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कभी-कभी पति कोर्ट के चक्करों में फँसा देता है… 💔

💔कभी-कभी पति कोर्ट के चक्करों में फँसा देता है… 💔

जिस हाथ को पकड़कर

ज़िंदगी भर साथ चलने का वादा किया था,

कभी वही हाथ

हमें अदालत के दरवाज़े तक छोड़ आता है…

फिर रिश्ते की बातें

वकीलों की फाइलों में बंद हो जाती हैं,

प्यार के वादे

इल्ज़ामों में बदल जाते हैं,

और एक इंसान

हर तारीख़ पर

थोड़ा-थोड़ा टूटता जाता है…

कोर्ट में सिर्फ मुकदमे नहीं चलते,

वहाँ कई बार

किसी का विश्वास कटघरे में खड़ा होता है,

किसी की इज़्ज़त सवालों में उलझती है,

और किसी का पूरा परिवार

चुपचाप दर्द सहता है…

सबसे बड़ा दर्द तब होता है,

जब गैरों से नहीं,

उसी इंसान से लड़ना पड़ जाए

जिसे कभी अपना हमसफ़र कहा था…

तारीख़ पर तारीख़ मिलती रहती है,

पर रिश्ते की वो तारीख़

कभी वापस नहीं आती,

जब दो दिलों ने कहा था—

“हम हमेशा साथ रहेंगे…” 💔

कड़वा सच यही है—

कुछ लोग रिश्ता तोड़कर चले जाते हैं,

और कुछ लोग जाते-जाते

पूरी ज़िंदगी को अदालत के चक्करों में उलझा देते हैं… 🥀

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