
दीपावली गीत — अंतरमन का दीप
अंतरमन में ज्योति जला कर,
दूर करो तुम अज्ञान अँधियारा।
देखो आज दीपावली है आई,
घर-घर दीप जले हैं प्यारा-प्यारा।।
मन के आँगन को स्वच्छ बनाकर,
प्रेम का दीप जलाओ तुम।
द्वेष, कपट और अहंकार मिटाकर,
मानवता का पाठ पढ़ाओ तुम।।
अमावस की काली रात में देखो,
जगमग करता है जग सारा।
अंतरमन में ज्योति जला कर,
दूर करो तुम अज्ञान अँधियारा।।
खुशियों की सौगात लिए फिर,
आई है यह शुभ बेला।
मिलकर सबके दीप जलाएँ,
प्रेम से भर दें जग मेला।।
इंजीनियर राजन सोनी 'निर्मय' ✍️