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Twinflam and soulmate's epi 13

जब में मेरी चौथे सेमेस्टर कि परीक्षा चल रही थी तब मेरे गांव वाले लड़के कि छठवें सेमेस्टर कि परीक्षा चल रही थी। और जब हम दोनों कि परीक्षाएं खत्म हो गई। तब मेरे गांव वाले लड़के के पोलिटेकनिक कोर्स के तीन साल पुरे हो गए थे। परीक्षा देने के बाद कालेज में फाइनल ईयर के बच्चों को नोकरी देने वाली कंपनियां कालेज में अपना केंपस लेकर आई। लेकिन मेरे गांव के लड़के का किसी भी कंपनी में सिलेक्शन नहीं हुआं था। इसलिए फिर वह परीक्षा देकर वापस गांव लोट गया। और में इंदौर में ही रह गया। और अपने पांचवें सेमेस्टर में एडमिशन लेने कि तैयारी करने लगा। फिर थोड़े दिन बाद मेने अपने पांचवें सेमेस्टर में एडमिशन ले लिया। लेकिन अब में अपने कमरे पर अकेला रह गया। मेरे पास कोई भी पार्टनर नहीं था। और घर से भी इतने पैसे आते नहीं थें। तों कालेज में मेरा एक जुनियर था। जो अपने गांव वालों के साथ रहकर एक कंपनी में नोकरी करता था। तों मेने उससे कहा कि वह मुझे भी अपने साथ काम पर रख लें। तो उसने मुझे कंपनी में काम पर रख लिया। लेकिन काम 12 घंटे का था। इसलिए में नाईट ड्यूटी पर जाता था। लेकिन 12 घंटे ड्यूटी के बाद निंद बहुत आती थी। तों में कालेज जा नहीं पाता था। और कमरे पर आकर सो जाता था। लेकिन फिर मेने अपने जुनियर से कहा कि वह मेरे साथ कमरे पर रहेगा। तो उसने मुझे हां कह दिया। और वह अगले दिन मेरे कमरे पर रहने के लिए आ गया। फिर हम दोनों साथ रहते और साथ ही कंपनी भी जाया करते थें। लेकिन कुछ दिन अकेले रहने के बाद उस जुनियर लड़के के गांव वाले लड़के भी कमरे पर आने लगे। तो मुझे उन लड़कों का कमरें पर आना अच्छा नहीं लगता था। क्योंकि वें लड़के एक दो नहीं सात आठ लड़के एक साथ कमरे पर आते थें। और दो दो दिन तक ठहर कर जातें थें। जिससे मेरा कमरें का मेंटेनेंस बिगड़ता था। तो यह बात मुझे हजम नहीं हो रही थी। इसलिए फिर जैसे -तैसे मेने अपना पांचवां सेमेस्टर उस जुनियर लड़के के साथ निकाला और आखिर में मेने उसे कमरा ख़ाली करने के लिए बोल दिया। तों वह लड़का मेरे पास से कमरा ख़ाली करने में आनाकानी करने लगा बहाने बनाने लगा। वह लड़का आदिवासी समाज का था। और उसके साथ बहुत सारे लड़के भी थें। तो मुझे उन लड़कों से डर भी लगता था। कि ये लड़के मुझे कोई तकलीफ़ ना पहुंचा दें। इसलिए उस जुनियर लड़के को मेने शांति से कमरा ख़ाली करने के लिए बोल दिया लेकिन वह लड़का फिर भी रुम ख़ाली करने में आनाकानी कर रहा था। तो मेने जेसे तेसे करके अपना पांचवां सेमेस्टर कंम्पलिट किया और फिर उस लड़के को अपने रुम से भगा दिया। और कंपनी से काम भी छोड़ दिया। और अपने घर छुट्टी मनाने के लिए आ गया। लेकिन उस जुनियर लड़के ने मेरे पास जो गेस कि टंकी रखीं थी। उस गेस कि टंकी को रात में मेरे कमरे का ताला तोड़कर टंकी लेकर चला गया। वह गैस कि टंकी मुझे मकान मालिक ने चलाने के लिए दि थीं। तो में उस टंकी को चला रहा था। लेकिन अपने साथ रहने वाले उस जुनियर लड़के का रहन सहन मुझे समझ नहीं आया और वह अपने साथ बहुत सारे लड़को को भी लेकर आता था। इसलिए फिर मेने उस जुनियर लड़के से कमरा ख़ाली करने के लिए बोल दिया तो उस जूनियर लड़के को और उसके साथ वाले लड़के को मेरे ऊपर गुस्सा आ गया। लेकिन उसने अपना गुस्सा मुझे दिखाया नहीं और मेरा कमरा ख़ाली करके चला गया। में कन्फर्म तो नहीं हुं। लेकिन मुझे लगता है कि वह जुनियर लड़का और उसके साथ के लड़के ही मेरी गेस टंकी चुराकर ले गए होंगे। लेकिन जब मे गांव से लोटकर वापस कमरे पर आया तो मेने देखा कि टंकी गायब है और चुल्हा कमरे में ही है। तब मेने मकान मालिक से कहा तो मकान मालिक ने मुझसे कहा कि उन्हें इस बात के बारे में कुछ पता नहीं है। लेकिन उन्हें उनकी गेस टंकी वापस चाहिए या तो गेस टंकी वापस करो या फिर टंकी के पैसे दों। फिर मेने इधर उधर से पैसे इकट्ठे किए और मकान मालिक को दे दिए। उसके बाद में फिर केंटिन से खाना खाता रहा। तब तक मेरा फाइनल सेमेस्टर कि परीक्षा भी पास में आ गई थी। परीक्षा देने से पहले कालेज में नोकरी देने वाली कंपनियां अपना केंपस लेकर आई जिसमें से एक कालेज के केंपस में मेरा सिलेक्शन हो गया था। फिर छठवें सेमेस्टर कि परीक्षा खत्म होने के बाद में उस कालेज में ज्वाइनिंग के लिए गया। तों उन्होंने मुझे ज्वाइनिंग लेटर दे दिया और कालेज बता दिया। कालेज में मेरा लेब टेक्नीशियन में सिलेक्शन हुआं था। तो मेने कालेज ज्वाइन कर लिया। हर रोज कालेज जाता और अपना काम करके वापस कमरे पर आ जाता। जिस डिपार्टमेंट में मुझे लेब टेक्नीशियन में रखा गया था। उस डिपार्टमेंट में एक एच ओ डी एक लेक्चरर और एक लेब टेक्नीशियन ही था। यानी कि कालेज में इलेक्ट्रीकल ब्रांच में हम तीन लोग ही थें। एक में एक लेक्चरर और एक एच ओ डी। और ज्यादा बच्चे भी नहीं थें। चार पांच बच्चे थें। लेकिन एच ओ डी साउथ इंडियन था। और एक ब्रांच थीं। इलेक्ट्रॉनिक इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रीकल ब्रांच के एच ओ डी दोनों साऊथ इंडियन थे और दोनों ही दोस्त थें। और दोनों उसी कालेज में थें। इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट में भी दो लेब टेक्नीशियन थे। और हम सबका ओफिस दुसरी मंजिल पर था। तो दोनों ब्रांच के एच ओ डी दुसरी मंजिल पर ही बेठते थें। लेकिन लेक्चरर मेडम लेब में बेठती थीं। क्योंकि लेक्चरर मेडम को हमारे एच ओ डी सर का नेचर बिहेवियर पसंद नहीं था। तो वै अपनी लेब में बेठती थीं। लेक्चरर मेडम का नेचर बिहेवियर सिम्पल था। इसलिए उन्हें अकेला रहना पसंद था। और उनके ही जैसा में भी था। मुझे भी किसी के साथ रहना या बेठना पसंद नहीं था। इसलिए में भी मेडम के साथ ही लेब में बेठने लगा। हमारी लेब के साइड मे मेकेनिकल डिपार्टमेंट का आफिस भी था। तो थोड़े दिन बाद मेकेनिकल डिपार्टमेंट में एक लड़का लेब टेक्नीशियन के लिए ज्वाइन हुआं। और वह घुमते घुमते वो लड़का हमारी लेब में आ गया। और मुझसे बातचीत करने लगा। बातचीत करते करते हमें एक घंटा हों गया। फिर वह लड़का वापस अपने डिपार्टमेंट में चला गया। फिर वह लड़का हर रोज मेरे पास बेठने के लिए लेब में आ जाता था। ऐसे रोज रोज आने से हम दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती हो गई। फिर एक दिन वह लड़का मुझे अपने डिपार्टमेंट में लेकर गया। कि चलों तुम मेरे डिपार्टमेंट में बेठना तो मे उस लड़के के साथ उसके डिपार्टमेंट में बेठने के लिए चला गया। और उसने मुझे अपने डिपार्टमेंट के सभी लेक्चरर से मिलवाया और सबके साथ खाना खाने के लिए बेठा लिया। तब मेने उन लोगों के साथ खाना खाया। पहले में अकेले बेठकर खाना खाता था। लेकिन उस दिन उस लड़के ने मुझे अपने डिपार्टमेंट के लेक्चरर के साथ बिठाकर खाना खिलाया और आगे के लिए भी मुझे बोल दिया कि अब तुम रोज हमारे साथ ही खाना खाया करों। लेकिन मेकेनिकल डिपार्टमेंट में इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट के एच ओ डी कि पत्नी लेक्चरर थीं। वह लड़का मुझे अपने डिपार्टमेंट में लेकर जाता था। तो कभी कभी मुझे सिस्टम पर भी बेठा दिया करता था। और ऐसे में एक दिन सिस्टम पर बेठा था। तो उस मेडम ने मुझे सिस्टम पर बेठे हुए देख लिया था। जिसके बाद मेडम ने मेरे एच ओ डी से मेरी शिकायत कर दी और मुझे अपने साथ डिपार्टमेंट में बिठाने के लिए बोला। तो एच ओ डी ने फिर मुझसे कहा कि दीपक तुम कल से मेरे साथ डिपार्टमेंट में बेठोगे। लेब में नहीं बेठना है। तों मेने एच ओ डी को हां कह दिया और दुसरी मंजिल पर आफिस में बेठा रहा। लेकिन दुसरी मंजिल पर मेरा बिल्कुल भी मन नहीं लगता था। सब लोगों के होते हुए भी मैं खुद को अकेला महसूस करता था। और अब में अगर दुसरी मंजिल पर था। तो मेरा दोस्त भी अकेला ही था। क्योंकि उसको भी मेरे बीना डिपार्टमेंट में अच्छा नहीं लग रहा था। तों वह मुझे ढुंढते हुए दुसरी मंजिल पर डिपार्टमेंट में आ गया। और आकर मुझे बाहर चलने के लिए बोला तो मैंने उसे कहा कि एच ओ डी सर ने मुझे डिपार्टमेंट में ही ही रहने के लिए बोला है। में बाहर नहीं आ सकता हूं। तब उसने मुझे बाहर निकालने के लिए पुरे कालेज में यह बात फेला दी कि मेरा एच ओ डी मुझे डरा धमकाकर डिपार्टमेंट में ही रहने के लिए बोलता है। जब कालेज के बाकी लोगों को यह बात पता चली तो सभी लोगों ने मेरे एच ओ डी सर के बारे में ग़लत बोला कि दीपक सीधा-साधा भोला-भाला कमजोर है तो उसे एच ओ डी सर अपनी ताक़त और पद का डर दिखाकर उसे कंट्रोल करते हैं। पर जब एच ओ डी सर को इस बात के बारे में पता चला तो एच ओ डी सर ने मुझे डिपार्टमेंट में बेठने के लिए प्रिंसिपल सर को शिकायत कर दी। जिससे प्रिंसिपल सर ने मुझे अपने आफिस में बुलाया और मुझसे पूछा कि मुझे एच ओ डी सर के साथ डिपार्टमेंट में बेठने पर क्या दिक्कत परेशानी होती है। तो मेने सर को मना कर दिया कि मुझे कोई दिक्कत परेशानी नहीं होती है। तो प्रिंसिपल सर ने कहा कि फिर अब तुम अपने एच ओ डी सर के साथ डिपार्टमेंट में ही बेठोगे। तो मेने प्रिंसिपल सर को हां कह दिया और वापस डिपार्टमेंट में आ गया। लेकिन मुझे उस डिपार्टमेंट में बेठना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था। पर प्रिंसिपल सर के आदेश का पालन करना भी जरूरी था। इसलिए फिर में दुःखी मन से डिपार्टमेंट में बेठा रहता था। जितना में दुःखी रहता था। उतना ही दुखी वह लड़का भी रहता था। क्योंकि उसे मेरे बीना अच्छा नहीं लगता था। तो मुझे वापस लेब में लाने के लिए। और मेरे एच ओ डी को परेशान करने के लिए वह मुझे नये नये तरीके बताता रहता था। कि एच ओ डी के सामने प्याज खाकर बैठा कर या फिर डिपार्टमेंट से जब भी बाहर निकले तो एच ओ डी से परमिशन लेकर निकला कर और जिस भी काम के लिए बाहर निकले उसके लिए परमिशन मांग। जैसे कि सर मे बाथरूम कर आऊं,सर मैं चाय पी आऊं,सर मे खाना खा आऊं सर मैं पानी पी आऊं सर मैं क्लास लेने चला जाऊं सर मैं सिस्टम चला लु। इससे तेरा एच ओ डी परेशान हो जायेगा और तुझे वापस लेब में भेज देगा। लेकिन में बहुत डरपोक था मुझे अपनी नोकरी का डर रहता था। कि एच ओ डी से उलझना मतलब अपनी नोकरी से हाथ धोने जैसा है। लेकिन यह मेरी सोच थीं। कि अगर में दोस्त कि सीख को अपनाकर एच ओ डी को परेशान करुंगा तो हो सकता है कि एच ओ डी मुझे प्रिंसिपल से कहकर मुझे नोकरी से निकलवा दें। इसलिए में चुपचाप बैठा रहता था। और अपने एच ओ डी सर कि बातें सुना करता था। मेरे डर और आत्मविश्वास कि कमी थीं। इस वजह से में अपनी आजादी के लिए एक्शन नहीं लें पाता था। और एच ओ डी मेरे डर का ही फायदा उठा रहा था। और लड़ाई सिर्फ इतनी सी थीं कि में इलेक्ट्रीकल डिपार्टमेंट का होकर मेकेनिकल डिपार्टमेंट में उठता बैठता था। और सबसे बातचित करता था। मज़ाक़ मस्ती करता था। लेकिन एक मेडम से मेरी बातचित नहीं होती थीं। उस मेडम का नेचर बिहेवियर मुझे समझ नहीं आता था। तो में उनसे बातचीत भी नहीं करता था। तो उस मेडम को यह था कि अगर मेकिनिकल डिपार्टमेंट में आते जाते हों सबसे बातचित करते हों तो मुझसे भी बातचीत करों और मुझे भी नमस्कार करों। लेकिन एक तो मेडम कि भाषा मुझे समझ नहीं आती थी। दुसरा उस मेडम का नेचर बिहेवियर थोड़ा अजीब सा चेहरा गुस्से वाला था । इसलिए में उस मेडम से कोई बातचीत नहीं करता था। जिससे उस मेडम को फिर मुझ पर बहुत गुस्सा आने लगा और उन्होंने मेरे एच ओ डी से शिकायत कर दी कि इसे अपने साथ बिठाकर रखो और कहीं भी आने जाने मत दो बिल्कुल चार बजे तक अपने पास ही बिठाकर रखो। लेकिन अब इस व्यवहार को भगवान भी देख रहे थे। तो मुझे उस माहोल से बाहर निकालने के लिए कालेज में एनवल फेस्टीवल शुरू करवा दिए। जिससे मेरे दोस्त को एक बहाना मिल गया। कि वह मुझे डिपार्टमेंट से बाहर ला सके। उसने गेदरिंग करवाने वाले सर से कहा कि सर आप मुझे और दीपक को अपने साथ रख लिजिए आप हम प्रिंसिपल सर से कहिए कि मुझे दो लेब टेक्नीशियन कि जरुरत है। जो मेरे साथ बच्चों कि टीम तैयार करने में मेरी मदद करें। और दो लेब टेक्नीशियन में आप हम दोनों का नाम बता देना। फिर गेदरिंग करवाने वाले सर ने प्रिंसिपल सर के पास एक नोटीस भेजकर मेरा और मेरे दोस्त का नाम लेकर हम दोनों को ट्रेनिंग करवाने में सपोर्ट के लिए हमारा नाम दे दिया। फिर प्रिंसिपल सर ने मेरे एच ओ डी सर के पास फोन किया और मुझे गेदरिंग वाले सर के साथ बच्चों को तैयार करने में गेदरिंग वाले सर का सपोर्ट हेंड बनने के लिए मुझे रिलिव करने के लिए बोला तो एच ओ डी सर भी प्रिंसिपल सर कि बात को नजरंदाज नहीं कर पाएं और मुझे डिपार्टमेंट से रिलिव कर दिया। लेकिन एच ओ डी सर बाद में समझ गये कि दीपक को मेरे पास से आजाद करने के लिए ही यह सारे प्रपंच किए गए थे। फिर उन्होंने भी मुझे जानें दिया। फिर में जैसे ही निचे गया तो मेरा दोस्त बहुत खुश हो गया। और उसके साथ साथ में भी खुश हो गया। गेदरिंग का तों बहाना था। मेरे दोस्त का बस उसे मुझे एच ओ डी के चंगुल से आजाद करवाना था। जब में निचे आ गया तों मेरा दोस्त मुझे बच्चों के साथ वालिवाॅल खेलने के लिए बोलता था। वह भी खेलता था फिर जब हम दोनों वालिवाॅल खेलते थें तो हमारे पीछे -पीछे दुसरे टीचर भी वालिवाॅल खेलने लगें। मतलब बच्चे तो रह जातें थें। हम टीचर्स ही वालिवाॅल खेलने लग जाते थें। और लगभग एक महिने तक मेने अपने दोस्त कि वजह से खुब सारा इंजोईमेंट किया। लेकिन फिर एक महिने के बाद एनवल फेस्टीवल खत्म हो गया। तों दोस्त ने कहा कि तु अब अपनी लेब में ही बेठा कर एच ओ डी सर के पास मत जाएं। तो में फिर से अपनी लेब में ही बेठने लगा। और दोस्त के साथ यहां वहां घुमता रहता था। मतलब बच्चों को पढ़ाई करवाने के बाद हम दोनों फ्रि हो जातें थें। तो हम दोनों फिर सभी डिपार्टमेंट के लेब टेक्नीशियन एक साथ बेठकर बातचित करते रहते थे। लेकिन हम दोनों इधर उधर ही घुमा फिरा करते थे। जैसे भगवान ने मेरे दोस्त को मेरे लिए ही भेजा था। ताकि उसके रहन सहन को देखकर मेरे भीतर का डर खत्म हो और मेरे भीतर भी आत्मविश्वास जागें। लेकिन उसके साथ रहते हुए भी मेरे भीतर कोई परिवर्तन नहीं आया। लेकिन फिर वह एक साल के बाद कालेज से रिजाइन करके किसी और कालेज में चला गया। अब उसके जाने के बाद में फिर से कालेज में अकेला हों गया। और जब में कालेज में अकेला हों गया तों मेरे एच ओ डी सर को मुझे कंट्रोल में रखने का कांफिडेंस आ गया कि अब कोन बचायेगा तुझे। जिसके पीछे इतना उछल रहा था। वो तो गया। लेकिन फिर जब दोस्त कालेज छोड़कर चला गया तो मेरा भी कालेज में मन नहीं लगता था। और फिर मेरा एच ओ डी भी मुझे परेशान करने लगा था। तो मेने हिम्मत करके कालेज से रिजाइन करने का फैसला कर लिया। कि मैं इस जगह ऐसे घुट घुट कर नहीं रह सकता हूं। और मेने प्रिंसिपल सर को रिजाइन लेटर दे दिया। तो प्रिंसिपल सर समझ गये थें कि में कालेज से रिजाइन क्यु कर रहा हूं। और उन्होंने मुझसे कहा भी कि तुम अगर अपने एच ओ डी सर से डरकर रिजाइन कर रहे हो तो मत करो। में बात करुंगा तुम्हारे एच ओ डी सर से। लेकिन मेने प्रिंसिपल सर से झुठ बोल दिया कि नहीं सर मैं एच ओ डी सर के डर से रिजाइन नहीं कर रहा हूं। में कहीं और नोकरी करना चाहता हूं। अगर में एच ओ डी सर से डर कर रिजाइन कर रहा हूं तों फिर ऐसे लोग तो मुझे हर जगह मिल जायेंगे। तो क्या में नोकरीयां ही छोड़ता रहुगां। में किसी और कारण से नोकरी छोड़ रहा हूं। तो सर ने कहा कि हां यह बात हुई ना। किसी से डरकर नोकरी नहीं करना है। ठिक है जाओ। फिर में कालेज से अपने कमरे पर वापस आ गया। लेकिन मेरे पास कोई नोकरी नहीं थीं। तो अब मुझे नई नोकरी ढुंढना पड़ेगी। और नई नोकरी ढुंढने के लिए फिर में पिथमपुर गया। जहां पैदल चलते-चलते नोकरी ढुंढते -ढुंढते मुझे शाम हो गई। और में बहुत थक भी गया था। लेकिन मुझे कोई नोकरी नहीं मिलीं फिर में वापस इंदौर लोट आया। और फिर अगले दिन इंदोर ककि ही एक कंसल्टेंसी सर्विसेज में मेने फार्म भर दिया। ताकि मुझे नोकरी दिलवाने में और ढुढने में मदद कर सकें। फिर में फार्म भरकर वापस अपने कमरे पर लोट आया फिर मेने अपने दोस्त को फोन करके बताया कि मेने भी कालेज से नोकरी छोड़ दिया है। लेकिन अब मेरे पास कोई काम नहीं है। तो तु मुझे कोई काम बता। तो उसने मुझे ट्रांसमिशन लाइन डालने वाले ठेकेदार से मिलवाया जब में ठेकेदार के साथ काम पर गया तो ठेकेदार ने मुझे वायर खिंचने चिरने और खम्भे पर तार बांधने के लिए बोला लेकिन मेने ऐसा काम कभी किया नहीं था। और पहली बार ऐसा काम किया तों दिनभर काम करने के बाद मेरे दोनों हाथ कि हथेलियां छीला गई। जिससे मुझे बहुत तकलीफ़ होने लगी। तो गुस्से में आकर मेने काम पर जाने से मना ही कर दिया। फिर में वापस से कंसल्टेंसी वालों के पास गया। और उन्हें मेरे लिए नोकरी ढुंढते के लिए बोला तो कंसल्टेंसी वाले मुझे यहां वहां कि बातें सुनाकर बेवकूफ बना दें। और घर जाने के लिए बोल दें।दस पंद्रह दिनों तक कंसल्टेंसी वाले मुझे परेशान करते रहे बेवकूफ बनाते रहे। फिर मुझे बहुत गुस्सा आया तो मे फिर कंसल्टेंसी वालों को बातें सुनाने लगा। तो उन्होंने फिर मुझे एक नोकरी बताई जो सर्वीस सेंटर था। जब में सर्वीस सेंटर पर गया तो वहां के औवनर ने मेरा इंटरव्यू लिया जिसमें में पास हो गया। और अगले दिन से मुझे ड्यूटी पर आने के लिए बोल दिया।

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