Personal Story
मुक्तक
01कभी शोला कभी शबनम ,कभी अंगार होती है।कभी पाषाण सी निष्ठुर सुमन सुकुमार होती है।बदलता वक्त जब -जब है, बदलती है अदाएं यह,कभी यह ज़िन्दगी कश्ती,कभी पतवार होती है।।02साँसों की बंसी को स्वरों से सजाना चाहिए।ज़िंदगी की ग़ज़ल को गुनगुनाना चाहिए।रोने से भरत...
Dr. ragini swarnkar sharma