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संस्कार नहीं, अंतरात्मा का डर है 🌹

🌹 संस्कार नहीं, अंतरात्मा का डर है 🌹

✍️ डॉ. सुरक सेल्वी चिन्नप्पन

मैं किसी को धोखा नहीं देती

सिर्फ़ इसलिए नहीं

कि मुझे संस्कार सिखाए गए हैं…

मैं किसी का दिल नहीं तोड़ती

क्योंकि मेरी अंतरात्मा

मुझे ऐसा करने नहीं देती।

मुझे डर है—

लोगों से नहीं,

उस ईश्वर से

जो सब देखता है।

इंसान से झूठ बोलकर

शायद दुनिया को समझाया जा सकता है,

लेकिन उस परमात्मा से

क्या छुपाया जा सकता है,

जो हमारे शब्दों से पहले

हमारे मन को पढ़ लेता है?

मेरे लिए रिश्ते

किसी खेल का हिस्सा नहीं,

और किसी की भावनाएँ

कोई खिलौना नहीं।

अगर किसी का हाथ थामा है,

तो उसे निभाने की कोशिश करना

मेरी ज़िम्मेदारी है।

और अगर कभी रिश्ता निभाना संभव न हो,

तो धोखा देने के बजाय

सच बोलकर अलग होना बेहतर है।

क्योंकि किसी के विश्वास को तोड़कर

जीत भी जाएँ,

तो वह जीत

अंतरात्मा के सामने हार होती है।

मैंने रिश्ते इसलिए नहीं निभाए

कि लोग क्या कहेंगे…

मैंने उन्हें इसलिए निभाया

क्योंकि मेरा ईश्वर जानता है

कि मेरे मन में किसी के लिए

धोखा नहीं था।

दुनिया मेरे बारे में

कुछ भी फैसला करे,

मेरे लिए सबसे बड़ा न्याय

उस ईश्वर का है

जिसके सामने एक दिन

हर इंसान को अपने कर्मों का

उत्तर देना है।

🌹 Moral:

किसी इंसान को धोखा देने से पहले

एक बार अपने ईश्वर और अपनी अंतरात्मा से पूछ लेना—

क्योंकि दुनिया से छुपाया हुआ सच

शायद दुनिया भूल जाए,

लेकिन कर्मों का हिसाब

ईश्वर कभी नहीं भूलता।

सच्चाई कभी-कभी अकेली कर देती है,

लेकिन अंत में वही आत्मा को

सुकून देती है। 🌹

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