
पहली बार मुस्कुराकर के उसने घायल कर दिया,
मैं संभला ही था, उसने फिर से मुस्कुरा दिया।
न जाने क्या कशिश थी उसकी उस मुस्कान में,
एक पल में ही दिल को अपना बना लिया।
सोचा था बचा लूँगा खुद को उसकी नजरों से,
मगर उसने नजरें मिलाकर फिर से हँसा दिया।
मैं समझता रहा इसे महज एक इत्तिफाक,
उसने हर बार मुस्कुराकर मुझे अपना पता दिया।
इंजीनियर राजन सोनी