💔शादी कोई मज़ाक नहीं, यार,💔
जो आज टूटी, कल दूसरी कर ली,
एक दिल को अधूरा छोड़कर,
किसी और के साथ नई दुनिया बसा ली।
वो सात फेरे कैसे भूल जाएँ,
जो ईश्वर को साक्षी मानकर लिए थे?
वो पवित्र वचन कैसे मिट जाएँ,
जो एक-दूसरे का हाथ थामकर दिए थे?
ज़िंदगी कोई फ्लाइट नहीं, यार,
जो एक छूट गई तो दूसरी पकड़ ली,
और हमसफ़र कोई टिकट नहीं,
जो मन किया तो बदल ली।
कभी सोचा है उस दिल के बारे में,
जो आज भी उसी मोड़ पर खड़ा है?
जिसने सात जन्मों का वादा किया था,
वो आज एक जन्म में ही क्यों बिछड़ा है?
वो आए या न आए, ये उसकी मर्ज़ी है,
मगर क्या वादों की कोई कीमत नहीं?
जिस रिश्ते पर ईश्वर का आशीर्वाद था,
क्या आज उसकी कोई अहमियत नहीं?
जिसे अपना मानकर जीवन सौंप दिया,
उसे भुलाना इतना आसान कैसे हो गया?
जिसके साथ जीने-मरने की कसमें खाईं,
वही रिश्ता अचानक अनजान कैसे हो गया?
शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं,
दो आत्माओं का पवित्र बंधन है।
ये कोई खेल नहीं, मेरे हमसफ़र,
ये विश्वास, समर्पण और जीवनभर का वचन है।
**जिस दिन इंसान वचनों की कीमत समझेगा,
उस दिन शायद कोई दिल यूँ नहीं टूटेगा।
क्योंकि शादी में नया हमसफ़र ढूँढ़ना ही मंज़िल नहीं,
कभी दिए हुए वचनों को निभाना भी ज़िंदगी है।**
🌹 नैतिक संदेश
शादी में साथ रहना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है एक-दूसरे की भावनाओं और सम्मान की रक्षा करना। अगर रिश्ता निभाना संभव न हो, तब भी सच बोलने, संवाद करने और सम्मानपूर्वक निर्णय लेने की ज़िम्मेदारी समाप्त नहीं होती।
ईश्वर के सामने लिए गए वचन सिर्फ होंठों से नहीं, दिल और कर्मों से निभाए जाते हैं।
✍️ डॉ. सुरक सेल्वी चिन्नप्पन