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फ़ैसले और तक़दीर

फ़ैसले और तक़दीर

हर मोड़ पर ज़िंदगी एक सवाल रखती है,

कभी राह चुनती है, कभी मंज़िल बदलती है।

तक़दीर में क्या लिखा है, कौन जानता है,

मगर इंसान का फ़ैसला ही उसकी पहचान बनता है।

कुछ फैसले अपनों से दूर कर जाते हैं,

कुछ फैसले टूटे दिल को जीना सिखाते हैं।

कभी एक छोटा-सा कदम कहानी बदल देता है,

कभी गलत मोड़ इंसान को खुद से मिला देता है।

तक़दीर अगर नदी है,

तो फैसला उसकी नाव है,

किधर जाना है ज़िंदगी में—

ये चुनाव हमारे हाथ है।

हर चीज़ किस्मत के भरोसे छोड़ देना आसान है,

मगर कोशिश करते रहना ही इंसान की असली पहचान है।

जो मिलना है, वो किसी मोड़ पर मिल जाएगा,

जो छूट गया, वो कोई सबक देकर ही जाएगा।

हर हार के पीछे एक सीख छुपी होती है,

हर फैसला अपने साथ एक नई सुबह लाता है।

ज़िंदगी हमेशा हमारी पसंद के मुताबिक नहीं चलती,

मगर सही फैसला उसे एक नई दिशा ज़रूर देता है।

इसलिए फैसलों से डरना नहीं,

अपनी राह किसी और के हाथ सौंपना नहीं।

तक़दीर क्या देगी, ये वक्त तय करेगा,

लेकिन कौन-सी राह चुननी है—

ये हमारा फैसला तय करेगा।

क्योंकि

तक़दीर रास्ते दिखा सकती है,

मगर मंज़िल तक पहुँचने का हौसला

हमारे फैसले ही देते हैं।

मोरल — जीवन संदेश

तक़दीर हमारे हाथ में नहीं होती,

लेकिन अपने फैसले हमारे हाथ में होते हैं।

हर फैसला भविष्य को बदल सकता है,

इसलिए फैसला डर से नहीं,

समझदारी, साहस और विश्वास से लेना चाहिए।

क्योंकि कभी-कभी एक सही फैसला

पूरी ज़िंदगी की तक़दीर बदल देता है। 🌺🌹🌺

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