Relationships
“एक इंसान में पूरी दुनिया”
समझ नहीं आता यार,कैसे दुनिया में इंसानों को देखते–देखतेकिसी एक इंसान मेंहम अपनी पूरी दुनिया देखने लगते हैं।भीड़ होती है चारों तरफ़,चेहरे हज़ारों नज़र आते हैं,पर दिल उसी पर रुक जाता हैजिसमें सुकून के मायने आते हैं।वो हँस दे तो दिन सँवर जाता है,वो उ...
PRATEEK SANJU JAISWAL