Back to feed

नीलाम हुए रंग 🎨🖤

नीलाम हुए रंग 🎨🖤

तस्वीर में जो मुस्कान दिख रही है,

वह सिर्फ़ होंठों पर नहीं थी…

वह उन सपनों की रोशनी थी

जो हमने साथ जीने के लिए सजाई थी।

दुनिया की मुस्कान में

खुद की पहचान भूल गई,

सबको अपना बनाते-बनाते

एक दिन खुद से ही दूर हो गई।

उस दिन लगा था—

अब ज़िंदगी के सारे रंग पूरे हो गए।

मगर कौन जानता था,

जिस रिश्ते को दिल ने पूजा समझा,

एक दिन वही कागज़ों में साबित करना पड़ेगा।

रिश्तों को बचाने की कोशिश में

अपने हिस्से की खुशियाँ हार गई,

जो आईना कभी मेरा था,

उसमें भी किसी और की तस्वीर रह गई।

कहते हैं अदालत सिर्फ़ फैसला सुनाती है…

पर सच यह है—

जब शादी अदालत की फाइल बन जाती है,

तो सिर्फ़ रिश्ता नहीं टूटता।

मर जाता है वह भरोसा,

जो आँख बंद करके किसी का हाथ थाम लेता था।

मर जाता है वह सम्मान,

जो प्रेम को अपना घर मानता था।

और कई बार…

इंसान का वह हिस्सा भी मर जाता है

जो फिर कभी किसी से दिल लगाने की हिम्मत नहीं करता।

और जब होश आया,

तो जाना—

जिसे मोहब्बत समझकर उम्र दे दी,

उस सफ़र में मैं खुद कहीं पीछे रह गई।

आज तस्वीर अब भी वही है…

चेहरे अब भी मुस्कुरा रहे हैं…

पर उन मुस्कानों के पीछे

एक पूरी कहानी दफ़न है।

एक लड़की अब भी खड़ी है—

टूटी नहीं…

बस अपने बिखरे रंगों के बीच

अपना अस्तित्व ढूँढ रही है।

कुछ रिश्ते खत्म नहीं होते—

बस जीना छोड़ देते हैं।

मर्म:

“रिश्ते जब टूटते हैं, दर्द अलग होने का नहीं होता… दर्द उस इंसान को खोने का होता है, जिसे कभी अपना पूरा संसार माना था। लेकिन हर बिखरा रंग एक दिन फिर अपनी पहचान बना लेता है।” 🖤🎨

Baatcheet