में उस लड़के के पास से आने के बाद मेने अलग से एक लिस्ट बनाई और सिर्फ पांच सो रुपए का खर्च बता दिया। जिसमें चार सो रुपए रिक्शे का किराया और सो रुपए खाने का और पांच सो रुपए मेडम को वापस कर दिए। मेडम ने मुझसे पांच सो रुपए ले लिए और फिर छींदवाड़ा कि बातें पुछने लगीं। फिर थोड़ी देर बाद मेडम ने मुझे चैक जमा करने के लिए बेंक भेज दिया। फिर थोड़ी देर बाद ये दोनों भी आफिस पहुंच गए थे। तों मेडम ने इन दोनों लोगों को भी कंप्लेन बताकर आफिस से बाहर भेज दिया। फिर सर आफिस में आयें तो सर ने मेडम से पूछा कि मेडम दीपक आ गया तो मेडम ने कहा कि हां सर अभी बेंक गया है। फिर मेडम ने सर से कहा कि सर पहली बार किसी ने आफिस में पैसे वापस जमा किए हैं। तो सर ने पुछा कि किसने जमा किए हैं। तो मेडम ने मेरा नाम लिया और कहा कि पांच सो रुपए वापस लेकर आया है। तब सर ने कहा कि वाह यार चलो अच्छा है। फिर सर ने यह बात अपने पिताजी को भी बताई कि पापा आफिस में पहली बार कोई पैसे वापस लेकर आया है। फिर सर और सर के पिताजी ने आपस में बात कि की छींदवाड़ा तो ये दोनों भी कई बार गये है। लेकिन ये दोनों तो कभी भी पैसे वापस लेकर नहीं आए हैं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि दीपक हमारी नज़रों में हीरो बनने के लिए अपने पैसें देकर हमारा ध्यान अपनी तरफ खींच रहा हो। और पुराने लोगों को हमारी नज़रों में झुटा साबित कर रहा हों। ऐसी बातें भी इंसान सोच सकता है। सोचने के ऊपर है। अगर आप ईमानदार है आप हमेशा लोगों कि भलाई का लोगों कि अच्छाई के लिए काम करते हैं। किसी का बुरा करने के बारे में नहीं सोचते तो लोग आपकी ईमानदारी पर शक करेंगे। सवाल खड़े करेंगे। तुलना करेंगे। खैर अभी सर और सर के पिताजी को मेरी ईमानदारी पर शक हो रहा था। खैर में अभी बैंक से चैक जमा करके वापस आफिस में पहुंचा था। फिर मेडम ने मुझे एक कंप्लेन बता दी और वहां जाने के लिए बोला तो मैंने अपना टुलकिट लिया और कंप्लेन देखने के लिए चला गया। फिर जब कंप्लेन करके वापस आया तो मेने मेडम से कहा कि में खाना खाने जा रहा हूं। तो मेडम ने मुझे जाने दिया। में केंटिन में खाना खाता था। इसलिए आफिस से बाहर जाता था। और ये दोनों घर से खाना लेकर आते थें तो दोनों आफिस में बेठकर खाते थें। फिर एक दो दिन बाद झाबुआ से एक कस्टमर ने एक प्रोजेक्टर ओर्डर किया तों सर ने मुझे प्रोजेक्टर इंस्टॉल करने कि प्रक्रिया समझा दीं और मेडम से बोलकर मुझे झाबुआ जानें के लिए पैसे देने का बोलकर बाहर चले गए। फिर मेडम ने मुझे एक प्रोजेक्टर निकाल कर दिया और एक हजार रुपए देकर झाबुआ जानें के लिए बोल दिया। फिर शाम को आफिस से मेने प्रोजेक्टर लिया और अपने कमरे पर चला गया। फिर खाना खाकर सो गया। फिर सुबह उठकर झाबुआ कि बस में बैठ गया और निकल पड़ा। बस वाले ने मुझे दो बजे झाबुआ बस स्टैंड पर उतार दिया। फिर बस स्टैंड से में मेडम के बताएं हुए एड्रेस पर पहुंच गया। क्योंकि वह एड्रेस बस स्टैंड से बस दो तीन सो मीटर कि दुरी पर था। फिर आफिस के रिसेप्शन पर जाकर मेने बताया कि में इंदौर से इस कंपनी से प्रोजेक्टर लेकर आया हूं तो रिसेप्शनिस्ट ने कहा कि थोड़ी देर रुको मैं अंदर पता करके आता हूं। तो में आफिस के बाहर खड़ा हो गया फिर रिसेप्शनिस्ट वापस आकर मुझे आफिस में लें गया और अंदर ले जाकर सोफे पर बिठा दिया। फिर एक आफिसर मेरे पास आएं और प्रोजेक्टर का बिल मुझसे मांगा तो मेने उन्हें बिल दें दिया। फिर उन्होंने मुझे वह कमरा दिखा दिया जहां प्रोजेक्टर इंस्टॉल करना था। साथ ही एक आदमी को मेरे पास छोड़ दिया ताकि प्रोजेक्टर इंस्टॉल करने मे मुझे किसी चीज कि जरुरत पड़े तो वह आदमी मुझे लाकर दे दें। फिर मेने प्रोजेक्टर को कार्टून से बाहर निकाला और उसे असेम्बल करने लगा जब प्रोजेक्टर असेम्बल हो गया तब आदमी से मेने एक बड़ी स्टुल मंगवाई और प्रोजेक्टर को कमरे कि छत में फिट कर दिया। और अपने मोबाइल से कनेक्ट करके उस आदमी को बोला कि अपने आफिसर को बता दो कि प्रोजेक्टर इंस्टॉल हो गया है। वै प्रोजेक्टर का डेमो देख लें। फिर वह आदमी अपने आफिसर को बुलाकर कमरे में ले आया फिर मेने सबको प्रोजेक्टर का डेमो दिखा दिया और सारी प्रक्रिया दिखा दीं। और आफिस से बाहर निकल आया और मेडम को फोन करके बता दिया कि मेने प्रोजेक्टर इंस्टॉल कर दिया है। तो मेडम ने कहा कि ठिक है। फिर मेडम ने सर से भी कह दिया कि मेने प्रोजेक्टर को इंस्टॉल कर दिया है। तो सर ने मुझे शाबासी देते हुए कहा कि वाह यार दीपक तो सीख गया है। चलों ठीक है। फिर मेडम ने मुझे कहा कि खाना वाना खाकर निकल आना तों मेने हां कह दिया। फिर में झाबुआ से वापस इंदौर आने के लिए बस में बैठ गया। और नौ दस बजे रात को बस वाले ने मुझे इंदौर उतार दिया। और में फिर उधर से अपने कमरे पर चला गया। और सो गया फिर अगले दिन फिर से आफिस पहुंच गया और बचे हुए पैसे मेडम को वापस कर दिए। अब इसके बाद मेडम सर और सर के पिताजी को पुरा यकिन हो गया था। कि यह दोनों आज तक हमें बेवकूफ बनाते आ रहें थे। जो पैसे इनको खर्च के मिलते हैं। ये उन्हें अपने पास रख लेते हैं। और हमें एक झुटी लिस्ट बनाकर दें दिया करतें हैं। इसका मतलब यह है कि अगर दीपक आफिस में काम करने नहीं आता तों हमें इन दोनों कि बेईमानी के बारे में कभी पता ही नहीं चलता कि यह दोनों हमारे साथ धोखा कर रहे हैं। हमें बेवकूफ बना रहे हैं। और अब इन दोनों लोगों पर से सर और सर के पिताजी का भरोसा पुरी तरह से टुट गया था। लेकिन सर इन्हें आफिस से निकाल भी नहीं सकते थे। अगर दोनों सर पर कोई कार्यवाही कर दें तो इसलिए सर और सर के पिताजी ने दोनों को आफिस में काम करने दिया लेकिन अब दोनों से कोई भी बातचीत नहीं करता था। बस मेडम को बोल दिया जाता था कि आप इन दोनों को कंप्लेन बता दिया करों। और आफिस में ज्यादा देर तक बेठने या इन दोनों से कोई भी बातचीत मत किया करो। मेडम ने भी हां कह दिया। फिर एक दो दिन बाद देवास बेंक से आफिस में फोन आया कि आपकी फोटोकॉपी मशीन खराब हो गई है। इसे रिपेयर करने के लिए किसी चेकर को भेज दिजिए। तों मेडम ने सर को कंप्लेन बता दिया। तो सर ने मुझे भेजनें के लिए मेडम को बोल दिया कि दीपक को देवास भेज दों। जिन जिन शहरों में में अभी जा रहा हूं। इन शहरों में पहले ये दोनों जाया करते थे। साथ ही इन दोनों को ट्रेवल अलाउंस भी दिया जाता था। लेकिन ये दोनों उस अलाउंस अपने पास रखकर झुटी लिस्ट बनाकर मेडम को दें दिया करते थे। अब मेडम और सर को यहीं लगता था। कि ये दोनों सच बोल रहे होंगे बाहर जाने पर इतना पैसा खर्च हो जाता होगा। लेकिन दोनों कि असलियत तब उजागर हुई जब मेने अपना खर्च बताया। खैर अब में देवास गया और देवास जाकर अपना काम करके वापस आ गया। फिर सर मुझे अपने साथ भी लेकर जाने लगें जहां बड़ी बड़ी फोटोकॉपी मशीन इंस्टॉल करना रहता था। या बड़े बड़े प्रोजेक्टर इंस्टॉल करने रहते थे। हेल्पींग हेंड के लिए और सीखाने के लिए भी। जब भी कुछ नया प्रोडक्ट इंस्टॉल करना रहता था। तो सर मुझे अपने साथ लेकर जाते थे। और यह सबकुछ देखकर ये दोनों मुझसे जलते थे। और जलन के मारे मुझे सर के बारे में कुछ ना कुछ सीखाते रहते थे। लेकिन में दोनों कि बातों पर ज्यादा ध्यान देता नहीं था। लेकिन दोनों कि बातें मेरे दिमाग में घुमती रहती थी। फिर सर मुझे अपने साथ कहीं विजिट करना हो तों वहां भी साथ लेकर जाते थे। साथ ही फोटोकॉपी मशीन का डेमो दिखाने के लिए भी लें जाया करते थे। एक बार तो सर मेरे कहने पर मेरे एरिया में भी गाड़ी लेकर आ गये। बट अफसोस कि मशीन की बिक्री नहीं हुई लेकिन सर को एक कस्टमर मिल गया जिसे एक कलर प्रिंटर चाहिए था। मतलब सर को लगता था कि अगर दीपक आफिस में रहेगा। तो अपनी ईमानदारी से आफिस को फायदा ही पहुंचायेगा। लेकिन अगर ये दोनों आफिस में रहेंगे तो ये दोनों आफिस को लुटकर खा जायेंगे। लेकिन अब दोनों को ही भनक लग गई थी कि आफिस में कोई भी अब दोनों को पसंद नहीं करता है। और उनके साथ ऐसा व्यवहार मेरे आने के बाद ही होने लगा है। तो पहले दोनों को मेरा आफिस में बेठना सही नहीं लगता था। तो मुझे बाहर भेजने के लिए दोनों ने चाल चली कि मुझे बाहर कंप्लेन देखने के लिए भेजेंगे तों मुझसे कंप्लेन क्लियर नहीं होगी तो में परेशान होकर इन दोनों के पास जाऊंगा। लेकिन जब मे इन दोनों के पास गया नहीं तो दोनों को अपनी चाल फेल होते हुए नज़र आने लगी। जिससे दोनों को मुझ पर बहुत गुस्सा आ रहा था। फिर सोचा कि बाहर भेजेंगे तों इसे जब कुछ नहीं आयेगा तब यह हम दोनों के पास आयेगा। लेकिन मुझे सर ने ट्रेनिंग देकर ट्रेन कर दिया तो मैं इन दोनों के पास गया ही नहीं और अब से सर मुझे ही शहर से बाहर भेजने लगे थे। जिससे इन दोनों के अलाउंस का नुक़सान हो रहा था। तो इन दोनों को इस बात से ओर भी ज्यादा गुस्सा आ रहा था। कि अब सर इन दोनों को बाहर कहीं भी नहीं भेज रहें हैं। और हर जगह दीपक को ही भेज रहे हैं। और तों और सर कहीं बाहर आते जाते हैं तो वहां भी दीपक को ही अपने साथ में लेकर जाते हैं। साथ ही मेडम भी अब तो हमसे कोई बातचीत नहीं करतीं हैं। तों दोनों ने फिर अपने अलाउंस को बचाने के लिए फिर और सर के सामने ईमानदार बनने के लिए बाहर कि कंप्लेन देखने जाने लगें। फिर जब ये दोनों शहर से बाहर जाने लगें तो आफिस में फिर कार्डलेस फोन आने लगें। जिनको रिपेयर करना में सीख गया था। जिसकी वजह से में फिर आफिस में ही बेठकर फोन रिपेयर करता था। अब मैं छांव में बैठकर फोन रिपेयर करता था। और ये दोनों अपनी चालाकियों और बेईमानी कि वजह से दिनभर धूप में कंप्लेन देखने जाते थे। लेकिन मेरा छांव में बेठना इन दोनों को अखरता था। जलन होती थीं। कि सर हमें दीपक कि तरह आफिस में क्युं बेठने नहीं देते हैं। जबकि हम तो पुराने हैं। और अब तो हमारी उम्र भी हो गई है। लेकिन वै दोनों ये नहीं देख रहे थे। कि वै दोनों काम करने में बेईमानी करते थे। साथ ही ये लोग दुसरो को भी सर्विस देते थे। अगर कंप्लेन जल्दी हो जाती तो दोनों वापस आफिस नहीं आते थें। उसी समय में किसी और को सर्विस देकर पैसे कमाते थे। और जब देरी से आफिस पहुंचते और मेडम पुछती कि इतना समय लग गया एक कम्पलेन को सोल्व करने में तों कुछ ना कुछ बहाना बनाकर मेडम को बेवकूफ बना देते थे। कि मशीन में इतना काम था उतना काम था। ऐसे करके बहाने बना देते थे। और दोनों जब से आफिस में भर्ती हुए थे तब से दोनों ऐसे ही काम करते आ रहे थे। और जो कोई नया लड़का भर्ती होता था। तो सबसे पहले तो उसे आफिस कि झुटी सच्ची बातें बताकर भड़का देते थें। जिससे वह आफिस छोड़कर भाग जाता था। तो इन दोनों कि असलियत कभी उजागर ही नहीं हुई। लेकिन जब मे आफिस में आया तो मेरे साथ भी वैसा ही व्यवहार करना चाहा जो मुझसे पहले आएं हुए लड़को के साथ किया था। लेकिन मेने सर और मैडम को बता दिया। जिससे सर समझ गये थें। इन दोनों ने दीपक से पहले आएं हुए लड़कों को भी ऐसे ही पर हमारे खिलाफ भड़काकर भगाया होगा। लेकिन दीपक कि हिम्मत और सहनशीलता कि ताद देना पड़ेगा कि वह इन दोनों कि चालाकियों में फसा नहीं। और आफिस में काम कर रहा है। और अभी में आफिस में कार्डलेस फोन रिपेयर करने लगा था। जिससे फिर से दोनों को मुझसे जलन होने लगी। क्योंकि फोन कि वजह से में फिर बेंक में चैक जमा करने भी नहीं जाता था। और ना ही कोई दुसरी कंप्लेन देखने के लिए बाहर जाता था और यह सबकुछ देखकर इन दोनों को फिर से मुझसे जलन होने लगी। तो दोनों मे से एक ने आफिस में बेठने के लिए और कार्डलेस फोन रिपेयर करने के लिए बीपी का बहाना बनाया कि मेरे कल तबियत खराब हो गई थी। तो डाक्टर ने मुझे ज्यादा देर तक धुप में रहने से मना किया है। धुप में ज्यादा देर तक रहता हूं तो मेरा बीपी कम हो जाता है जिससे मुझे चक्कर आने लगते हैं। इसका मतलब यह था कि उसे आफिस में बेठने दिया जाएं वह फोन रिपेयर कर लेंगे। और दीपक को बाहर कंप्लेन देखने भेजों। तो सर ने वैसा ही किया बीपी वाले को आफिस में बेठने दिया। और मुझे कंप्लेन देखने के लिए बाहर भेजने लगे। अब आफिस में अगर आपको बेठना है तो फिर आफिस के हर काम आपको ही करना पड़ेंगे। जैसे कि बेंक में चैक जमा करने जाना पड़ेगा। आफिस पर कोई मशीन रिपेयर होने आई तो उसे देखना पड़ेगा। फोन आएं तो उसे भी आपको ही देखना पड़ेंगे। क्योंकि मैं यह सबकुछ देखता था। अब जिसने बीपी का बहाना बनाकर आफिस में बेठने के लिए चाल चली थीं। वह एक दिन तों आराम से बेठा रहा। एक फेक्स मशीन आई थीं। उसे रिपेयर करता रहा। फिर अगले दिन कार्डलेस फोन आने शुरू हो गये। अब उसको लगा कि वह मशीन रिपेयर कर लेता है तो फोन भी रिपेयर कर लेगा। और आराम से आफिस में बैठेगा लेकिन उसने मेरे हक का आराम मुझसे छल कपट करके छीना था। तो फिर भगवान उसे भी आराम से बेठने नहीं देगा। इसलिए फिर आफिस में कार्डलेस फोन कि जैसे बोछार होने लगी दिनभर में पंद्रह बीस फोन रिपेयर होने के लिए आने लगे। साथ ही फेक्स मशीन फोटो कापी मशीन भी आने लगी। अब आफिस में बेठा था उसके तोते उड़ गए कि इतने प्रोडक्ट को अकेले कैसे रिपेयर करेगा। और फोन रिपेयर करना तो उसे आता ही नहीं था। तो फोन तो आफिस में इतने सारे इकट्ठे हो गए कि आफिस में हर जगह फोन ही फोन नज़र आने लगे। अगर में बाहर से कंप्लेन करके आता तो वह आदमी मुझसे धीरे से कहता कि दीपक ये फोन देख लेना तों मेडम सुन लेती थी। और मुझे कहती कि दीपक बेंक जाकर चैक जमा करके आओ। तीन दिन में ही बीपी वाले आदमी ने आफिस से बाहर जाना शुरू कर दिया। फिर सर और मैडम ने मुझसे कहा कि दीपक इन फोन को देख लेना जो रिपेयर हो उन्हें रिपेयर कर देना। और जो नहीं हो उन्हें मोबाइल दुकान पर सर्विस के लिए दें आना। तो मेने हां कह दिया और फोन चैक करने लगा। फिर जो फोन मुझसे रिपेयर हुआ उसे रिपेयर कर दिया। और जो फोन मुझसे रिपेयर नहीं हुआं उसे अलग से रखते चला गया। दस पंद्रह फोन निकलें जिन्हें में रिपेयर नहीं कर पाया था। उन सभी फोन को एक बेग में भरकर मोबाइल शाॅप पर लें गया। और शाॅप वाले को रिपेयर करने के लिए दें आया। और वापस आफिस में आ गया। इन दोनों लोगों को मेरा सर के करीब रहने से जलन होती थीं। ये दोनों सोचते थे। कि अगर में सर के करीब रहा साथ रहा तो मेरी जल्दी ग्रोथ हो जायेगी और ये दोनों पीछे रह जायेंगे। तो वै दोनों मुझे सर कि नजरों से उतारने के लिए सर से मुझे दुर करने के लिए मुझे बेईमान साबित करने के लिए तरह-तरह चालें चलतें थें। लेकिन भगवान भी तो देख रहे थे। और चालाक व्यक्ति चाहे कितनी ही चालाकियां चलें एक दिन पकड़ में आ ही जाता है। जैसे अभी ऐ दोनों पकड़ में आ गए थे। और पकड़ में दोनों मेरी वजह से ही आएं थें। तो दोनों को मुझपर बहुत गुस्सा आता था। कि दीपक कि वजह से ही हमारी सारी असलियत सर के सामने उजागर हुई है। अगर दीपक यहां रहा तो एक दिन सर हम दोनों को नोकरी से निकाल देंगे। तो सर हम दोनों को नोकरी से निकालें इससे पहले हमें दीपक को आफिस से भगाना है। और फिर से आफिस में अपना नियंत्रण कायम करना है।