
कहीं हैं व्रत रखते तो कहीं जल चढ़ाते सावन में,
कहीं शिव को मनाते तो कहीं गीत गाते सावन में। बम-बम भोले की गूँज से महक उठता है हर आँगन,
हर दिल में प्रेम जगाते हैं भोलेनाथ सावन में।।
कोई गाड़ी से चलता है, कोई मोटर से जाता है,
कोई पैदल ही भोले की नगरी तक पहुँच जाता है।
कंधों पर कांवड़ लेकर, हर हर नाम वो गाता है,
सच्ची श्रद्धा के आगे हर मुश्किल झुक जाता है।
✍️इंजीनियर राजन सोनी