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"वो सब..."

"वो सब..." 🥀

वो रात...

वो चाँदनी...

वो ख़ामोश बातें...

वो पहली मुलाक़ात,

वो मासूम मुस्कान,

वो आँखों में सजे

उम्रभर के अरमान...

वो साथ चलने के वादे,

वो हाथों में हाथ,

वो सात फेरों की कसमें,

वो जीवन भर का साथ...

वो हर दुआ में तेरा नाम,

वो हर साँस में तेरा एहसास,

वो हर धड़कन में बसी

तेरी ही आवाज़...

फिर एक दिन

सब कुछ बदल गया...

तू सामने होकर भी

मेरा न हो सका,

और मैं तुझे खोकर भी

तुझसे कभी जुदा न हो सकी।

लोग कहते हैं—

वक़्त हर ज़ख्म भर देता है।

पर कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं,

जिनके ज़ख्म भर तो जाते हैं,

मगर उनके निशान

रूह पर हमेशा के लिए रह जाते हैं।

आज भी जब यादों की बारिश होती है,

दिल बस इतना ही कहता है—

वो रात...

वो बात...

वो मुलाक़ात...

सब एक अधूरी कहानी बन गई।

तू मिलकर भी मेरा न हो सका,

और मैं भूलने की लाख कोशिशों के बाद भी

तुझे कभी भूल न सकी।

मेरी ज़िंदगी में तू एक याद नहीं,

मेरी रूह पर लिखा हुआ

एक अमिट निशान बन गया...! ❤️‍🩹

— डॉ. सुरक सेल्वी चिन्नप्पन ✍️

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