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मुश्किल वक्त में जो साथ रहा

मुश्किल वक्त में जो साथ रहा

सजने वाली थी दुल्हन,

हाथों में मेहंदी थी,

आँखों में सपने थे,

हृदय में एक नई ज़िंदगी थी।

फिर अचानक किस्मत ने

एक ऐसा मोड़ दिखाया,

शादी के दिन ही

दर्द ने उसे अस्पताल पहुँचाया।

घरवालों ने कहा—

“शादी कुछ दिन टाल दो,

पहले बेटी को बचा लो,

फिर रिश्ते को संभाल लो…”

लेकिन उस दूल्हे ने

हार नहीं मानी,

न बीमारी से घबराया,

न अपनी दुल्हन का हाथ छोड़ा।

जिसके माथे पर

शादी का सिंदूर होना था,

आज उसी माथे पर

पट्टी बँधी थी…

जिसके गले में

वरमाला पड़नी थी,

आज उसके गले में

दर्द की साँसें थीं।

फिर भी वह उसके पास रहा,

उसकी आँखों में देखकर कहा—

“तुम ठीक हो जाओ,

बस इतना ही मेरा सपना है।”

किसी ने पूछा—

“शादी क्यों नहीं टाली?”

शायद उसका जवाब था—

“जब जीवन साथ जीने का वादा किया है,

तो मुश्किल में साथ छोड़ना

कैसा प्यार?”

फूलों से सजे मंडप से ज्यादा

खूबसूरत वह पल था,

जब एक इंसान ने

दूसरे इंसान का हाथ

मुश्किल समय में थामे रखा।

क्योंकि—

खुशियों में साथ चलने वाले

बहुत मिल जाते हैं,

लेकिन आँसुओं के बीच

जो हाथ थामकर खड़ा रहे,

वही सच्चा हमसफ़र कहलाता है।

शादी केवल

दुल्हन का श्रृंगार नहीं,

शादी केवल

सात फेरों का नाम नहीं…

शादी तो वह वादा है—

“तेरी हँसी में हँसूँगा,

तेरे आँसुओं में रोऊँगा,

और जब दुनिया तुझे कमजोर समझेगी,

तब मैं तेरा सहारा बनूँगा।”

क्योंकि सुंदर चेहरा

वक्त के साथ बदल जाता है,

धन-दौलत भी

एक दिन कम-ज्यादा हो जाती है…

लेकिन—

मुश्किल घड़ी में निभाया गया साथ

दिल पर ऐसा नाम लिख जाता है,

जिसे वक्त भी कभी मिटा नहीं पाता।

सीख ❤️

रिश्ता वही सच्चा है

जो अच्छे दिनों में नहीं,

बुरे दिनों में पहचाना जाए।

प्रेम वह नहीं जो केवल

मुस्कुराहट में साथ दे—

प्रेम वह है जो आँसुओं में भी

हाथ छोड़ने से इनकार कर दे।

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