वापस आना मोहब्बत नहीं… एक इम्तिहान है💔
आज किसी ने मुझसे पूछा—
“अगर वो वापस आ जाए… तो?”
मैं कुछ पल खामोश रही,
क्योंकि सवाल उसके लौटने का नहीं था,
सवाल तो उस भरोसे का था
जो उसके जाने के साथ
टूटकर बिखर गया था।
जो इंसान एक बार
बिना मुड़कर चला गया,
क्या उसकी राह में
फिर से अपना दिल रख दूँ?
क्या बीते हुए कल की राख से
आज का रिश्ता जला दूँ?
माफ़ करना अलग बात है,
मगर टूटे हुए विश्वास को
पहले जैसा कर देना—
हर दिल के बस की बात नहीं।
कभी-कभी इंसान लौट आता है,
लेकिन उसके साथ
वो पुराना भरोसा नहीं लौटता।
वक़्त सिखा देता है—
मोहब्बत सिर्फ़ साथ रहने का नाम नहीं,
मुश्किल वक़्त में साथ निभाने का नाम है।
जो तुम्हें किसी और के लिए छोड़ सकता है,
वो कल किसी और के लिए
तुम्हें फिर छोड़ सकता है।
इसलिए हर लौटने वाले को
मोहब्बत समझ लेना ज़रूरी नहीं…
कुछ लोग लौटते हैं
क्योंकि उन्हें अपनी गलती समझ आती है,
और कुछ लौटते हैं
क्योंकि उन्हें अपना खोया हुआ सहारा याद आता है।
फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है—
एक पछतावा लेकर लौटता है,
दूसरा स्वार्थ लेकर।
और मेरा दिल अब इतना मासूम नहीं
कि हर दस्तक पर दरवाज़ा खोल दे।
अगर कभी तुम लौटो भी,
तो याद रखना—
दरवाज़ा शायद खुल जाए,
लेकिन दिल तक पहुँचने के लिए
तुम्हें फिर से वही रास्ता तय करना होगा
जिसे तुमने कभी अधूरा छोड़ दिया था।
क्योंकि…
“वापस आना मोहब्बत नहीं,
मोहब्बत तो वो है
जो जाने का ख़याल आते ही
रिश्ता बचाने की कोशिश करे।” 🌹
— डॉ. सुराक सेल्वी चिन्नप्पन