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सात फेरों से अदालत तक

💔 सात फेरों से अदालत तक

एक अधूरी उम्र, एक अधूरा रिश्ता…

लेखिका: Dr. Surak Selvi Chinnappan

सात फेरों के साथ जो रिश्ता शुरू हुआ था,

वह एक दिन अदालत के दरवाज़े तक आ पहुँचा…

जिस हाथ को उम्रभर थामने की कसम खाई थी,

उसी हाथ से एक दिन बिछड़ने का दर्द लिख दिया गया…

कभी तुम्हारा नाम मेरी दुआओं में हुआ करता था,

आज वही नाम मेरी खामोशी की वजह बन गया।

कभी तुम्हारे साथ पूरी ज़िंदगी का सपना देखा था,

आज उसी ज़िंदगी में तुम्हारे बिना चलना सीख रही हूँ।

अदालत से आए कुछ कागज़ों ने

मेरे वर्षों के सपनों को सवालों में बदल दिया।

उन पन्नों पर कुछ शब्द लिखे थे,

मगर हर शब्द ने मेरे भीतर एक दुनिया उजाड़ दी।

काश! कोई उन कागज़ों से पूछता,

कि इनमें उन सात फेरों की यादें कहाँ हैं?

उन वादों का हिसाब कहाँ है,

जो दो दिलों ने ईश्वर के सामने किए थे?

मैंने तो रिश्ता तोड़ने की नहीं,

उसे बचाने की दुआ माँगी थी।

मैंने तो आखिरी उम्मीद तक तुम्हें पुकारा,

मगर तुम्हारी खामोशी ने हर पुकार को लौटा दिया।

तुमने कहा — अपनी ज़िंदगी देखो, अदालत आओ…

और मैं सोचती रह गई,

जिस इंसान के साथ अपनी पूरी ज़िंदगी देखी थी,

आज उसी के सामने अपनी शादी का अस्तित्व साबित करना होगा?

कितना अजीब है न…

सात फेरों में दो लोग एक-दूसरे के हो जाते हैं,

और अदालत में वही दो लोग

एक-दूसरे के लिए अजनबी बन जाते हैं।

मुझे तुमसे कोई हिसाब नहीं माँगना,

न ही अपने आँसुओं का कोई सबूत देना है।

बस इतना जानना है —

क्या कभी तुम्हें भी हमारी पहली मुलाकात याद आती है?

क्या कभी उन वादों की आवाज़ तुम्हारे दिल तक पहुँचती है?

और अगर कभी ज़िंदगी ने हमें फिर आमने-सामने ला खड़ा किया…

शायद तुम्हारे बालों में सफेदी उतर चुकी होगी,

मेरे चेहरे पर भी वक्त की लकीरें होंगी।

तुम्हारे साथ तुम्हारी नई दुनिया होगी,

और मेरे साथ मेरी अधूरी कहानी…

तुम शायद मुझे पहचान भी न पाओ,

लेकिन मैं तुम्हें पहचान लूँगी।

क्योंकि कुछ चेहरे आँखों से नहीं,

दिल की यादों से पहचाने जाते हैं।

शायद तुम मुस्कुराकर आगे बढ़ जाओगे,

और मैं भी अपनी आँखों में नमी छिपाकर मुस्कुरा दूँगी।

तुम्हारे लिए वह बस एक मुलाकात होगी,

लेकिन मेरे लिए उन सात फेरों की

एक पूरी उम्र फिर से जीवित हो जाएगी।

मैं तुम्हें रोकूँगी नहीं,

न तुम्हारी नई दुनिया से कोई शिकायत करूँगी।

बस मन ही मन इतना कहूँगी—

कभी एक रिश्ता था,

जिसमें मैंने अपना आज और आने वाला कल देखा था।

कभी एक इंसान था,

जिसके साथ उम्रभर चलने का सपना बुना था।

वह कहानी पूरी नहीं हुई,

मगर उसके किरदार को मैंने कभी झूठा नहीं माना।

🥀 मेरी आखिरी बात…

मैं नहीं जानती कि हमारी कहानी में गलती किसकी थी,

किसके पास कितने तर्क थे, किसके पास कितने जवाब…

लेकिन इतना जानती हूँ कि

रिश्ता टूटने के बाद भी उसकी यादें तुरंत नहीं मरतीं।

कानून दो लोगों को अलग कर सकता है,

लेकिन बीते हुए पलों को मिटा नहीं सकता।

अदालत फैसले सुना सकती है,

लेकिन किसी के दिल में दबी आखिरी उम्मीद नहीं पढ़ सकती।

क्योंकि…

कुछ रिश्ते सात फेरों से शुरू होते हैं,

अदालत के कागज़ों तक पहुँच जाते हैं,

मगर उनकी यादें किसी फैसले की मोहताज नहीं होतीं।

और कभी-कभी इंसान किसी को खोकर भी

उससे नफ़रत करना नहीं सीख पाता…

वह बस चुप रहना सीख जाता है।

💔 जीवन की सीख

शादी केवल दो लोगों का साथ नहीं,

दो परिवारों, दो विश्वासों और दो आत्माओं का वचन है।

रिश्ते में अहंकार से बड़ा संवाद होता है,

गुस्से से बड़ा धैर्य होता है,

और अलग होने से पहले एक-दूसरे को समझने की कोशिश बहुत ज़रूरी होती है।

हर टूटा रिश्ता बेवफाई की कहानी नहीं होता।

कुछ कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं,

कुछ सपने परिस्थितियों में बिखर जाते हैं,

और कुछ यादें उम्रभर दिल में रह जाती हैं।

— Dr. Surak Selvi Chinnappan 🥀

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