"इस फ़ाइल में..." ⚖️💔
इस फ़ाइल में सिर्फ़ काग़ज़ नहीं हैं...
हर पन्ने पर
किसी माँ की बेचैन रातें हैं,
किसी पिता की झुकी हुई नज़रें हैं,
किसी बेटी के टूटे हुए सपने हैं,
और एक पूरे परिवार की बिखरी हुई दुनिया है।
इन सफ़ेद पन्नों पर
स्याही नहीं बहती,
यहाँ तो आँसू सूखकर
सबूत बन जाते हैं।
हर तारीख़ के साथ
एक उम्मीद जन्म लेती है,
और हर अगली तारीख़ पर
वही उम्मीद फिर से इम्तिहान देती है।
जिस रिश्ते को
प्यार, विश्वास और सात वचनों से सींचा था,
आज वही रिश्ता
दलीलों और दस्तावेज़ों में कैद खड़ा है।
काश...
रिश्ते अदालत तक पहुँचने से पहले
दिलों में ही सुलझा लिए जाते,
तो न किसी की माँ रोती,
न किसी पिता का सिर झुकता,
न किसी बेटी की मुस्कान
फ़ाइलों के बीच दफ़न होती।
याद रखिए...
अदालत की फ़ाइलों में
सिर्फ़ मुक़दमे नहीं होते,
हर पन्ने में एक परिवार की सिसकियाँ,
टूटा हुआ विश्वास,
और न्याय की आख़िरी उम्मीद
साँस ले रही होती है। ⚖️🥀
— डॉ. सुरक सेल्वी चिन्नप्पन ✍️