

लड़ी लड़ाई मरते दम तक,
फिर भी हार न माने थे।
हो गए शहीद वतन के खातिर,
वो भारत माँ के दीवाने थे।
सीने पर गोलियाँ खाकर भी,
हँसते-हँसते बलिदान दिए।
माटी का कर्ज़ चुकाने को,
अपने प्राणों के दान दिए।
फाँसी के फंदे चूम लिए,
पर देश का मान न झुकने दिया।
आँखों में आज़ादी का सपना था,
उस सपने को मरने न दिया।
सर कटा दिया भारत माता पर,
पर तिरंगा झुकने न दिया।
अपना सब कुछ देश को देकर,
भारत का वर्चस्व धूमिल न होने दिया।
आज उन्हीं के बलिदानों से,
आज़ादी का सूरज आया है।
उन वीरों की कुर्बानी ने,
भारत का गौरव बढ़ाया है।
जब तक सूरज-चाँद रहेगा,
अमर रहेगी उनकी कहानी।
उनके त्याग को याद रखेंगे,
वीर सपूत हिंदुस्तानी।।
🇮🇳 जय हिंद! वंदे मातरम्! 🇮🇳
© इंजीनियर राजन सोनी — सर्वाधिकार सुरक्षित