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अगर मोहब्बत होती… तो खामोशी इतनी लंबी न होती कहते हैं—

💔 अगर मोहब्बत होती… तो खामोशी इतनी लंबी न होती

कहते हैं—

“अगर वो चाहता,

तो मेरे लिए कुछ कर सकता था…”

शायद कर सकता था…

मुश्किलें तो सबकी ज़िंदगी में आती हैं,

मगर सच्ची मोहब्बत

मुश्किलों से भागती नहीं,

उनके सामने खड़ी होती है।

मैंने उसे खोने से ज़्यादा

उसे समझने की कोशिश की,

उसकी हर ख़ामोशी में

एक वजह खोजी,

हर दूरी में

एक मजबूरी समझी।

मैं उसके लिए

दुनिया से लड़ने को तैयार थी,

लेकिन वो…

शायद मेरे लिए

अपनी ख़ामोशी तक से

लड़ नहीं पाया।

सबसे ज़्यादा दर्द

उसके जाने का नहीं हुआ,

दर्द तो इस बात का हुआ

कि जब मुझे उसके साथ की ज़रूरत थी,

तब उसने मेरा हाथ नहीं थामा।

कभी-कभी इंसान

धोखे से नहीं टूटता,

बल्कि इस एहसास से टूटता है

कि जिसे उसने अपना समझा,

उसे उसकी तकलीफ़

कभी अपनी लगी ही नहीं।

आज भी उसकी खामोशी

मेरे भीतर बहुत कुछ कहती है…

क्योंकि कुछ रिश्ते

खत्म होने के बाद भी

दिल में सवाल छोड़ जाते हैं—

“अगर मैं तुम्हारे लिए सच में ज़रूरी थी,

तो तुमने मुझे बचाने की कोशिश

क्यों नहीं की?”

अब समझ आया—

मोहब्बत सिर्फ़ किसी को चाहने का नाम नहीं,

मोहब्बत तो तब साबित होती है

जब हालात कहें “छोड़ दो,”

और दिल कहे—

“नहीं, पहले इसे बचाने की कोशिश करते हैं।”

क्योंकि…

किसी का साथ छोड़ देना आसान है,

मगर किसी के टूटते हुए दिल को

समझकर उसे संभालना ही

सच्ची मोहब्बत है। 🌹

मोरल

रिश्तों में हमेशा बड़े-बड़े वादों की ज़रूरत नहीं होती।

कभी एक फोन, एक बातचीत, एक कदम आगे बढ़ाना ही

किसी रिश्ते को टूटने से बचा सकता है।

जिसे सच में खोना नहीं चाहते,

उसके लिए कोशिश करना सीखिए—

क्योंकि कई रिश्ते प्यार की कमी से नहीं,

खामोशी की वजह से खत्म हो जाते हैं। 🌹

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