Personal Story
उलझन
दिन थका सा थापर मन की चहकइंतजार करती थीउस बस जो ज़िंदगी को मुझ तक लौटा लाती थी..।।वो नन्हें नन्हें हाथजो मुझे जकड़े रहते थेवो अब मुझे ही समेट लेते हैंजब भी कोई संकटमुझ तक आने की कोशिश करता है.।।मेरी परी कब मेरी रक्षा कवच बन गयीमेरी चिरैया कब मेरी शे...