अधरों के नीचे उसके, काला-सा तिल है प्यारा,
उसकी एक झलक ने, मन को कर लिया हमारा।
नयनों की वो शरारत, दिल पर करे इशारा,
उसकी हर एक अदा पर, दिल ने खुद को है वारा।
छुपाती है इसको वो,करती है सबसे किनारा,
न जाने कितनो का उसी पर रहता इशारा,
सिहर सी उठती है भीड़ से निकलती है जब वो,
अंधेरे में चमकती है वो बनकर सितारा।।

✍️ इंजीनियर राजन सोनी