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प्यारा सावन

अबकी जब सावन बरसा नहीं,

कोई अपना भी दिल से हँसा नहीं।

बारिश तो हुई शहर की गलियों में,

पर मेरे आँगन में कुछ भी खिला नहीं। ✍️🌧️

हुई बरसात सावन में, उमंगें खिल गईं फिर से,

बुझी-सी थी जो दिल में, वो तरंगें मिल गईं फिर से।

घटा छाई, फुहारें आईं, महक उठा ये सारा मन,

पुरानी यादों की गलियों में, खुशियाँ मिल गईं फिर से। 🌧️✨

इंजीनियर राजन सोनी

अम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश

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