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Twinflam and soulmate's epi 12

जब पुराने लड़को ने हम छः लड़को कि शिकायत छात्रावास वार्डन से कर दिया कि सर ये छः लड़के छात्रावास से बाहर घुमते रहते हैं। और हम इन्हें रोकते हैं तो हमारी बातों को नजरंदाज कर देते हैं। तों वार्डन ने हम छः लड़को से छात्रावास के पुराने लड़को कि बातों को अनसुना करने का कारण पुछा तो हम छः लड़को में एक लड़का थोड़ा लड़कियों जैसा था तो उसने वार्डन से कहा कि सर ये पुराने लड़के हमारी रेगिंग लेते हैं। और हमसे कहते हैं कि पंखे को गाली दे। और हमारे कमरे कि सफाई करों। इसलिए हम डर के मारे छात्रावास से बाहर घुमते रहते हैं। तो वार्डन ने जब यह बात सुनी तो वार्डन को गुस्सा आया कि उसकी पीठ के पीछे पुराने लड़के नये लड़को कि रेगिंग लेते हैं। तों वार्डन ने पुराने लड़को को डांट फटकार लगाई। और नये लड़को के अपार्टमेंट से दुर रहने कि हिदायत दी। बेचारे पुराने लड़के वार्डन कि बात सुनकर सीमट गये। जबकि उन्होंने हमारी रेगिंग भी नहीं ली थीं। लेकिन चाचा के लड़के पुराने लड़को से होशियार थें। तो उन्होंने वार्डन के सामने झुट बोलकर पुराने लड़को को ही फंसा दिया। लेकिन अब क्या था। पुराने लड़के हम छःहो लड़कों पर गुस्सा करते थे। क्योंकि चाचा के लड़कों ने उन्हें वार्डन के सामने झुटा साबित कर दिया था। और वार्डन ने चाचा के लड़कों कि बातों पर यकीन भी कर लिया क्योंकि उस समय छात्रावासों में रेगिंग का भी चलन था। तो वार्डन ने सोचा कि हो भी सकता है कि पुराने लड़के नये लड़को कि रेगिंग लेते हों। खैर इस घटनाक्रम के बाद पुराने लड़के हम छः लड़को को कोई भी रोक-टोक नहीं करते थे। और ना ही हमसे कोई बातचीत करते थें। और ना ही हमारी शिकायत करते थे। लेकिन चाचा के लड़कों के साथ रहकर मेरी पढ़ाई लिखाई बर्बाद हो रही थी। तो उस साल हम छः के छः लड़के फेल हो गए। और जब फेल हो गए तब हम छः हो लड़को को छात्रावास से बाहर निकाल दिया। और जब फेल हो गए तब मेरे घरवालों ने तो मुझे बहुत डांट फटकार लगाई और आगे पड़ाने से भी मना कर दिया। और चाचा चाची के बच्चों का तों कन्फर्म था कि अब उन्हें आगे कि पढ़ाई लिखाई नहीं करवाई जायेगी। क्योंकि चाचा के लड़के आगे पढ़ाई-लिखाई करना भी नहीं चाहते थे। वै तो केवल मुझे पढ़ाई लिखाई से रोकने के लिए एडमिशन लेते थे। ताकि मुझे पढ़ाई लिखाई करने से रोक सकें। लेकिन फिर मेरे घरवालों ने और मेरे भाई ने कहा कि एक बार और कोशिश करते हैं शायद इस बार यह पास हो जाएं। तो भाई के कहने पर मुझे दोबारा से स्कूल में भर्ती करवाया गया। लेकिन छात्रावास में रखने से मना कर दिया। क्योंकि फेल होने वाले छात्रों को छात्रावास में दोबारा से भर्ती नहीं करते हैं। इसलिए अब मुझे सुबह से उठकर स्कूल आना था। जब चाचा चाची को पता चला कि दीपक को दोबारा से पढ़ाई लिखाई करवा रहें हैं। तब चाचा चाची ने अपने बच्चों को भी स्कूल में भर्ती करवा दिया। ताकि वै मुझे पढ़ाई लिखाई करने से रोक सकें। और अब हम सभी बच्चों का एक बार फिर से एडमिशन हो गया। और हम सभी दोबारा से घर से स्कूल जाने लगें। कुछ दिन तक स्कूल जाने के बाद हम सभी बच्चों के माता-पिता दुसरे गांव मजदूरी करने के लिए चलें गये। और मुझे और मेरे पापा को घर पर छोड़ गये। अब मेरे माता-पिता मेरे चाचा-चाची से बातचीत नहीं करतें थे। गांव में मेरे तीन चाचा-चाची रहते थे। और उन्हीं के बच्चे मेरे साथ पढ़ाई लिखाई करतें थे। बाकी दो चाचा सरकारी टीचर थे जो दुसरे शहर में रहते थे। जिसमें से मेरे पापा से चौथे नंबर के चाचा का मकान जिस शहर में मेरी स्कूल थीं। उस शहर में उनका मकान था। जो कि खाली पढ़ा हुआ था। तो गांव वाले तीनों चाचा अपने बच्चों को उस मकान में रहने के लिए भेज दिया। लेकिन हमारी पांचों चाचाओं से बातचीत बंद थीं। तो में उस मकान में रहने जा नहीं सकता था। तो फिर?? फिर मुझे अकेले को ही घर से स्कूल के लिए जाना पड़ेगा। और अकेले स्कूल जाने में मुझे डर लगता था। क्योंकि ठंड के समय सुबह पांच बजे अंधेरा होता था। और गांव से मेन रोड के बीच में शमशान पड़ता था। जब सब साथ में स्कूल जाते थे तब डर नहीं लगता था। क्योंकि सब साथ होते थें। लेकिन अभी चाचा के लड़के छोटे चाचा के मकान में रहने के लिए चलें गये थें। तों में फिर अकेला रह गया था। तो जब में स्कूल जाने के लिए घर से निकलता था तो डर के मारे में स्कूल ही नहीं जाता था। जिसकी वजह से मेरी अटेंडेंस बहुत कम होती चली गई। जिसकी वजह से मुझे हेडमास्टर ने दुसरे स्कूल में ट्रांसफर कर दिया। मतलब परीक्षा स्कूल में ही होगी। लेकिन सर्टीफिकेट दुसरी स्कूल से बनकर आयेगा। फिर जैसे -तैसे मे परीक्षा में बेठा लेकिन चाचा के लड़कों को उम्मीद थीं कि खराब अटेंडेंस कि वजह से दीपक को परीक्षा में बेठने नहीं दिया जायेगा। लेकिन जब मे परीक्षा देने के लिए गया तो चाचा के लड़कों को बहुत गुस्सा आया कि इसको परीक्षा में कैसे बेठने दें रहें हैं। लेकिन अब अगर परीक्षा देने दें ही रहें हैं तो। हम इसे ईमानदारी से परीक्षा देने नहीं देगें हम इसे परीक्षा में नकल करने के लिए चीट लेकर जाने के लिए बोलेंगे जिससे यह पकड़ा जायेगा। और सभी लड़कों के सामने इसकी बदनामी होगी। और परीक्षा देने से भगा देंगे। और अब जब में तीसरा पेपर देने के लिए गया तो रास्ते में चाचा के लड़कों ने कहा कि दीपक हम भी चीट लेकर चलते हैं। सभी लड़के तो लेकर जाते हैं। कोई तो पकड़ता नहीं है। तो आज हम भी चीट लेकर चलते हैं। तों में चाचा के लड़के कि बातों के जाल में फस गया और एक चीट मेने भी रख लिया। लेकिन चीट में जो जवाब था। उसके अथवा में जो सवाल आया था वह मुझे आता था। तों जो सवाल मुझे आता था। मेने उसे ही किया और चीट को अपने जेब में ही पढ़ा रहने दिया। लेकिन फिर मुझे ऐसा लगा कि मुझे चिट को फेक देना चाहिए। तो मैं चीट को बाथरूम जाने के बहाने से फेंकने चला गया। तो बाथरूम में एक टीचर पहले से ही सबकी तलाशी ले रहे थे। तो उन्होंने मेरी भी तलाशी ली तो टीचर को मेरी जेब में चीट मिल गई। फिर वै मुझे कमरे में लेकर आयें। और मेरी काॅपी चेक किया तो मेरी काॅपी में चीट वाला जवाब नहीं था। लेकिन फिर भी मुझे भरी कक्षा में दो थप्पड़ खाने पड़े। क्योंकि में परीक्षा हाल में चीट लेकर गया था। लेकिन उस दिन के बाद से मेने कान पकड़ लिए कि चाहे कोई भी कहा करें कि चीट लेकर चलते हैं। भले ही फेल हो जाऊंगा लेकिन कभी भी परीक्षा हाल में चीट लेकर नहीं जाऊंगा। खैर टीचर्स ने मुझे पेपर तो देने दिए लेकिन मेरे रोल नंबर याद रखें कि यह लड़का परीक्षा हाल में चीट लेकर आया था। और नोंवी कक्षा लोकल होती है। जिसकी जांच स्कूल में ही होती थी। तो टीचर्स ने मुझे फेल करने का मन बना लिया था। लेकिन मेरे दो टीचर चाचाओं ने स्कूल के टीचर्स को कहा कि इन सभी बच्चों को एक मौका और दें दों। इसके बाद आप लोग भले ही इन्हें फेल कर देना। फिर हम सबको चाचाओं के कहने पर पास कर दिया। अब हम सभी दसवीं कक्षा में आ गए थे। लेकिन दसवीं कक्षा में हम ट्युशन लग गये थें। मेरे घरवाले मुझे सरकारी नौकरी से लगता हुआ देखना चाहते थे। इसलिए मुझे पढ़ा लिखा रहें थे। लेकिन पांचों चाचा-चाची कि सोच थीं कि बड़े भाई के बच्चों को सरकारी नौकरी से नहीं लगने देना है। तो पांचों चाचा और चार चाचीयां मुझे पढ़ाई लिखाई से रोकने के लिए अपने बच्चों को मुझे परेशान करने के लिए अपने बच्चों को सीखाती पढ़ाती रहतीं थीं। लेकिन अब में दसवीं कक्षा में था। और दसवीं कक्षा में हम सभी ट्युशन लग गये थें। और जब परीक्षा का समय आया तो हम सभी परीक्षा देने के लिए गये। लेकिन इस बार दसवीं कक्षा में चाचा चाची के बच्चे फेल हो गए और में अकेला ही दसवीं पास हुआं था। जिसकी वजह से चाचा-चाची ने अपने बच्चों को पढ़ाई-लिखाई से छुड़ाकर काम करने से लगवा दिया। और मुझे मेरे घरवालों ने आगे कि पढ़ाई लिखाई के लिए फिर से ग्यारहवीं कक्षा में बायोलॉजी विषय में एडमिशन दिलवा दिया। लेकिन बायोलॉजी विषय में फिजिक्स केमिस्ट्री मुझे समझ नहीं आती थी। तो मेरे बड़े भाई ने मुझे एक टीचर के पास ट्युशन जाने के लिए बोल दिया तो मे उस टीचर के पास ट्युशन जाने लगा। लेकिन छः महीने बाद मेरे ही गांव का एक लड़का जो कि इंदौर शहर में पोलिटेकनिक कोर्स कर रहा था। वह छुट्टी मनाने के लिए गांव में आया था। तो उसने मेरे भाई को पोलिटेकनिक कोर्स के बारे में बताया तो मेरे भाई ने मुझे भी पोलिटेकनिक कोर्स करवानें के बारे में बोला तो उस लड़के ने हां कह दिया कि कोई भी कर सकता है। लेकिन पोलिटेकनिक कोर्स में एडमिशन के पहले एक परीक्षा देनी पड़ती है। अगर आप उस परीक्षा में पास हो गये तो आपको काॅलेज मिल जायेगा। तो मेरे भाई ने पुछा कि पोलिटेकनिक कोर्स कि परीक्षा कब होती है। तब उस लड़के ने कहा कि जब पोलिटेकनिक कोर्स कि परीक्षा के फार्म आयेंगे तो में आपको बता दुंगा। तो मेरे भाई ने कहा कि ठिक है तुम मुझे याद से बता देना। तो लड़के ने हां कह दिया फिर थोड़े दिन बाद पोलिटेकनिक कोर्स के फार्म आ गये तो उस लड़के ने मेरे भाई को फोन करके बता दिया कि फार्म आ गये है तो आप जाकर फार्म भर दिजिए। फिर मेरे भाई और मेने मिलकर पोलिटेकनिक कोर्स का फार्म भर दिया। और परीक्षा कि तैयारी करने लगा। साथ ही ग्यारहवीं कि परीक्षा कि तैयारी भी कर रहा था। फिर पोलिटेकनिक कोर्स कि परीक्षा कि तारीख पास आ गई थीं तो मेरे भाई ने कहा कि पहले तु पोलिटेकनिक कोर्स कि परीक्षा दे। तों मेने पोलिटेकनिक कोर्स कि परीक्षा दी। और थोड़े दिन बाद मेने ग्यारहवीं कि परीक्षा भी दी। फिर थोड़े दिन बाद दोनों परीक्षाओं का परीणाम आया। तो मेरे पोलिटेकनिक कोर्स कि परीक्षा में एक सो बीस में से सांहठ नंबर आये थें। मतलब अच्छे नंबर आये थें। मुझे मेरी पसंद कि काॅलेज मिल सकती थी। और मेरे भाई का मन था कि मैं पोलिटेकनिक कोर्स कि पढ़ाई गांव वाले लड़के के साथ रहकर करु। यानी कि इंदौर में रहकर जब चाॅइस फिलिंग के लिए ओनलाइन कम्प्यूटर पर गये तो पहला कालेज इंदौर दुसरा खंडवा ऐसे करके सिलेक्ट कर लिए और सबमिट कर दिए। तो मुझे इंदौर कालेज मिल गया था। जो कि मेरे घरवाले भी यहीं चाहते थे। कि मुझे इंदौर कालेज ही मिलें क्योंकि मेरा भाई मुझे गांव वाले लड़के के साथ ही रहकर पढ़ाई करवाना चाहते थे। फिर जब मुझे इंदौर कालेज मिल गया तब मुझे दस्तावेज लेकर कालेज में आने के लिए एक लेटर आया। जिसे देखकर पढ़कर हम मेरे सारे दस्तावेज लेकर इंदौर चलें गये। और कालेज में एडमिशन ले लिया। में बहुत बहुत सीधा-साधा भोला-भाला मासुम कमजोर और डरपोक था। चार लोगों के बीच मुझे बोलने के लिए कह दिया जाएं तो मेरी आवाज़ ही नहीं निकलती थी। खैर अब मेरा इंदौर पोलिटेकनिक कालेज में एडमिशन हो गया था। में गांव में रहता था। तों मेरे तोर तरीके रहन सहन सबकुछ गांव वालों कि तरह थें। लेकिन जब मेरा भाई मुझे उस लड़के के पास छोड़कर वापस घर आ गया तब मेरे गांव के लड़के ने मेरे तोर तरीके रहन सहन देखा तो। उसने मुझे सबकुछ बदलने के लिए बोला। कि तुम गांव वाला स्टाईल बदल दो और मेरी तरह रहने कि आदत डाल दो। लेकिन पुराने से नये वर्ज़न में आने में थोड़ा समय लगता है। साथ ही कमरे से रहता था। तों कमरे पर सबकुछ सीखना पड़ेगा। जैसे कि खाना बनाना कपड़े धोना क्योंकि वह लड़का भी करता था। तों उसने मुझे भी करने के लिए बोला तो में जल्दी सबकुछ सीख गया। हम एक कमरे में तीन लड़के रहते थे। दो हम एक गांव के और तीसरा लड़का दुसरे गांव का था। उसके गांव के और भी लड़के उस बिल्डिंग में रहते थे। कालेज में sc,st के बच्चों को फर्स्ट सेमेस्टर में पढ़ाई के लिए स्टेशनरी मिलती थीं। तो मेरे गांव के लड़के को और दुसरे लड़के को भी स्टेशनरी मिली हुई थी। साथ ही फर्स्ट सेमेस्टर सभी ब्रांच के बच्चों को समान विषय पड़ने पड़ते थे। तो मेरे दोनों पार्टनर ने फर्स्ट सेमेस्टर कि पढ़ाई करके पास कर लिया था। और अभी फर्स्ट सेमेस्टर में मुझे भी सेम विषय मिलें थें। तो दोनों पार्टनर ने मुझे अपनी स्टेशनरी मुझे दे दिया। और साथ ही मुझे फर्स्ट सेमेस्टर कि पढ़ाई भी करवाते थे। और अब जब में इन लोगों के साथ रह रहा था तो मुझे फिर वै अपने शौक भी बताएंगे। जैसे कि एक रविवार कि शाम किचन में चिकन बनाया गया। साथ ही बियर कि कुछ बोतलें भी लाई गई। और मुझे भी दीं गई। शुरुआत में तों मेने पीने से मना कर दिया। लेकिन फिर दोनों पार्टनर्स के फोर्स करने पर मेने भी बियर पी लिया। और अब हर वीकएंड पर दोनों पार्टनर चिकन मटन लेकर आते और साथ ही बियर कि कुछ बोतलें भी लेकर आते थें। लेकिन फिर थोड़े दिन बाद परीक्षा भी नजदिक आ गई। जब में पेपर देने गया तो सारे पैपर खतम होने के बाद परीक्षा का परीणाम आया तो में एक विषम में फेल हो गया था। लेकिन मेने अपने भाई को झुट बोल दिया कि मैं सभी विषयों में पास हो गया। अब कुछ दिन बाद फिर दुसरे सेमेस्टर कि पढ़ाई शुरू हो गई। दुसरे सेमेस्टर में जाने के बाद मुझे भी स्टेशनरी मिल गयी। फिर मे दुसरे सेमेस्टर के पांच विषयों कि और एक फस्ट सेमेस्टर के विषय कि तैयारी करने लगा। फिर जल्दी ही दुसरे सेमेस्टर कि परीक्षा भी पास में आ गई। लेकिन मेरी परीक्षा के पहले मेरे दोनों पार्टनर्स कि परीक्षा शुरू हो गई। तो में दोनों का खाना पानी करने के लिए कमरे पर ही रुक गया। घर नहीं गया। फिर जब मेरे दोनों पार्टनर्स कि परीक्षा के एक दो विषय रह गये थें। तब मेरी भी परीक्षा शुरू हो गई। फिर जब दोनों पार्टनर कि परीक्षा खत्म हो गई। तब मेरे गांव का लड़का छुट्टी मनाने के लिए अपने घर आ गया। इस बात पर मुझे अपने गांव के लड़के पर बहुत गुस्सा आया। लेकिन में उसे कुछ नहीं बोल पाया। और में पैपर देता रहा। और पैपर देने के बाद घर छुट्टी मनाने के लिए आया। जब में घर आया तो मुझे अपने गांव कि एक लड़की से प्यार हो गया। लेकिन फिर जब मेरी छुट्टियां खतम हुई तों में वापस इंदौर लोट गया। इस बीच उस लड़की और मेरी कोई भी बातचीत नहीं हुई। जब बातचीत नहीं हुई तो उस लड़की ने किसी और लड़के से रिश्ता जोड़ लिया। उधर मेरा तीसरा सेमेस्टर चल रहा था। और बीच में एक बार के लिए में उस लड़की से मिलने कि इच्छा से घर आया तो मुझे पता चला कि उस लड़की ने तो किसी और लड़के से रिश्ता बना लिया है। यह सुनकर और देखकर मेरा दिल टुट गया। और फिर एक दों दिन घर पर रहने के बाद में वापस इंदौर लोट गया। फिर तीसरे सेमेस्टर कि परीक्षा देने के बाद में फिर से छुट्टी मनाने के लिए गांव आया। तब मुझे फिर से एक और लड़की से प्यार हो गया। और उस लड़की से एक दो दिन बातचित करने के बाद में दोबारा से इंदौर लोट गया। और चौथे सेमेस्टर में एडमिशन ले लिया भगवान ने मुझे धरती पर बहुत से हुनर देकर भेजा था। और मेरे इन हुनर्स के बारे में मेरे चाचा-चाची को पता चल गया था। तों मेरे गांव वालीं तीनों चाचीयों को मुझसे हमेशा डर लगता था कि अगर में ब्रम्हचर्य का पालन करता रहा तों फिर मुझे वह सफलता प्राप्त करने से कोई भी नहीं रोक सकता है। इसलिए मेरी गांव वालीं तीनों चाचीयां में जब भी गांव छुट्टियां मनाने के लिए आता था। तब मेरी गांव वालीं चाचीयां अपने घर पर कोई ना कोई कार्यक्रम करवाती थी। जिसमें मुझे खाने के लिए बुलाया जाता था। मेरी तीनों चाचीयां मेरे माता-पिता को दुःख लकलीफ पहुंचाने के लिए हमारे ऊपर कुछ ना कुछ करवातीं रहतीं थीं। और हमारे ऊपर कुछ करवाने के लिए वै अपने घर कार्यक्रम आयोजित करके हमें खाने का बुलावा भेजकर हमारे खाने में तांत्रिक क्रियाएं करवा दिया करतीं थीं। जिसका असर मेरे दिमाग पर होता था। जिससे मेरा मन पढ़ाई से हटकर प्यार मोहब्बत करने में लगता था। में लड़कियों के बारे में सोचता था। जिससे मेरी ऊर्जा नष्ट होती थीं। और अगर आपकी ऊर्जा नष्ट होती है। तो आप मानसिक रूप से कमजोर रहते हैं। आपका आत्मविश्वास कमजोर रहता है। मुझे मानसिक रूप से कमजोर करने के लिए मेरी चाचीयां इस तरह के हथकंडे अपनाती थीं। लेकिन में कभी उनकी चालाकियों को समझ नहीं पाया। क्योंकि मेरी आत्मा अवेकन नहीं थीं। और ना ही हम भगवान को पुजते थे मानते थे। हम भगवान को तब याद करते थे जब हम बहुत बिमार होते हैं। या जब हमारा बहुत बड़ा नुक़सान होता है। तब हम भगवान को याद करते हैं। इससे पहले तो हम कभी भी भगवान को याद ही नहीं करतें हैं। और में, और मेरे घरवाले भी भगवान को तभी याद करते थे। जब हम बिमार होते थें। या बहुत बड़े नुकसान मे फसते थें। कभी कभार भगवान को याद करने वाले को भगवान लोगों कि चालाकियों के बारे में बताते भी नहीं है। कि लोग तुम्हें निचे गिराने के लिए चालाकियां चल रहे हैं। खैर अभी मेने चौथे सेमेस्टर में एडमिशन लिया और गांव वाली लड़की के बारे में सोचकर अपनी पढ़ाई करने लगा। लेकिन चाचीयों का मेरे ऊपर किया हुआ टोटका मेरे दिमाग पर असर करने लगा। और मेरा मन पढ़ाई में ना लगकर गांव वालीं लड़की में लगे। वह लड़की ही मेरे दिमाग में घुमे। कुछ दिन निकालने के बाद में उस लड़की से मिलने के लिए वापस गांव में आया और उस लड़की से मिलने कि चाहत कि तो वह लड़की मान गई और मुझसे मिलने के लिए आ गई। लेकिन मेरे दिमाग पर जो टोटका किया गया था। वह मेरे दिमाग पर हावी था। जिसकी वजह से मेने उस लड़की के साथ कुछ ऐसी हरकतें कर दी जिससे वह लड़की डर गई और मेरे पास से वापस भागकर लोट गई। में उस लड़की के सामने जैसे वहशी बन गया था। जिसके बाद उस लड़की ने मुझसे रिश्ता ही तोड़ दिया। और किसी और लड़के से रिश्ता जोड़ लिया। इसके बाद में वापस इंदौर लोट गया। मेरी इस हरकत कि वजह से मेरा दुसरा रिश्ता भी टुट गया। लेकिन में खुद को ग़लत ना मानकर दोनों लड़कियों को धोखेबाज ठहरा रहा था। लेकिन मेने भी जो किया वह जानबूझकर नहीं किया। अगर मेरे दिमाग को किसी टोटके से उत्तेजित ना किया होता तो में भी ऐसा बिलकुल नहीं करता। लेकिन उस लड़की को तो यही लगा कि मैं बहुत उतावला और वहशी जानवर कि तरह हरकतें कर रहा हूं। इसलिए फिर उस लड़की ने मुझसे रिश्ता तोड़कर किसी दुसरे लड़के से रिश्ता जोड़ लिया। जब मुझे पता चला तो मेने उस लड़की को धोखेबाज समझ कर छोड़ दिया। फिर में वापस इंदौर आकर रहने लगा। फिर चौथे सेमेस्टर कि परीक्षा पास आ गई। तब मेने चौथे सेमेस्टर कि परीक्षा दी। और इस बार में घर नहीं आया। और इंदौर में ही रहा। मेरे गांव वाले लड़के का आखिरी सेमेस्टर था। तो आखिर सेमेस्टर कि परीक्षा देने के बाद वह गांव लोट गया। और अब में फाइनल ईयर में रह गया था। और अपने गांव वाले लड़के के बीना इंदौर में था। तो मेने फिर पांचवें सेमेस्टर में एडमिशन लिया। लेकिन अभी भी कुछ सीनियर लड़के इंदौर में ही रह रहे थे। नोकरी कि तलाश में जिसमें से एक लड़का मेरे गांव का भी था। जिसका केंपस सिलेक्शन नहीं हुआं था। तो वह फाइनल सेमेस्टर कि परीक्षा देने के बाद गांव चला गया था कुछ दिनों के लिए। फिर वह कुछ दिन गांव में रहने के बाद वापस इंदौर लोट आया था। और इंदौर में रहकर नोकरी ढुढने लगा।

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