Personal Story
खाक़ी
रहा हूँ दौड़ दिन और रात ख़ाकी तुझको पाने कोअगर तू मिल न पाई मैं कहूँगा क्या ज़माने कोजो सोते चैन से समझेंगे क्या मेरी वो हालत कोहै दफनाए कई सपने बस इक सपना सजाने कोकभी धूपों ने तोड़ा है कभी सर्दी ने मारा हैनिकलता रोज हूँ फिर भी मै खुद को आजमाने कोके...
ShayarMaahi