Personal Story
ग़ज़ल
जिस बेवफ़ा की लिक्खी कहानी है इन दिनोंउसकी जफा का आँख में पानी है इन दिनोंकोई भी हक़ वो प्यार का करते नहीं अदारस्मे- वफ़ा मुझे ही निभानी है इन दिनोंजाने- बहारां जब से वो मेरे क़रीब हैमहकी है रुत फ़िज़ा भी सुहानी है इन दिनोंख़ुशबू से तर बतर तेरी सांसे हैं...
Mamta Gupta "नाज़"