Motivation
“कल्पना करो मैं वहीं खड़ा हूँ”
कल्पना करो मैं वहीं खड़ा हूँ, जहाँ हवा में खामोशी घुली,पेड़ों की शाखों पर यादों की, हल्की-हल्की रोशनी तली।धूप भी जैसे ठहर गई हो, पत्तों पर अपनी चाल लिए,और मैं खड़ा हूँ उस मोड़ पे, दिल में सौ सवाल लिए।कल्पना करो मैं वहीं खड़ा हूँ, जहाँ रास्ते मुड़क...
Niraj Kandle0