Personal Story
एक औरत
"कब कहाँ मैं कुछ करती हूँ"सुबह उठते ही चूल्हा चौंका,नाश्ता सबके लिए बनाती हूँ,कर फिर तैयार बच्चों को,टिफ़िन इनके हाथ थमाती हूँ,भूल कैसे सकती हूँ मां जी की दवाई,ऐनक छड़ी बाबू जी को थमाती हूँ,पोंछ पसीना माथे से थोड़ा आराम का सोचती हूँ,फिर बाबूजी के लिए...
AmanAjnabi