मैं अपने सपनों में लेकर उतरा हूँ।
हारा हुआ हूँ बेशक भले ही,
मगर नहीं, मैं भी बिखरा हुआ हूँ।
ठोकरों ने राह दिखाई है,
दर्द ने मुझको सिखाया है।
जो ख्वाब कभी आँखों में थे,
उन्हीं ख्वाबों को लेकर खड़ा हुआ हूँ।
अभी मंज़िल कहाँ मिली है मुझे,
अभी तो सफ़र में निकला हुआ हूँ।
गिरा हूँ कई बार ज़िंदगी में,
मगर हर बार संभला हुआ हूँ।
✍️ इंजीनियर राजन सोनी