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दूसरी शादी के मंडप में पहली पत्नी

दूसरी शादी के मंडप में पहली पत्नी

सज रहा था मंडप,

शहनाइयाँ बज रही थीं,

दुल्हन की आँखों में

नए सपनों की रोशनी थी।

लेकिन उसी मंडप के बीच

एक चेहरा ऐसा भी आया,

जिसने अपने ही पति को

दूल्हे के रूप में पाया।

वो कोई अजनबी नहीं थी,

वो उसकी पहली पत्नी थी,

जिसके हाथों की मेहंदी

कभी उसी के नाम की थी।

वो चिल्लाई नहीं,

बस आँखों से सवाल किया—

“जिस हाथ को थामकर

तुमने जीवन भर साथ का वादा किया,

आज उसी हाथ में

किसी और का हाथ कैसे दे दिया?”

दूसरी दुल्हन भी सहम गई,

दूल्हे की आँखें झुक गईं,

और उसदूसरी शादी के मंडप में पहली पत्नी

सज रहा था मंडप,

शहनाइयाँ बज रही थीं,

दुल्हन की आँखों में

नए सपनों की रोशनी थी।

लेकिन उसी मंडप के बीच

एक चेहरा ऐसा भी आया,

जिसने अपने ही पति को

दूल्हे के रूप में पाया।

वो कोई अजनबी नहीं थी,

वो उसकी पहली पत्नी थी,

जिसके हाथों की मेहंदी

कभी उसी के नाम की थी।

वो चिल्लाई नहीं,

बस आँखों से सवाल किया—

“जिस हाथ को थामकर

तुमने जीवन भर साथ का वादा किया,

आज उसी हाथ में

किसी और का हाथ कैसे दे दिया?”

दूसरी दुल्हन भी सहम गई,

दूल्हे की आँखें झुक गईं,

और उस पल

शहनाइयों की आवाज़ से ज्यादा

एक टूटे हुए रिश्ते की खामोशी सुनाई दी।

शादी सिर्फ सात फेरों का नाम नहीं,

यह विश्वास की डोर होती है,

दो दिलों के बीच

ईमानदारी की एक डोर होती है।

अगर साथ नहीं निभाना था,

तो सच कहकर रास्ता अलग कर लेते,

किसी के सपनों को सजाकर

उन्हें यूँ बीच राह में न छोड़ते।

क्योंकि दूसरी शादी का मंडप

शायद फिर सज सकता है,

नई दुल्हन की मेहंदी

फिर रच सकती है…

लेकिन पहली पत्नी के दिल पर

जो चोट लगती है,

उसका रंग

किसी मेहंदी से नहीं मिटता।

रिश्ता धर्म से पहले

इंसानियत माँगता है,

शादी अधिकार से पहले

ईमानदारी माँगती है।

किसी को छोड़ना पड़े—

तो सम्मान से छोड़ो,

लेकिन किसी के विश्वास को

धोखे में मत बदलो।

क्योंकि टूटे हुए दिल की आवाज़

शायद दुनिया को सुनाई न दे,

लेकिन उस दर्द की गूँज

इंसान की पूरी ज़िंदगी में

सुनाई देती रहती है।

सीख

शादी एक बंधन है, कैद नहीं;

लेकिन विश्वास कोई खिलौना भी नहीं।

साथ निभा न सको तो सच बोलो,

किसी की ज़िंदगी को धोखे से मत तोड़ो। पल

शहनाइयों की आवाज़ से ज्यादा

एक टूटे हुए रिश्ते की खामोशी सुनाई दी।

शादी सिर्फ सात फेरों का नाम नहीं,

यह विश्वास की डोर होती है,

दो दिलों के बीच

ईमानदारी की एक डोर होती है।

अगर साथ नहीं निभाना था,

तो सच कहकर रास्ता अलग कर लेते,

किसी के सपनों को सजाकर

उन्हें यूँ बीच राह में न छोड़ते।

क्योंकि दूसरी शादी का मंडप

शायद फिर सज सकता है,

नई दुल्हन की मेहंदी

फिर रच सकती है…

लेकिन पहली पत्नी के दिल पर

जो चोट लगती है,

उसका रंग

किसी मेहंदी से नहीं मिटता।

रिश्ता धर्म से पहले

इंसानियत माँगता है,

शादी अधिकार से पहले

ईमानदारी माँगती है।

किसी को छोड़ना पड़े—

तो सम्मान से छोड़ो,

लेकिन किसी के विश्वास को

धोखे में मत बदलो।

क्योंकि टूटे हुए दिल की आवाज़

शायद दुनिया को सुनाई न दे,

लेकिन उस दर्द की गूँज

इंसान की पूरी ज़िंदगी में

सुनाई देती रहती है।

सीख

शादी एक बंधन है, कैद नहीं;

लेकिन विश्वास कोई खिलौना भी नहीं।

साथ निभा न सको तो सच बोलो,

किसी की ज़िंदगी को धोखे से मत तोड़ो।

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