फिर sir और मैडम ने मुझे बता दिया था कि सुबह सात बजे रेलवे स्टेशन पहुंच जाना आठ बजे तुम्हारी ट्रेन है. मेने हां कहकर office से फेक्स मशीन लेकर कमरे पर पहुंच गया. फिर रातभर अपने कमरे पर रहा और सुबह- सुबह साइकिल से रेलवे स्टेशन पहुंच गया. साइकिल को साइकिल स्टेंड पर पार्क करके ट्रेन का इंतजार करने लगा फिर आधे घंटे बाद ट्रेन आ गई, फिर मैं ट्रेन में बेठ गया. और फिर थोडी देर बाद ट्रेन चल पडी. में अपनी अभी तक कि जिंदगी में कभी ट्रेन में सफर नहीं किया था. लेकिन sir के office में काम करने पर sir ने मुझे ट्रेन में बेठने कि चाहत भी पुरी कर दी. में पहली बार ट्रेन में बैठा था तो मैं रास्ते भर खिडकी से देखता रहा. फिर ट्रेन दोपहर के तीन बजे पहुंची थी. फिर में ट्रेन से उतरकर रेलवे स्टेशन से बाहर निकल कर आया और मेडम के दिए हुए पते को तलाशने लगा एक दो लोगों से पुछा तो उन्होंने बताया कि यही पास में ही है. तो पास में है करके में पैदल ही पता ढुंढते- ढुंढते चला गया. फिर दो- तीन किलोमीटर चलने के बाद मेडम के बताएं हुए एड्रेस पर पहुंच गया. फिर मैंने वहां पहुंच कर एक होटल पर चाय पी नाश्ता किया. और फारेस्ट डिपार्टमेंट में पहुंच गया. फिर मैंने office में जाकर एक प्युन को अपने office का नाम बताया और कहा कि मैं इंदौर से आया हूं. यह फेक्स मशीन इंस्टाल करने के लिए. तो प्युन ने अंदर office में फारेस्ट आफिसर से पुछा कि sir इंदौर फेक्स मशीन के लिए आर्डर किया था. तो आफिसर ने हां कहा तो प्युन ने कहा कि इंदौर कंपनी का स्टाफ फेक्स मशीन लेकर आया है. तो क्या उसे मशीन रिसिव कर लु तो आफिसर ने कहा कि उसे अंदर ले आओ फिर प्युन मुझे अंदर आफिसर के पास लेकर गया. और office में आफिसर के पास छोडकर वापस बाहर चला गया. तब आफिसर ने मुझे कहा कि भईया इस मशीन को इंस्टाल करके मुझे डेमों देकर जाना. मेने जी sir कहते हुए मशीन को इंस्टाल करना शुरू कर दिया. जब मशीन इंस्टाल हो गई तब मैंने sir को डेमों दिया. परफेक्ट नहीं था पर वै आफिसर समझ गये कि लडका नया है. और मेने जो भी डेमों दिया उसमें आफिसर सेटीस्फाइड हो गये. क्योंकि आफिसर को office से मेडम ने भी कह दिया था कि पुराने लोग फ्री नहीं है. एक कि तबियत खराब है. और शहर कि कंम्पलेन देखने वाला फिर कोई नहीं है इसलिए नये लडके को भेजा है तो आप थोडा सा लडके के साथ कोपरेट करना. फिर मैंने मशीन इंस्टाल करने और डेमों देने के बाद मेडम ने जो बिल दिया था. उस पर डिपार्टमेंट की सील लगवाकर वापस रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया. मशीन इंस्टाल करने में मुझे एक घंटा लगा. तो मैं फिर से रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया. क्योंकि मेडम ने कहा था कि शाम के सात बजे तुम्हारी ट्रेन है. जब मैं मशीन इंस्टाल कर दिया उसके बाद मेने office में मेडम को फोन कर दिया कि मेडम मेने मशीन इंस्टाल कर दिया. अब मैं क्या करूं तो मेडम ने कहा कि खाना खा लिया तुने तो मैंने मेडम को कहा कि नहीं तो मेडम ने कहा कि पहले खाना खा लो और फिर रेलवे स्टेशन पहुंच जाना. तो मैंने कहा कि ठीक है मेडम और फिर में एक होटल में चला गया और एक थाली आर्डर कर दिया. फिर मैंने होटल में खाना खाया और फिर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करने लगा. ट्रेन आने में दो घंटे थें तो मैं छिंदवाडा के बाजार में घुमने फिरने लगा. घुमते- फिरते मुझे एक घंटा हो गया. फिर ट्रेन आने में अभी भी एक घंटा और बचा था. तो मैं दोबारा से यहां वहां भटक कर समय काटने लगा फिर थोडी देर बाद ट्रेन आ गयी फिर मैं ट्रैन में बैठ गया और फिर थोडी देर बाद ट्रेन चल पडी. फिर मेरे पास office में काम करने वाले जो मेरी हम उम्र का लडका था उसका फोन आया तो उसने मुझसे बात कि कि मेने मशीन इंस्टाल कर दिया. मेने कहा कि हां कर दिया. फिर बोला कि कोई परेशानी तो नहीं हुई, तो मेने कहा कि नहीं हुई, फिर बोला कि अभी कहां है. तो मेने कहा कि मैं तो ट्रेन में बैठा हुं. तो लडके ने कहा कि वापस आ रहें हों तो मेने कहा कि हां. तो लडके ने कहा कि क्युं आ रहें हों. वहीं रुक जाते कल सुबह आतें. तो मेने कहा कि मेरा काम खतम हो गया तो मैं रात- भर छिंदवाडा में रुककर क्या करुंगा. मेरा काम खतम हो गया तो मैंने मेडम से पुछा था कि मैं अब क्या करूं तो मेडम ने कहा कि वापस आ जाओ. तो मैं फिर ट्रेन में बैठ गया. तो लडके ने कहा कि मेडम को भी बता दिया काम खतम होने के बाद. तो मैंने कहा कि क्युं नहीं बताना था मेडम को तो बोलता है कि मेडम को क्या बताया करता है. बाहर जाओ तो मेडम को कुछ नहीं बताना. पर चल अब बता दिया तो बता दिया लेकिन अब आगे से ध्यान रखना. अब यह बताओं मेडम ने खर्च करने के लिए तुम्हें पैसे कितने दिए थे. तो मैंने उसे पुरे पैसों के बारे में बताने के बजाय एक हजार रुपए के बारे में बता दिया. तो लडके ने कहा कि भी तो तुम घर जाओगे लेकिन जब सुबह office आओ तो पहले मुझसे मिलकर office जाना ठिक है. तो मेने कहा कि हां ठीक है. फिर लडके ने फोन रख दिया. फिर मैं इंदौर रात के ग्यारह बजे उतर गया और पार्किंग से अपनी साइकिल लेकर कमरे के लिए निकल पडा. फिर कमरे पर जाकर सो गया. फिर अगले दिन सोकर उठा और नहा धोकर office के लिए निकल पडा. Office जाने के पहले मेने उस लडके को फोन करके बताया कि मैं office पहुंच गया हुं. तो लडके ने कहा कि अभी office के बाहर ही रुको तो मैं रुक गया. फिर वह लडका आया और हम दोनों चाय की दुकान पर गये और चाय लेकर छिंदवाडा की बातचीत करने लगे. फिर लडके ने कहा कि मेडम ने तुम्हें पैसे कितने दिए थे. तो मेने एक हजार रुपए बता दिए फिर लडके ने कहा कि जब तुम ट्रेन में बैठे थे तो कुछ खाया पिया था. तो मेने कहा कि हां एक चाय और पोहे खाये थे. फिर उसके बाद फिर मेने कहा कि जब छिंदवाडा स्टेशन पर उतरा था. तब एक चाय पी थी. फिर लडके ने कहा कि जहां तुम मशीन इंस्टाल करने गये थे. वहां पैदल गये थे कि रिक्सा से गये थे. तो मैंने कहा कि मैं पैदल गया था. तो लडके ने मुझे एक लिस्ट बनाकर दि जिसमें एक हजार रुपए का खर्च लिखा था. और कहा कि इसे रख लो मेडम अभी तुमसे हिसाब पुछेगी कि एक हजार रुपए का हिसाब बताओं. तो यह चिट्ठी मेडम को दे देना. तो मैंने वह चिट्ठी अपने पास रख लिया और office में जाने लगा पर रास्ते में मेने एक दुसरी चिट्ठी बनाई जिसमें सिर्फ पांच सौ रुपए का खर्च बनाया. जब मेडम ने मुझसे दो हजार रुपए का हिसाब पुछा तो मेने मेडम को बनाई हुई चिट्ठी दिखा दि और बाकी पंद्रह सो रुपए मेडम को वापस कर दिए. तो मेडम का दिमाग घुम गया. कि दो हजार रुपए में से पंद्रह सो रुपए वापस आ गए. यह तो चमत्कार हो गया था. तो मेडम ने sir को मेरी रिपोर्ट भेज दिया कि sir दीपक वापस आ गया है. और दीपक पंद्रह सो रुपए वापस लेकर आया है. तो sir ने कहा कि वाह यार पंद्रह सो रुपए बच गए. इससे पहले कभी छिंदवाडा से इतने पैसे वापस नहीं आये है. और इस बार पंद्रह सो रुपए वापस आ गए है. आप सोच रहे होंगे कि रिजर्वेशन तो दोनों तरफ का office से ही करवा दिया गया था. तो फिर पांच सौ रुपए कहां खर्च किए मेने. तो पांच सौ रुपए मेने अपने पास रख लिए थे. वह भी इसलिए क्योंकि जब में छिंदवाडा स्टेशन से बाहर निकला तो मेने एक व्यक्ति से फारेस्ट आफिस का पता पुछा तो लोगों ने कहा कि बस पास में ही है. तो मेने सोचा कि मैं पैदल ही चला जाता हूं. जब मैं पैदल चलते- चलते तीन किलोमीटर चला गया तब जाकर आफिस पहुंचा. फिर आफिस में मशीन इंस्टाल करने के बाद में वापस रेलवे स्टेशन आया तो मैंने एक रिक्सा वाले से उसी आफिस जाने तक का किराया पुछा तो उसने मुझे तीन सौ रुपए बताएं. तीन सौ तो मैं नहीं देता लेकिन दो सौ रुपए तो रिक्से वाला जरुर लेता ही सही. तो अब दो सौ रुपए के हिसाब से आने जाने का चार सौ रुपए होते हैं. क्योंकि में पास का सोचकर पैदल चला गया था. लेकिन वह तीन किलोमीटर दूर निकला तो मेने इतनी दुर चलकर जाने की मेहनत रख लिया और बाकी सो रुपए पचास रुपए की थाली और चाय नाश्ते का मिलाकर सो रुपए बनते थे. इस हिसाब से मेने पांच सौ रुपए अपने पास रख लिए. मेने अपनी मेहनत के ही रखें थे. लेकिन अब मेरे पंद्रह सो रुपए वापस देने से office में हडकंप मच गया. क्योंकि मेरे इतने पैसे देने से इन दोनों की बैइमानी असलीयत आफिस में उजागर हो गई थी. क्योंकि यह दोनों जब भी बाहर जाते थे तो जो पैसे इन्हें खर्च के मिलते थे. यह उन पैसों का एक लंबा चौडा बिल बनाकर मेडम को थमा दिया करते थे. इन दोनों को जब भी बाहर भेजा जाता था. तो यह लोग साथ में टिफिन लेकर जाते थे. और वीआईपी होटल के थाली का लिस्ट में नाम लिखते थे. रात रुकते थे लाॅज में और लिस्ट में नाम लिखते थे वीआइपी होटल का यह लोग दो हजार का बिल बनाकर लाते थे. और मेडम को थमा देते थे. अब सोचो यह दोनों कब से इस आफिस में काम कर रहे थे. लगभग छः सात साल से और दोनों छः सात सालों से पहले sir के पिताजी आफिस में बैठते थे. लेकिन उनकी उमर होने की वजह से उन्होंने अपने बेटे को आफिस सम्भालने के लिए बोल दिया था. यह दोनों पेट्रोल में भी पैसा कमा रहे थे. सात आठ हजार रुपए का पैट्रोल बताते थे. मतलब अगर मैं इस आफिस में काम करने नहीं आता तो इन दोनों की असलियत कभी sir और मैडम को कभी पता ही नहीं चलती कि यह दोनों sir और sir के पिता के साथ बैइमानी और छल करते आ रहे थे. दोनों ने चाल तो चली थी कि दीपक बाहर जायेगा तो काम बिगाड कर आयेगा. लेकिन मेने तो काम अच्छे से कर दिया था. तो दोनों को बडा ताज्जुब हुआ कि दीपक ने बीना किसी शिकायत के बीना किसी परेशानी के बाहर जाकर मशीन इंस्टाल कैसे कर दी. हमसे भी मदद नहीं मांगी. हम दोनों तो सोच रहे थे कि दीपक हमारे पास फोन करेगा. लेकिन इसने तो हमसे बीना पुछे मशीन इंस्टाल भी कर दि और एक ही दिन में इंदौर वापस भी आ गया. इधर sir और मैडम इन दोनों के आज तक के बाहर जाने के हिसाब किताब मिला रहे थे कि आज तक इन दोनों ने office के पैसों में कितना हेर फेर किया है. sir ने अपने पिताजी को भी इन दोनों की बैइमानी के बारे में बताया तो sir के पिताजी का माथा भी ठनका. कि हां यार अगर दीपक आफिस में नहीं आता तो हमें इन दोनों की बैइमानी के बारे में कभी पता ही नहीं चलता. तो अब क्या किया जाए. हम इन दोनों को एक साथ भगा भी नहीं सकते हैं. अगर भगा दिया तो नये लडके कहां से लाएंगे और अगर नये लडके भी आ गये लेकिन अगर काम समझ नहीं आया और भाग गये तब क्या करेंगे और दीपक अभी इतना परफेक्ट हुआं नहीं है. और उसके पास बाइक भी नहीं है. तो अभी हम इन दोनों को आफिस निकाल नहीं सकते हैं. तो sir के पिताजी ने कहा कि दीपक को जल्दी से जल्दी आफिस के सारे काम सिखाओ. तुम दीपक पर ज्यादा ध्यान देते रहो इन दोनों पर अब ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं है. और हों सके तो बाहर अब दीपक को ही भेजा करों. फिर जब मैं छिंदवाडा से वापस आ गया तो. आफिस में फोन बहुत सारे आ गये थे तो मेडम ने कहा कि दीपक फोन बहुत सारे आ गये है. उन्हें देख कर बता दो कि Kiss फोन में क्या प्रोब्लम है. हों सके तो फोन पर प्रोब्लम का टेग लगा देना. मेने कहा ठिक है मेडम फिर मैं फोन्स को चैक करने लगा. और जिसमें जो प्रोब्लम होती उस पर प्रोब्लम का टेग लगा देता. जिस फोन में बाहरी प्रोब्लम होती उसे रिपेयर कर देता था. और जिस फोन में अंदरुनी प्रोब्लम होती अंदरुनी प्रोब्लम मतलब सर्किट कि प्रोब्लम उसे अलग रख देता था. बीस फोन्स में से पंद्रह फोन रिपेयर किए और पांच फोन्स में सर्किट कि प्रोब्लम थी तो उन्हें मेडम को दिखा कर मार्केट ले गया. और मोबाइल रिपेयरिंग वालों को देकर वापस आफिस में आ गया. फिर मेडम से पुछा कि मुझे कहा जाना है तो मेडम ने कहा कि हां तुम्हें दो तीन जगह चैक लेने जाना है. तो मैंने कहा कि ठीक है मेडम फिर मेडम ने मुझे एड्रेस दिए तो मैं उन एड्रेस पर चैक लेने पहुंच गया. सभी जगहों से चैक लिए और वापस आफिस कि तरफ आ गया. जब आफिस में आया तो मेडम को चैक दे दिए. तो मेडम ने चैक नंबर लिखकर मुझे सारे चैक वापस दिए और बेंक जाकर जमा करने को कहा मैंने मेडम से चैक लिए और बेंक पहुंच गया. चैक जमा किए और बाहर वापस आ गया. बार- बार बेंक जाता था तो बेंक वाले भी पहचानने लगे थे. इसलिए मुझे जल्दी फ्री कर दिया करते थे. फिर में बेंक के बाहर चाय वाले के पास चाय पीने के लिए बैठ जाता था. फिर चाय पीने के बाद वापस आफिस चला जाता था. अगर बाहर कि कोई कंम्पलेन होती तो मेडम मुझे भेज दिया करतीं थीं. लेकिन अगर बाहर कि कंम्पलेन नहीं होती थी तो फिर आफिस में जो भी रिपेयर करने को आता था मैं उसे रिपेयर करने लग जाता था. मेरा आफिस में रहना दोनों को पसंद नहीं था. वै दोनों मुझसे जलन रखतें थे. कि कल का आया हुआ लडका आफिस में बेठकर आराम करते हुए काम करता है. और हम सात- आठ साल से काम करने वाले दिनभर धूप में और बाहर काम करते हैं. उन दोनों को तो ऐसा लगता था जैसे कि मैं आफिस में आराम करने के लिए रहता हूं. और वै दोनों आफिस में रहकर देख चुके हैं. कि आफिस में कितना काम करता हूं मैं, फोन्स, प्रिंटर मशीन को रिपेयर करना फिर चैक लेने जाना फिर चैको को बेंक में जमा करने जाना. और अगर कोई बाहर कि कंम्पलेन आ जाये तो बाहर भी जाता था. कंम्पलेन देखने पर वै दोनों मुझे sir के सामने बेइमान, कामचोर और मक्कार साबित करना चाहते थे. पर sir और मैडम दोनों उनकी बातों पर भरोसा नहीं करते थे. फिर एक दिन हम सभी बैठे हुए थे. sir कहीं बाहर गये हुए थे. तब दोनों आपस में बातचीत करने लगे कि तुमसे पहले यहां एक लडका आया था. काम करने के लिए तो उसने यहां सिर्फ छः महीने काम किया और आफिस का सारा काम सीख गया. तो मैंने कहा कि अब कहां है वह लडका तो दोनों ने कहा कि अब वह दुसरे सर्विस सेंटर पर काम करता है. तो मैंने कहा कि यहां से क्युं छोड दिया. तो दोनों ने कहा कि उसने sir को कहां की मेरी सेलरी बडाओ तो मैंने कहा कि फिर sir ने सेलरी बढाई तो दोनों ने कहा कि नहीं बडाई, मेने कहा कि फिर तो दोनों ने कहा कि लडके ने sir को कहा कि मैं इतनी कम सेलरी पर काम नहीं करुंगा. तो sir ने कहा कि अभी काम करों फिर तुम्हारी सेलरी बडा देंगे. तो उस लडके ने जब भी बाहर कंम्पलेन देखने जाता था तो वह जिस भी आफिस में जाता था वहां वेकेंसी के बारे में पुछ लिया करता था. फिर एक दिन सर्विस सेंटर पर पुछ लिया. तो उन्होंने उसे पंद्रह हजार रुपए प्लस पैट्रोल सेलरी का बोल दिया. तो उसने तो sir को फोन पर ही बोल दिया कि मैं अब काम पर नहीं आऊंगा. और sir को ऐसा बोलकर फिर वापस नहीं आया. अब यह दोनों मुझे आफिस से भगाने की योजना बना रहे थे कि हम दीपक के सामने इस तरह की बातें करेंगे तो दीपक भी sir से सेलरी बढाने के बारे में बोलेगा. क्योंकि दीपक भी तीन महीने में पुरे आफिस का काम सीख चुका है. और दीपक तो हमसे भी ज्यादा काम सीख चुका है. तो यह sir से सेलरी कि बात जरूर करेगा. और sir इसकी सेलरी बढाने से रहें. लेकिन अगर sir ने दीपक कि सेलरी बडा दी तो दीपक के साथ हमारी भी तनख्वाह बड जायेगी. और अगर sir ने दीपक कि सेलरी नहीं बडाई तो दीपक भी कहीं ना कहीं दुसरे आफिस में नोकरी के लिए पुछेगा तो जरूर और अगर पुछेगा तो यह फिर पक्का है कि फिर दीपक भी यहां से काम छोडकर भाग जायेगा. और फिर वापस से हमारी ही सत्ता कायम रहेगी. बहुत भरोसा है दीपक पर मेडम और sir को लेकिन मेने अभी किसी भी आफिस में नोकरी के लिए नहीं पुछा था. और एक बार और मुझे बाहर भेजने के लिए sir ने बोल दिया. कल दीपक तुम्हें झाबुआ जाना है प्रोजेक्टर इंस्टाल करने के लिए चले जाओगे ना तो मेने हां कह दिया. पर sir से कहा कि मुझे प्रोजेक्टर इंस्टाल करने के लिए डेमों बता देना. तो sir ने कहा कि हां में तुम्हें डेमों देना सीखा दुंगा. फिर sir जब मुझे प्रोजेक्टर का डेमो सिखा रहे थे तो यह दोनों भी आफिस में ही थें. तो sir के साथ- साथ यह दोनों भी कुछ ना कुछ बोलने लग जाते. क्योंकि अब sir इन दोनों की बैइमानी इनकी असलियत sir को पता चल चुकी थी. कि यह दोनों चौरी करते हैं. इसलिए इस बार sir ने उन दोनों को कुछ बोला ही नहीं कि तुम दोनों बाहर जाओगे. सर ने सीधा मुझे ही बोला कि दीपक तुम्हें कल झाबुआ जाना है. प्रोजेक्टर इंस्टाल करने के लिए. फिर मुझे प्रोजेक्टर का डेमो देने के बाद sir मेडम को मुझे खर्च के पैसे देने का बोलकर बाहर चले गए. और मुझे भी कह दिया कि शाम को घर जाते समय मेडम से पैसे ले जाना. फिर थोडी देर मेने आफिस में काम किया और शाम के समय मेडम से पंद्रह सो रुपए दिए और प्रोजेक्टर लेकर घर चला गया. फिर सुबह- सुबह बस स्टैंड पहुंच गया. फिर धार- झाबुआ जाने वाली बस में बैठ गया. फिर दस पंद्रह मिनट बाद बस चलना शुरू हो गई. मेने प्रोजेक्टर अपने पास रखा और थोडी देर के लिए आंखें बंद करके सो गया. दस ग्यारह बजे तक बस धार पहुंच गई. धार में कुछ स्ट्राइक चल रही थी. तो बस को आधे घंटे तक रोक कर रखा फिर आधे घंटे बाद बस को जाने दिया. फिर बारह बजे बस झाबुआ स्टेशन पर पहुंच गई, में बस से नीचे उतरा और मेडम के बताएं हुए एड्रेस के बारे में लोगों से पुछने लगा. एक दो लोगों से पुछने पर पता चला कि वह आफिस स्टेशन से पांच सात किलोमीटर दूर है. तो मेने कहा इतनी दूर पैदल नहीं जा सकता हूं. तब मैंने रिक्से वाले से लोकेशन पर जाने के लिए पैसों कि बातचीत की और रिक्से में बैठकर उस पते के लिए निकल पडा. फिर लोकेशन पर पहुंचने के बाद रिक्से वाले को उसके पैसे दिए और आफिस में जाकर एक प्युन को अपना परिचय देते हुए कहा कि मैं इंदौर से आफिस का नाम बताते हुए कहा कि मैं वहां से आया हूं. और आपके आफिस से एक प्रोजेक्टर परचेस किया गया था. बहीं प्रोजेक्टर इंस्टाल करने आया हूं. और मेडम ने आफिस से जो रिसिप्ट दिया था. वह रिसिप्ट प्युन को देते हुए बताया. तो प्युन ने मुझे बाहर कुर्सी पर बैठाया और अंदर आफिस में फारेस्ट आफिसर से पुछने चला गया. फिर आफिसर से पुछने के बाद प्युन वापस आकर मुझे साथ चलने के लिए बोला तो मैं प्युन के साथ चला गया. फिर प्युन मुझे कान्फ्रेंस हाल में लेकर गया. कहां की अब आप यहां प्रोजेक्टर इंस्टाल कर दिजिए. अगर आपको किसी भी चीज की जरूरत पडे तो मैं बाहर बैठा हुं मुझे बता दिजिएगा. मेने उन्हें धन्यवाद कहा और अपना काम करने लगा. पहले ड्रिल मशीन से छत में चार होल किए फिर प्रोजेक्टर का बेस इंस्टाल किया फिर उसमें दो फिट कि राॅड लगा दिया और उस राॅड के नीचे लगी चौकोर प्लेट पर प्रोजेक्टर को इंस्टाल कर दिया. फिर अपने मोबाइल से कनेक्ट करने के बाद बोर्ड पर एक दो विडियो चलाकर देखें. जब सबकुछ ठीक लगा तो मैंने प्युन को आवाज लगा दी. प्युन को लगा कि मुझे शायद किसी चीज की जरूरत पडी होगी तो उसने मुझसे पूछा कि क्या जरूरत है आपको तो मैंने उन्हें कहा कि मुझे किसी भी चीज की जरूरत नहीं है. में जो प्रोजेक्टर इंस्टाल करने आया था. वह इंस्टाल हो गया है. आप अपने स्टाफ को बुलवा दिजिए मुझे डेमों देकर अभी निकलना है. तो प्युन ने बडे हेरत से पुछा कि इतनी जल्दी इंस्टाल हो गया. तो मैंने कहा कि हां हों गया है. और अब आप अपने स्टाफ को बुला लिजिए. फिर प्युन अपने आफिसर और बाकी स्टाफ को बुलवा देने चले गए. फिर जब तक स्टाफ वाले आते तब तक मेने सबकुछ अच्छे से सेट कर दिया. फिर जब सारे स्टाफ आये तो आफिसर ने पूछा कि सबकुछ सेटअप कर दिया. तो मैंने कहा कि जी sir तो आफिसर ने मेरी स्फुर्ती कि तारीफ करते हुए कहा कि क्या बात है. आप अभी तो आये थे. और इतनी जल्दी प्रोजेक्टर इंस्टाल कर भी दिया. मेने कहा कि जी सर, फिर sir से मेने कहा कि अगर आप लोग सब तैयार है तो में प्रोजेक्टर का डेमोंशेशन शुरू करु तो आफिसर ने कहा कि हां बिल्कुल शुरू करों तब मैंने sir से कहा कि sir मेरे पास अच्छे विडियोज नहीं है. कुछ विडियो गाने है. तो मैं वहीं आपको चलाकर दिखा देता हूं. फिर मैंने कुछ विडियो गाने चलाकर बताएं. और प्रोजेक्टर में जितने भी फंक्शन थे. उन्हें स्टेप बाई स्टेप चलाकर सारे स्टाफ को बता दिए. फिर सारा डेमोंसेशन कंम्पलिट करने के बाद मेने आफिसर को प्रोजेक्टर का बिल देते हुए कहा कि sir आप रिसिविंग पर सिग्नेचर कर दिजिए. और मुझे आज्ञा दिजिए. तो आफिसर ने मेरे काम और स्फुर्ती कि तारीफ करते हुए शाबाशी दी और कहा कि आप जहां भी जाते हों इतनी स्फुर्ती से ही काम करते हैं. या सिर्फ यहीं पर इतनी स्फुर्ती दिखाई. मेने कहा कि इसमें स्फुर्ती से क्या मतलब है. अगर आपको काम आता है तो फिर उस काम को खतम करों उस काम में टाइम पास करने की क्या जरूरत है. आपको काम करना आता है और अगर आप उस काम को करने में चार पांच घंटे लगा रहे हों तो फिर आप तो बैइमानी कर रहे हो. मक्कारी कर रहे हैं. तो आफिसर ने कहा कि काश तुम्हारी तरह हर व्यक्ति की सोच होती. तुम्हारी तरह हर कोई ईमानदार होता. मेने कहा कि मैं अब जाऊं sir तो आफिसर ने कहा कि हां आप जाइए. फिर मेने अपना काम खतम करने के बाद आफिस में मेडम को फोन करके बता दिया कि मेडम मेने प्रोजेक्टर इंस्टाल कर दिया है. और सारे स्टाफ को डेमों भी दें दिया. और आफिसर से रिसिविंग रिसिप्ट पर हस्ताक्षर भी करवा लिए हैं. तब मेडम ने कहा कि ठीक है. फिर मेडम ने sir को बोला कि sir दीपक ने प्रोजेक्टर इंस्टाल कर दिया है. झाबुआ में दीपक से और कोई काम करवाना है. या फिर उसे वापस बुलवा लु. तो sir ने कहा कि नहीं कोई काम नहीं है. दीपक को वापस आने के लिए बोल दो फिर मेडम ने मुझे दोबारा से फोन किया और कहा कि दीपक तुमने खाना खा लिया. तो मेने कहा कि नहीं मेडम तो मेडम ने कहा कि ठीक है तुम खाना खा लो और फिर वापस आ जाओ मेने कहा कि ठीक है मेडम फिर मैंने फोन रख दिया और मैं एक होटल में चला गया. और एक थाली का आर्डर दिया. फिर वेटर थाली लेकर आया. फिर मैंने खाना खाया और खाना खाकर बाहर निकल कर बस स्टैंड पर पहुंच गया