आफिस में दोनों पुराने लोगों ने देखा कि में सर्विस सेंटर का काम सीखने के लिए उनके पास नहीं जाता हुं। या काम सीखने के लिए पुछता भी नहीं हुं। तब दोनों ने अपने मन में धारणा बना लिया कि सर को हमारा कोई राज पता चल गया है। और अब हर दीपक को आफिस का सारा काम सीखाकर हम दोनों में से किसी एक को सेंटर से भगाना चाहते हैं। तभी तो दीपक को सर स्पेशल ट्रेनिंग दे रहे हैं। और मेडम भी सर और दीपक का साथ दें रहीं हैं। इसका मतलब यह है कि अब आफिस में हमारी सर को कोई जरूरत नहीं है। जब दीपक आफिस का सारा काम सीख जायेगा तब हम दोनों में से किसी एक को सेंटर से भगा देंगे। पर सर आफिस से हमें ना भगाएं उससे पहले हम दीपक को यहां से भगा देंगे। क्योंकि जब से आफिस में दीपक आया है। तब से सर का और मेडम का व्यवहार हम दोनों के प्रति अलग हो गया है। सर और मैडम के व्यवहार से ऐसा प्रतीत होता है कि सर और मैडम हम दोनों को आफिस में बेठे हुए देखना ही नहीं चाहते हैं। अगर हम दोनों आफिस में थोड़ी देर के लिए भी बेठते है तो मेडम हम दोनों को कंप्लेन बताकर भगाने ही लगती है। और दीपक भले ही दिनभर आफिस में बेठा रहें। उसको ना तो सर कुछ कहते हैं। ना मेडम कुछ कहतीं हैं। वै दोनों लोग मेडम और सर का मेरे प्रति अच्छा और सपोर्टीव और उन दोनों के प्रति खराब व्यवहार तो देख रहे थे। लेकिन वै दोनों यह नहीं देख रहे थे। कि इसके जिम्मेदार भी वे दोनों ही थें। क्योंकि शुरुआत में तों सर ने उन्हें मुझे ट्रेनिंग देने के लिए बोला था। लेकिन दोनों ने अपनी छोटी सोच के चलते मुझे ट्रेनिंग दी नहीं और परेशान करते रहे। क्योंकि उन्हें लगता था कि अगर दीपक को जल्दी काम सीखा देंगे तो सर उन दोनों में से किसी एक को आफिस से भगा देंगे। और वै दोनों यह सोच रखकर मुझे जल्दी काम सीखा नहीं रहें थें। ताकि सर दीपक में कमी बताकर आफिस से निकाल देंगे। जिससे आफिस में उन दोनों कि जगह सुरक्षित रहेगी। और फिर कोई और भी नया लड़का आफिस में आया तो हम उसके साथ भी ऐसा ही करेंगे। हालांकि यह दोनों लोग मुझसे पहले आफिस में जितने भी लड़के आये थें। उनको ऐसी ही चालाकियां करके उन्हें भगा चुकें थे। और अब इस आफिस में में,आया था। तो दोनों मेरे साथ भी वैसा ही व्यवहार कर रहे थे। मुझे भी आफिस से भगाने कि चालाकियां चल रहे थे। ऐसा होता है ना कि आप दुसरे के एरिया में जाते हैं तो वह अपने एरिया का राजा होता है। और वह सबको अपने कंट्रोल में रखता है। और अगर आप उसके एरिया में जाकर राजा बनने कि कोशिश करते हैं तो वह आपको राजा बनने नहीं देता है। वह आपको अपने राज्य से भगाने कि हर संभव कोशिश करेंगे। और जब में आफिस में नहीं था तो सर सर के पिताजी और मेडम इन दोनों लोगों के कंट्रोल मे थें। यह दोनों सर सर के पिताजी और मेडम को अपनी चालाकियों से अभी तक बेवकूफ बनाते हुए आ रहें थे। और नया कोई भी लड़का आता था। उसे डरा धमकाकर जल्दी काम ना सिखाकर इतना परेशान कर देते थे। कि वह लड़का इनकी हरकतों से परेशान होकर खुद ही आफिस छोड़कर भाग जाता था। और अगर कोई नया लड़का ज्यादा समय थें। आफिस से भगा दिया करते थे। लेकिन इस बार आफिस में मेरी एन्ट्री हुई थी। और जैसे ही आफिस में मेरी एन्ट्री हुई थी। वैसे ही सर मुझे अपने साथ रखने लगें थें। अपने साथ लेकर जानें लगें थें। जिससे दोनों को मुझसे जलन होने लगी। कि अगर में सर के साथ रहुगां तो में सर कि नज़र में अपनी अच्छी इमेज बना लुंगा जिससे मेरी तरक्की बहुत जल्दी होगी। और ये दोनों पीछे रह जायेंगे। इसलिए फिर दोनों ने मुझे सर से अलग करने के लिए साइकिल देने का उदाहरण देते हुए कहा कि दीपक को आपकी साइकिल दें दों उससे दीपक आस पास कि कंप्लेन कर लिया करेगा। साथ ही यह सोच बनाई कि जब कंप्लेन देखने जायेगा तो प्रोब्लम दीपक से सोल्व होगी नहीं और जब प्रोब्लम सोल्व नहीं होगी तो फिर दीपक को हमसे प्रोब्लम का सोल्यूशन पुछना ही पड़ेगा। तब हम दीपक को नाच नचाएंगे। लेकिन सर ने जब मुझे काम सीखने के लिए इन दोनों के पास भेजा तो दोनों मुझे काम बराबर सीखाते नहीं थें तो मेने मेडम से कह दिया। और मेडम ने सर को बोल दिया फिर सर ने मुझे अपने साथ आफिस में रखकर काम सीखा दिया और काम सीखाने के बाद कंप्लेन देखने के लिए कस्टमर के आफिस भेजने लगे। साथ ही यह भी कह दिया कि अगर कंप्लेन स्पाॅट पर कोई परेशानी आये तो मेडम को फोन लगाकर पुछ लिया करना। नहीं तो फिर मुझसे पुछ लिया करना। हम दोनों तुम्हें बता दिया करेंगे। फिर अब मेडम मुझे कंप्लेन बता देती तो मे अपने टुलकिट लेकर आफिस से निकल जाया करता था। क्योंकि अब सर को पता चल गया था कि यह दोनों दीपक को डरा धमकाकर आफिस से भगाने कि फिराक में बेठे है। इसलिए सर ने मेडम से कह दिया कि मेडम इन दोनों को दीपक से मिलने ही मत देना। जब यह दोनों आफिस में हो तब दीपक को कोई काम बताकर बाहर भेज दिया करों। जब सर दोनों कि दाल गलने नहीं दें रहें थे तों दोनों को बहुत गुस्सा आता था। कि सर और मैडम कोई मोका ही नहीं दें रहें हैं कि वै दोनों मुझे सर सर के पिताजी और मेडम के खिलाफ भड़का सकें। मुझे डरा धमका सकें। मेरे कान भर सकें। या फिर आफिस कि कोई जानकारी मुझसे लें सकें। क्योंकि मेडम को सर ने स्पेशल बोल कर रखा था कि दीपक को इन दोनों से दुर रखना। इन तीनों को आपस में मिलने नहीं देना है। और मेडम भी इस बात का विशेष ध्यान रख रहे थे। और अब जब सर को पता चल गया था कि मुझे ये दोनों आफिस से भगाना चाहते हैं। तो फिर सर इन दोनों लोगों से कोई भी बातचीत करते नहीं थें। और मेडम भी इन दोनों से कोई भी बातचीत नहीं करतीं थीं। अगर यह दोनों आफिस आते थें तो मेडम जल्दी से दोनों को कंप्लेन बता देती और कंप्लेन देखने का बोलकर अपने काम में व्यवस्थित हो जाया करती थी। अगर दोनों मेडम से कोई बातचीत करने का बहाना ढुंढते या आफिस में बेठने के बहाने ढुंढते तो मेडम दोनों को तुरंत बोल दिया करतीं थीं कि आज कि कंप्लेन आज ही खत्म करना है। आज कि कोई भी कंप्लेन कल के लिए पेंडिंग नहीं छोड़ना है। तों दोनों मेडम को बोलते थे कि अरे कर देंगे मेडम सभी कंप्लेन आज ही कंप्लीट कर देंगे। थोड़ा आफिस में बेठने तों दो। तों मेडम कहतीं थीं। कि फिर सर मुझे डांट फटकार लगाते हैं कि में आप दोनों को आफिस में बिठाकर रखतीं हुं। और कंप्लेन देखने के लिए नहीं भेजतीं हुं। तो दोनों ने कहा कि सर को कैसे पता चला कि हम दोनों आफिस में बेठे रहते हैं और कंप्लेन देखने के लिए नहीं जातें हैं। तो मेडम ने कहा कि कस्टमर सर के पास फोन लगाते हैं। कि अभी तक आपके चेकर नहीं आएं हैं। हमारी फोटोकॉपी मशीन बंद पड़ी हुई है। अगर आप समय से सर्विस नहीं दें सकते हैं तों हम कोई और कंपनी कि फोटोकॉपी मशीन ले आयेंगे। इसलिए फिर सर मुझे डांट फटकार लगाते हैं। कि मैं आप लोगों को कंप्लेन देखने के लिए नहीं भेजतीं हुं। तब दोनों ने एक दूसरे कि तरफ देखते हुए एक दूसरे को आंखों का इशारा मारते हैं। मेने देख लिया था दोनों को एक-दूसरे को इशारा मारते हुए। फिर दोनों चैयर से खड़े होते हुए बोलें कि चलों भाई कंप्लेन देखने चलते हैं नहीं तो यहां बेठे रहें तो मेडम के पास साहब का फोन आ जायेगा और अपनी वजह से बेचारी मेडम को डांट फटकार सुननी पड़ जायेंगी। तो मेडम ने कहा कि मुझे कोई दिक्कत नहीं है आप दोनों बेठो आफिस में जब सर का फोन आयेगा तो में आप दोनों कि बात करवा दुगीं फिर आप ही बता देना कि आप दोनों आफिस में क्या काम कर रहे थे। तो दोनों ने कहा कि जा रहें हैं मेडम जा रहें हैं। आप टेंशन मत लिजिए हम आपको कोई भी तकलीफ नहीं होने देंगे। फिर दोनों अपने अपने टुलकिट लेकर आफिस से बाहर निकल गये। वै दोनों आफिस में बेठकर मेडम से फ्लर्ट करके समय काटते रहते थे। जिससे उन्हें आफिस में बेठने का मोका मिलें। क्योंकि वै दोनों मुझे आफिस में बेठा हुआं देखकर जलन रखते थें। कि दीपक को कोई कुछ क्युं नहीं बोलता है। अगर दीपक आफिस में बेठता है तो हम भी आफिस में बेठेगें लेकिन मेडम को सर ने मना किया हुआ था कि जब दीपक आफिस में हो तब इन दोनों को कंप्लेन देखने के लिए भगा देना। नहीं तो यह दोनों दीपक के हमारे खिलाफ कान भरेंगे। और दीपक बहुत सीधा-साधा भोला-भाला अच्छा और ईमानदार लड़का है। और ये दोनों चंट चालाक और होशियार है। तो ये दोनों उसे हमारे खिलाफ भड़काकर उसके कान भरकर उसे आफिस से भगा देंगे। तों आप इन दोनों को जब दीपक आफिस में हों तब रहने ही मत दिया करों। भगा दिया करों। और अब इधर इन दोनों ने देखा कि मेडम मुझे इन दोनों के बीच में रहने ही नहीं देती है। तों फिर इन दोनों ने काम करने में आनाकानी करने के बहाने बनाना शुरू कर दिए। कोई बिमारी का बहाना बनाकर छुट्टी ले रहा है। तो कोई गांव जानें के बहाने से छुट्टी ले रहा है। दोनों ने सोचा कि दीपक को तो अभी इतना अच्छे से काम आता नहीं है। और मेडम और सर दोनों दीपक के पीछे ही हमें भाव देना कम किया है। और आफिस में हम दोनों कि जरुरत महसूस नहीं कर रहे हैं। और दीपक भी यहीं सोच रहा है कि अगर हम दोनों उसे कुछ नहीं भी बताएंगे तो उसे मेडम और सर सबकुछ बता देंगे। लेकिन अगर हम दोनों आफिस आने में बहाने बनाएंगे और छुट्टियां मारेंगे। तो आफिस में काम बड़ जायेगा। जिसकी वजह से सारा लोड सर के ऊपर ही आयेगा। क्योंकि दीपक तो अभी ट्रेनिंग में है। और उसे तो अभी पुरा काम आता नहीं है। तो जब सर के ऊपर कंप्लेन का लोड बढ़ेगा। तो सर को फिर हम दोनों कि खुशामदी करनी ही पड़ेगी। सर को हमारे सामने झुकना ही पड़ेगा। लेकिन जब यह दोनों बिमारी का बहाना बनाकर छुट्टियां मारने लगें। तों सर और मैडम समझ गये कि ये दोनों छुट्टियां क्युं मार रहें हैं। लेकिन सर ने और मेडम ने दोनों को छुट्टीयां मनाने दिया कंप्लेन के लिए दोनों को कोई फोन नहीं लगाया गया। और सारी कंप्लेन को मेने और सर ने ही क्लियर कर दिया। तब दोनों ने देखा कि उनकी छुट्टियां मारने के बाद भी सर और मैडम पर कोई असर नहीं पड़ा। तो दोनों को बहुत गुस्सा आ रहा था। कि उनकी चलीं हुई चाल फेल हो गई है। लेकिन अब कहें किसको फिर दोनों ने परेशान होकर आफिस आना शुरू कर दिया। लेकिन आफिस में दोनों का फिर वैसे ही स्वागत किया गया। पहले तो और फिर भी सर और मैडम थोड़ी बहुत बातचीत कर लिया करते थे। लेकिन इस चालाकी के बाद सर और मैडम ने दोनों से पुछा भी नहीं कि अब आपकी तबियत कैसी है। दोनों जैसे ही आफिस में आयें तो मेडम ने दोनों को कंप्लेन बता दिया और अपने काम करने में व्यस्त हो गई। और अब आफिस में दोनों के साथ हो रहें ऐसे व्यवहार से दोनों बहुत गुस्से में रहते थे। लेकिन गुस्सा किसी को दिखाते नहीं थें। बस अपना टुलकिट लेकर आफिस से बाहर निकल जातें थें। फिर आफिस में एक कस्टमर का फोन आया जिसने फेक्स मशीन ओर्डर किया था। तो मेडम ने ओर्डर रजिस्टर में दर्ज कर लिया और एक फेक्स मशीन तैयार कर दिया। और पुछा कि इसे इंस्टाल करने कोन जायेगा। तों दोनों में से एक बोला कि ये दीपक को भेज दों। तों मेडम ने कहा कि नहीं वो अभी नया है। तुम दोनों में से बताओं कि तुम दोनों में से कोन जायेगा। तो एक बोलता है कि मेडम हम तो मशीन इंस्टॉल कर ही आयेंगे। पर फिर दीपक कब सीखेगा मशीन इंस्टॉल करना। दीपक को भी तो एक ना एक दिन यह काम सीखना ही है। तो आज से ही दीपक को सीखाओ कि मशीन कैसे इंस्टाल करते हैं। तो सर भी आफिस में बेठे थे। सर ने मेडम को आंख से इशारा करते हुए दोनों को आफिस से बाहर जाने के लिए बोला तो मेडम ने फिर इन दोनों को कंप्लेन बताते हुए कहा कि ठिक है फिर आज दीपक जायेगा मशीन इंस्टॉल करने के लिए इन दोनों ने सोचा था कि अगर यह दोनों मेरा नाम लेंगे तो मेडम और सर बोलेंगे कि नहीं नहीं दीपक से अभी मशीन इंस्टॉल नहीं होगी तो आप ही जाइए। लेकिन सर ने मेडम से कह दिया कि इन दोनों के सामने दीपक का ही नाम लो कि अब दीपक ही जायेगा मशीन इंस्टॉल करने के लिए। तों दोनों के दोनों खिसियानी बिल्ली कि तरह खिसियाते रह गये। कि जिसको कुछ नहीं आता है। अब उसी से मशीन इंस्टॉल करवायेंगे। तो फिर अब क्या बोले दोनों दोनों अपने अपने टुलकिट लेकर आफिस से बाहर निकल गये। फिर सर ने फेक्स मशीन को टेबल पर रखा और मुझे कहा कि इधर आओ दीपक में तुम्हें फेक्स मशीन इंस्टॉल करने कि प्रक्रिया बता रहा हूं। उसे ध्यान से देखना और समझना तो मेने हां मैं सर हिलाया फिर सर मुझे फेक्स मशीन इंस्टॉल करना और उसके फिचर्स के बारे में बताने लगे। छोटी सी प्रक्रिया थीं। तों मेने देख लिया। सीख लिया और आखिर में सर ने कहा कि जाओ मशीन लेकर चले जाओ और अगर कोई परेशानी आये तो मेडम को फोन करके पुछ लेना ठिक है। मेने हां मैं सच हिलाया फिर मेडम ने मुझे कस्टमर का एड्रेस दिया। तब में फेक्स मशीन लेकर मेडम के बताएं एड्रेस पर पहुंच गया। और मशीन इंस्टॉल करने लगा लेकिन मैं पहली बार मशीन इंस्टॉल करने गया था। तों इंस्टॉल करने वाली प्रक्रिया भुल गया। तब मेने मेडम को फोन करके पुछा तो मेडम ने बता दिया और में मशीन इंस्टॉल करके वापस आफिस में आ गया। तो सर ने कहा कि इंस्टॉल कर आएं तो मेने हां कह दिया तो सर ने कहा कि अब तो कर लोगे तो मेने हा कह दिया। फिर एक दों दिन बाद छींदवाड़ा से एक कस्टमर का फोन आया जिसने प्रोजेक्टर ओर्डर किया था। जिसके लिए फिर सर ने इन दोनों से पुछा ही नहीं कि तुम दोनों में से कोई एक चलें जाओ। सर ने सीधे मुझे प्रोजेक्टर कि प्रक्रिया समझा दीं। और ट्रेन का टिकट बुक करके मेडम को मुझे खर्च करने के पैसे देने के लिए बोल दिया। तो मेडम ने हां कह दिया। और फिर सर इतना कहकर अपने घर चलें गये। फिर मेडम ने मुझे एक प्रोजेक्टर निकाल कर दिया और मुझे अपने साथ लेकर जानें के लिए बोला और सुबह सात बजे रेलवे स्टेशन पहुंचने के लिए बोला।