Personal Story
श्रृंगार
जो सभी यूं ही चाहें मुझको तो क्यूँ ही मैं श्रृंगार करूँ मन का श्रृंगार तो जानो तुम तन के श्रृंगार के आगे हैं मैं लाल- गुलाबी क्यूँ पहनूँ जब श्वेत भी मुझ पर जंचता है उस कंगन को मैं क्यूँ खनकाऊँ जो साड़ी में मेरी फंसता हैरत्न जड़ित हार मैं पहनूँ क्य...