😍कैमरे से ज़िंदगी तक😍
आजकल इंसानों से ज़्यादा
इंसान के बनाए कैमरे पर भरोसा किया जाता है,
हर मोड़ पर CCTV लगा है,
हर पल को रिकॉर्ड किया जाता है।
शायद इसलिए…
क्योंकि इंसान की याद पर भरोसा नहीं,
पर कैमरे की रिकॉर्डिंग पर यक़ीन है।
ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही है—
लोग हमारे सफ़र में आते हैं,
हाथ पकड़कर कहते हैं,
“हम तुम्हारे अपने हैं…”
फिर समय बदलता है,
रास्ते बदलते हैं,
और वही अपने
हमें किसी मोड़ पर अकेला छोड़ जाते हैं।
कैमरा तो कम से कम
जहाँ लगाया जाता है,
वहीं आख़िरी पल तक खड़ा रहता है…dt
मगर इंसान—
कभी-कभी साथ चलने का वादा करके भी
मंज़िल से पहले ही चले जाते हैं।
तब समझ आता है—
ज़िंदगी में हर साथ
उम्रभर का साथ नहीं होता,
हर “अपना” सच में अपना नहीं होता।
शायद इसलिए कैमरे अच्छे लगने लगे हैं,
कम से कम वो साथ छोड़ने का वादा तो नहीं करते…
जहाँ लगाए जाते हैं,
वहीं खड़े रहते हैं—
बिना मतलब, बिना वफ़ा का दावा किए।
और इंसान…
इंसान तो कभी-कभी
पूरी ज़िंदगी का हिस्सा बनकर,
एक दिन ऐसे चला जाता है
जैसे हमारी ज़िंदगी में
कभी था ही नहीं।
बस यही फ़र्क है कैमरे और अपनों में—
कैमरा सिर्फ़ तस्वीरें रिकॉर्ड करता है,
और अपने…
पूरी ज़िंदगी की याद बनकर
दिल में उम्रभर रिकॉर्ड हो जाते हैं। 🥀